भारत में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) संबंधी बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लाने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज भारी निवेश करेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि इंटेलिजेंस की लागत घटाने और भारत के सॉवरिन कंप्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर जियो और रिलायंस अगले सात वर्षों के दौरान 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।
अंबानी ने कहा कि यह कोई काल्पनिक निवेश नहीं है। उन्होंने कहा, ‘यह धैर्यपूर्ण, अनुशासित और राष्ट्र निर्माण की पूंजी है, जिसे टिकाऊ आर्थिक मूल्य सृजन के लिहाज से डिजाइन किया गया है।’
अंबानी ने आज इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान अपने संबोधन में कहा कि जियो भारत को इंटेलिजेंस युग में ले जाएगा। उन्होंने कहा, ‘भारत इंटेलिजेंस को किराये पर नहीं ले सकता है। हम इंटेलिजेंस की लागत में उसी तरह से भारी कमी लाएंगे जिस प्रकार हमने डेटा की लागत को कम किया था।’ उन्होंने कहा कि एआई का आना अभी बाकी है और इसके आने से काम का कोई नुकसान नहीं होगा।
रिलायंस समूह साल 2031 तक करीब 110 अरब डॉलर का निवेश करेगा जो किसी निजी कंपनी द्वारा किया गया सबसे बड़ा निवेश है। इसकी तुलना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कुछ दिग्गज वैश्विक कंपनियों द्वारा किए गए निवेश से की जाती है। साल 2025 में गूगल, एमेजॉन और माइक्रोसॉफ्ट ने अगले पांच वर्षों के दौरान 67 अरब डॉलर के संयुक्त निवेश पैकेज की घोषणा की थी।
साल 2030 तक भारत में एमेजॉन का कुल निवेश 75 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। इसी प्रकार माइक्रोसॉफ्ट ने साल 2026 से 2029 के बीच 17.5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है जो इस साल के लिए घोषित 3 अरब डॉलर के निवेश से अतिरिक्त होगा। साथ ही गूगल ने भी अगले पांच वर्षों के दौरान 15 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है।
अंबानी ने इन निवेशों के लिए रूपरेखा भी प्रस्तुत की। पहले निवेश के तहत, जियो जामनगर में गीगावॉट स्तर का डेटा सेंटर स्थापित करेगी। अंबानी ने कहा कि 2026 की दूसरी छमाही में 120 मेगावॉट से अधिक की क्षमता ऑनलाइन हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य कनेक्टिविटी की ही तरह इंटेलिजेंस को सभी के लिए सुलभ बनाना है।
दूसरी पहल ग्रीन पावर है। अंबानी ने कहा, ‘एआई की भारी मांगों के लिए टिकाऊ, लागत प्रभावी ऊर्जा सुनिश्चित करने वास्ते गुजरात के कच्छ और आंध्र प्रदेश में सौर परियोजनाओं द्वारा एंकर किया गया 10 गीगावॉट तक रेडी सरप्लस ग्रीन पावर उपलब्ध होगा।’
एआई के लिए बिजली की भारी मांग को पूरा करने के लिए कम कीमत पर बिजली की सतत अपूर्ति के लिए गुजरात के कच्छ और आंध्र प्रदेश की सौर परियोजनाओं से 10 गीगावॉट तक अतिरिक्त अक्षय ऊर्जा तैयार है।
तीसरा, राष्ट्रव्यापी एज कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना। एज कंप्यूट लेयर को जियो नेटवर्क के साथ गहराई से एकीकृत किया जाएगा जो इंटेलिजेंस को रिस्पॉन्सिव, लो-लैटेंसी और किफायती बनाएगी ताकि वह भारत के लोगों के लिए सुलभ हो सके। अंबानी ने कहा, ‘किराने की दुकानों से लेकर क्लीनिक तक, क्लासरूम से लेकर खेतों तक हर जगह इंटेलिजेंस एज पर लाइव रहेगा।’
अंबानी ने कहा कि एआई की कहानी अब बदल रही है। अब यह मायने नहीं रखता कि सबसे अच्छा मॉडल किसके पास है, बल्कि जोर इस बात पर दिया जा रहा है कि उपयोग के पैमाने और रफ्तार के लिहाज से सबसे दमदार परिवेश कौन तैयार कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘इसलिए हम भारतीय उद्यमों, स्टार्टअप, आईआईटी, आईआईएससी और अनुसंधान संस्थानों के साथ व्यापक साझेदारी के लिए एक परिवेश तैयार करेंगे।’
अंबानी ने कहा कि इस तरह की पहल प्रधानमंत्री के एआई से लैस विकसित भारत के सपने को साकार करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा, ‘मोदीजी का एआई से लैस विकसित भारत का दृष्टिकोण वैश्विक स्तर पर विकसित ग्लोबल साउथ के लिए भी एक रूपरेखा है। अगर एआई का सही उपयोग किया जाए तो यह सभी के लिए समृद्धि के दौर की शुरुआत कर सकता है।’
अंबानी ने आगाह किया कि एआई फिलहाल एक ऐसे चौराहे पर मौजूद है जहां से निकलने वाली एक राह उसे महंगे, दुर्लभ, कंप्यूट केंद्रित बनाने और असमानता को बढ़ाने की ओर ले जाती है। मगर दूसरा रास्ता एआई को सभी के लिए सुलभ, किफायती और फायदेमंद बनाने की दिशा में जाता है। अंबानी ने कहा, ‘हम दुनिया की बेहतरीन प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ साझेदारी करेंगे। हमारी साझेदारी इंटेलिजेंस के आयातक के रूप में नहीं बल्कि एक नई एआई शताब्दी के वास्तुकार के रूप में होगी।’