बिजनेस स्टैंडर्ड - डेटा संरक्षण
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, June 27, 2019 06:15 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

डेटा संरक्षण

संपादकीय /  January 22, 2019

अहमदाबाद में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन को संबोधित करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने व्यक्तिगत डेटा के स्वामित्व से जुड़े ऐसे सवालों की ओर ध्यान आकृष्ट किया जो आने वाले दिनों में नियामकों के लिए महत्त्वपूर्ण विषय हो सकते हैं। अंबानी ने कहा कि नई विश्व व्यवस्था में डेटा की महत्ता पुरानी व्यवस्था में महत्त्वपूर्ण रहे तेल के समान है और यह नई तरह की संपदा है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से भारतीय डेटा का नियंत्रण और स्वामित्व भारतीयों के पास होना चाहिए, न कि कंपनियों, खासतौर पर विदेशी कंपनियों के पास। इस मसले को लेकर अंबानी की राय सही है और उन्हें इस बात के लिए बधाई दी जानी चाहिए कि वह निरंतर इस मुद्दे को उठाते रहे हैं कि डेटा स्वामित्व भविष्य में देश की वृद्धि के लिहाज से अहम है। बहरहाल, देश में हालिया नियामकीय और नीतिगत कदमों के संदर्भ में देखे तो कुछ ऐसे सवाल भी हैं जो अंबानी के कदमों से संबंधित हैं।

 
अंबानी, जियो के भी मालिक हैं जिसने देश के दूरसंचार और डेटा क्षेत्र में उथलपुथल मचा दी है। ऐसे में जब वह कहते हैं कि देश के डेटा पर कंपनियों का नहीं बल्कि भारतीयों का नियंत्रण और अधिकार होना चाहिए तो वह गलत नहीं कहते। यह बात अलग है कि भारतीय और वैश्विक कंपनियों के बीच अंतर रेखांकित किए जाने को यहां उनके द्वारा अपने फायदे के लिए इस्तेमाल की गई बात कहा जा सकता है। परंतु इसे देश में डेटा स्वामित्व की उपभोक्तान्मुखी नीति तैयार करने का न तो आधार माना जा सकता है और न ही माना जाना चाहिए। एक बार जब डेटा स्वामित्व का अधिकार निजी तौर पर भारतीयों को मिल गया है तो यह उन पर छोड़ देना चाहिए कि वे उसका क्या करते हैं। आखिरकार यह उनकी संपत्ति ठहरी। अगर उनको किसी गैर भारतीय कंपनी से अच्छी कीमत या अच्छी सेवा मिलती है तो उसे यह अधिकार उन्हें देने का हक होना चाहिए। हां, ऐसा राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। यह मुक्त व्यापार का मूलभूत सिद्धांत है जो यहां भी लागू होता है। अन्य क्षेत्रों की तरह यहां भी यह सुनिश्चित करेगा कि उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी शक्तियों के बीच उच्चतम संभावित मूल्य प्राप्त हो। इसका विकल्प यह हो सकता है कि प्राथमिकता वाली भारतीय कंपनियों का एक समूह बनाया जाए जो प्रतिस्पर्धा से परे हो ताकि वे उपभोक्ताओं का लाभ ले सकें। डिजिटल क्षेत्र में बॉम्बे क्लब जैसी लॉबीइंग की दलील स्वीकार्य नहीं है।
 
इस चर्चा का संदर्भ ध्यान देने लायक है। हाल के दिनों में कंपनियों  और नियामकों के बीच डेटा के स्थानीयकरण की बात कई बार उभरी है। भारतीय रिजर्व बैंक ने गत वर्ष विभिन्न पेमेंट सिस्टम को आदेश दिया था कि वे अपने डेटा को स्थानीय स्तर पर रखें ताकि केंद्रीय बैंक उसकी बेहतर निगरानी कर सके। यह सुविचारित कदम नहीं था क्योंकि इससे भुगतान तंत्र की लागत में इजाफा होना था और देश के नागरिकों की निजता में कमी भी आनी तय थी। इतना ही नहीं सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति ने मांग की कि न केवल भुगतान बल्कि भारतीय नागरिकों से जुड़े काम कर रही तमाम कंपनियों के डेटा सेंटर भारत की सीमा में स्थापित किए जाएं। ऐसा ही नियम ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी लागू किया जा सकता है। ये तमाम बातें कारोबार के लिए अस्वीकार्य गतिरोध खड़े करती हैं और भारतीय डेटा के संरक्षण के नाम पर उपभोक्ताओं को ही नुकसान पहुंचाती हैं। ऐसे नियमन के केंद्र में भारतीय उपभोक्ता होने चाहिए, न कि भारतीय कंपनियां या अफसरशाह। सरकार और नियामकों को अंबानी की बातों पर ध्यान देना चाहिए लेकिन उनका क्रियान्वयन इस तरह नहीं किया जाना चाहिए कि केवल भारतीय कंपनियों को लाभ हो। 
Keyword: data, anil ambani, jio, telecom,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या भारत को कॉर्पोरेट कर में करनी चाहिए कमी?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.