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पानीपत के कपड़ा निर्यात में 30 फीसदी कमी की आशंका

Last Updated- December 09, 2022 | 4:45 PM IST

पानीपत के  करीब 250 घरेलू कपड़ा निर्यातकों पर मंदी की जबरदस्त मार पड़ रही है। यहां के कपड़ा निर्यातक अमेरिका और यूरोप के विभिन्न देशों में होम फर्निशिंग उत्पादों का निर्यात करते हैं।


पानीपत के निर्यातकों ने बताया कि चूंकि विदेशी बाजारों में मांग में कमी आ रही है, इसी वजह से यहां के घरेलू वस्त्र उद्योग के निर्यात आंकड़ों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

यहां के निर्यातक यह भी आशंका जता रहे हैं कि मौजूदा वित्त वर्ष में होम फर्निशिंग उत्पादों के निर्यात में 25-30 फीसदी तक की कमी आ सकती है।

पिछले वित्त वर्ष के दौरान पानीपत से कुल 3,000 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था। यहां उल्लेखनीय है कि पानीपत के होम फर्निशिंग उद्योग यहां से किए जाने वाले निर्यात में 80-90 फीसदी का योगदान देते हैं।

पानीपत में करीब 250 निर्यात इकाइयां हैं जो दरी, चटाई, टेबल कवर, बेडशीट, परदा, गलीचा और कालीन आदि को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा, जमर्नी और मलेशिया में निर्यात करते हैं।

हतकरघा निर्यात निर्माता एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश वर्मा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि विदेशी बाजारों में मांग में आई कमी के परिणामस्वरूप पानीपत की हथकरघा इकाइयां मांग के अनुसार ही उत्पादन करेंगी। उद्योगपतियों के अनुसार पानीपत में करीब 3,000 हतकरघा इकाइयां हैं ।

लेकिन मांग में कमी की वजह से इन इकाइयों की उपयोग क्षमता आधे तक घट गई है। हथकरघा उद्योग एक उच्च श्रम वाला क्षेत्र है इसलिए मांग में कमी के परिणामस्वरूप भारी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी भी हुई है।

हालांकि सही संख्या का पता लगा पाना आसान नहीं है लेकिन पानीपत स्थित उद्योगपतियों के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान वस्त्र उद्योग क्षेत्र में, जिसमें  हथकरघा भी शामिल है, करीब 30,000 कर्मचारियों की छंटनी की गई है।

पानीपत के रणनीतिक प्रबंधन सलाहकार वी के बत्रा ने बताया कि इस वक्त पानीपत में होम फर्नीसिंग उद्योग पर जबरदस्त दबाव है इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि वे इस क्षेत्र के लिए राहत पैकेज का ऐलान करें और उनके शिकायतों के निपटान के लिए घरेलू वस्त्र उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करें।

बत्रा ने यह भी बताया कि सरकार को चाहिए कि वे यहां के उद्योगों के लिए बैंकों से दिए जाने वाले ऋणों पर लगाए जाने वाले ब्याज दरों में थोड़ी नरमी लाएं। उन्होंने उद्योग से मूल्यवर्धन पर जोर देने की अपील भी की।

First Published - January 4, 2009 | 8:42 PM IST

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