जहाज बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी एचडी ह्युंडै तूतीकोरिन में शिपयार्ड बनाने की तैयारी कर रही है। इस परियोजना में करीब 2 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान है।
रविवार को मदुरै में आयोजित तमिलनाडु इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव 2025 को संबोधित करते हुए एचडी ह्युंडै समूह की प्रमुख इकाई एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग ऐंड ऑफशोर इंजीनियरिंग (एचडी केएसओई) के उपाध्यक्ष एवं प्रमुख (कॉरपोरेट प्लानिंग) हन्ने चोई ने कहा कि इस योजना को शुरू में स्मिथ प्रोजेक्ट- शिपबिल्डिंग मेक इन इंडिया टुगेदर विद ह्युंडै के रूप में संदर्भित किया गया था। उन्होंने कहा, ‘मगर मुझे लगता है कि इसे शिपबिल्डिंग मेक इन तमिलनाडु विद ह्युंडै कहा जा सकता है।’
यह खबर कोचीन शिपयार्ड और मझगांव डॉक शिपबिल्डर द्वारा दो अलग-अलग परियोजनाओं के तहत तूतीकोरिन में कुल 30,000 करोड़ रुपये के निवेश पर सहमति जताने के बाद आई है। इन परियोजनाओं से करीब 55,000 नौकरियां सृजित हो सकती हैं।
तमिलनाडु सरकार ने राज्य में एचडी ह्युंडै द्वारा एक नया शिपयार्ड बनाने के निर्णय का स्वागत किया है। राज्य सरकार ने एक बयान में कहा गया है कि इससे तमिलनाडु के नजरिये, स्थिरता और आर्थिक ताकत में वैश्विक उद्योग के भरोसे का पता चलता है।
उद्योग मंत्री टीआरबी राजा के कार्यालय ने कहा, ‘शिपयार्ड तूतीकोरिन में बनाया जाएगा जहां विश्वस्तरीय शिपयार्ड के लिए उपयुक्त जलवायु एवं भौगोलिक स्थितियां हैं। उद्योग की मजबूत उपस्थिति और बंदरगाह बुनियादी ढांचे में प्रमुख निवेश के साथ विस्तार की स्पष्ट गुंजाइश है।’
समझौते पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, राजा और एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग ऐंड ऑफशोर इंजीनियरिंग के वरिष्ठ नेतृत्व की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।
बयान में कहा गया, ‘तमिलनाडु को एचडी ह्युंडै ने इसलिए चुना क्योंकि राज्य में एक स्पष्ट नीतिगत रूपरेखा, तेजी से समन्वय और इस तरह की परियोजना के लिए एक मजबूत तटीय परिवेश है। राज्य ने व्यवहार्य स्थलों की पहचान जल्दी कर ली और प्रतिभा, बुनियादी ढांचा एवं प्रोत्साहन के साथ उनका समर्थन किया। तमिलनाडु ने लंबी अवधि के शिपयार्ड के संचालन के लिए भरोसेमंद माहौल तैयार किया है।’
जहाज निर्माण का रोजगार गुणक काफी उच्च है। इसे अक्सर भारत में छह गुना बताया जाता है, जिसका मतलब साफ है कि प्रत्यक्ष तौर पर एक नौकरी के सृजन से करीब छह नौकरियों को बल मिलता है। जहाज निर्माण श्रम बहुल उद्योग है और इससे कई सहायक क्षेत्रों को भी फायदा होता है।
तमिलनाडु अपनी समुद्री आकांक्षाओं को आगे बढ़ा रहा है। वह तटीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और प्रतिभा तैयार करने के लिए शिपयार्ड विकास को प्राथमिकता दे रहा है। पिछले चार वर्षों के दौरान इन जिलों में लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया जिससे 10 लाख से अधिक नौकरियां पैदा हुईं।