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जब DFS Secretary बन गए राजा विक्रमादित्य

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नागराजू ने बड़ी विनम्रता से बताया कि वह बैंक के बॉस के बॉस हैं। मगर कोई फर्क नहीं पड़ा।

Last Updated- May 22, 2025 | 11:24 PM IST
finance ministry
प्रतीकात्मक तस्वीर

किंवदंती है कि गुप्त वंश के राजा विक्रमादित्य अक्सर अपनी प्रजा के कल्याण और उनकी स्थितियों का जायजा लेने के लिए आम आदमी की वेशभूषा में उनके बीच जाते थे। हाल में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव भी बैंकों की ग्राहक सेवाओं का जायजा लेने के लिए विक्रमादित्य की भूमिका में आ गए।

1993 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एम नागराजू 8 अप्रैल को दोपहर के भोजन के बाद नॉर्थ ब्लॉक से निकले, जहां वित्त मंत्रालय मौजूद है। वहां से वह एक बड़े सरकारी क्षेत्र के बैंक की संसद मार्ग शाखा में सामान्य ग्राहक बनकर पहुंच गए। उन्होंने शाखा प्रबंधक से मिलने की दरख्वास्त की।

बैंक शाखा के प्रमुख ने सचिव को एक अधिकारी से बात करने के लिए कहा, जो अपने मोबाइल फोन पर बात करने में बेहद व्यस्त थे। दूसरे बैंकर ने भी उनसे बातचीत करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। उसी वक्त नागराजू ने बड़ी विनम्रता से बताया कि वह बैंक के बॉस के बॉस हैं। मगर कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि दिल्ली में इस तरह नाम की शेखी बघारना कोई नई बात नहीं है।

सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) के पद पर तैनात शाखा प्रबंधक और दूसरे अधिकारी भी उस ‘ग्राहक’ से बात करने के लिए तैयार नहीं थे। सरकारी क्षेत्र के बैंकिंग उद्योग में एजीएम का पद वरिष्ठ प्रबंधन का हिस्सा होता है जो आम तौर पर स्केल-5 अधिकारी होते हैं। उप महाप्रबंधक, महाप्रबंधक और मुख्य महाप्रबंधक शीर्ष प्रबंधन ग्रेड में होते हैं।

बिना समय गंवाए नागराजू ने बैंक शाखा के ग्राहक सेवा से जुड़े अपने अनुभव के बारे में बैंक के मुख्यालय को बताया। इसके परिणाम तुरंत सामने आए। एजीएम का तबादला दूरदराज के एक गांव में कर दिया गया। यह बैंक शाखा उन तीन अलग-अलग सरकारी बैंकों की शाखाओं में से एक थी, जिनका डीएफएस सचिव ने उस शाम दौरा किया था। मेरा मानना है कि अन्य दो बैंकों में उनका अनुभव पहले जितना बुरा नहीं था, लेकिन बैंक शाखाओं के माहौल और बैंकरों के व्यवहार ने उन्हें यह जरूर बता दिया कि बैंकों में बेहतर ग्राहक सेवा की तत्काल जरूरत है।

ग्राहक सेवा और उत्कृष्टता अब देश की वित्तीय प्रणाली में चर्चित शब्द हैं। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दोनों भारतीय बैंकिंग में एक नया अध्याय लिख रहे हैं। केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) ऑनलाइन मंच है जो 24 घंटे सेवाएं देने के लिए उपलब्ध है। इस मंच के माध्यम से कोई भी अपनी शिकायत, सरकारी अधिकारियों के पास दर्ज करा सकता है। यह मंच लगभग दो दशकों से मौजूद है। लेकिन यह मंच कभी इतना सक्रिय नहीं रहा। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग द्वारा जून 2007 में बनाया गया यह पोर्टल केंद्र और राज्य सरकारों के सभी मंत्रालयों और विभागों से जुड़ा हुआ है।

सीपीजीआरएएमएस गूगल प्ले स्टोर से तो डाउलोड किया ही जा सकता है, यह यूनिफाइड मोबाइल ऐप्लिकेशन फॉर न्यू-एज गवर्नेंस (उमंग) के एकीकृत मोबाइल ऐप्लिकेशन के माध्यम से भी नागरिकों के लिए सुलभ है। इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा भारत में मोबाइल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया ‘उमंग’, केंद्र से लेकर स्थानीय सरकारी निकायों से जुड़ी देश भर की ई-गवर्नेंस सेवाओं तक पहुंच बनाने के लिए एक एकल मंच मुहैया कराता है।

सीपीजीआरएएमएस पर दर्ज शिकायत की स्थिति का जायजा, शिकायतकर्ता के पंजीकरण कराने पर मिली  एक अनूठी आईडी के साथ लिया जा सकता है। यदि कोई शिकायतकर्ता अपनी शिकायत के समाधान से संतुष्ट नहीं है तब वह अपील दायर कर सकता है। शिकायतों में पेंशन मिलने में देरी से लेकर ट्रेन टिकट खरीदने में हुई कठिनाई और कई अन्य बातें भी शामिल हो सकती हैं। विभिन्न मंत्रालयों की रैंकिंग यह देखकर होती है कि उन्होंने समस्याएं कैसे सुलझाईं।

मैं समझता हूं कि बैंकों और बीमा कंपनियों के खिलाफ बहुत सारी अनसुलझी शिकायतें हैं और वित्त मंत्रालय का मौजूदा स्थान 21वां है। यही कारण है कि डीएफएस इस पर सीधे ध्यान दे रहा है। यदि बैंक और बीमा कंपनियां शिकायतें दर्ज होने के 21 दिनों के भीतर समस्या सुलझाने में सक्षम नहीं हैं तब संबंधित संस्थाओं के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क किया जाता है।

आम तौर पर डीएफएस सचिव बैठकें करते हैं, जिनमें बैंकों और बीमा कंपनियों के प्रबंध निदेशक या कार्यकारी निदेशक शिकायतकर्ताओं के साथ मौजूद होते हैं। ऐसी पहली बैठक 18 जनवरी, 2024 को हुई थी। उस वक्त से इस साल 22 अप्रैल तक ऐसी नौ बैठकें हो चुकी हैं। ऐसी बैठकों की सूचना सात दिन पहले दी जाती है।

हाल ही में ऐसी ही एक शिकायत के दौरान एक बैंक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई जो फाइल गुम होने के कारण भुगतान नहीं कर रहा था। शिकायतकर्ता एक वरिष्ठ नागरिक थे, जिन्हें गलती नहीं होते हुए भी कई बार हरियाणा के गुरुग्राम में चौथी मंजिल पर मौजूद बैंक शाखा तक पहुंचने के लिए काफी सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। एक अन्य मामले में एक स्वास्थ्य बीमा कंपनी को दावा निपटाने के लिए मजबूर किया गया, जिसे वह देने को तैयार नहीं थी क्योंकि ग्राहक ने कथित तौर पर पॉलिसी खरीदते समय पहले से मौजूद बीमारी का खुलासा नहीं किया था। ऐसे में सवाल यह था कि आखिर बीमा कंपनी ने बिना जांच किए पॉलिसी बेची ही क्यों?

एक और मिसाल यह है कि एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) के दावे का निपटान नहीं कर रहा था जो एक वर्ष की सावधि जीवन बीमा योजना है और जिसका नवीनीकरण सालाना किया जाता है। आरआरबी के प्रायोजक बैंक को यह सुनिश्चित करना पड़ा कि दावा निपटाया जाए। पीएमजेजेबीवाई बीमा कराने वाले व्यक्ति की मृत्यु पर लगभग 2 लाख रुपये की बीमा राशि देता है चाहे मौत का जो भी कारण रहा हो। वार्षिक प्रीमियम लगभग 436 रुपये है।

डीएफएस ने ग्राहक सेवा से जुड़े मामलों पर बैंकों और बीमा कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन के साथ पिछली बैठक 21 अप्रैल को की थी।

आरबीआई की एकीकृत लोकपाल योजना के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो साल में शिकायतों की संख्या करीब 50 प्रतिशत सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ी है और यह वर्ष 2023-24 में 9.34 लाख पर पहुंच गई है। आरबीआई के लोकपाल कार्यालय द्वारा जितनी संख्या में शिकायतों पर काम किया गया है उसमें लगभग 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यह वर्ष 2022-23 के 2.35 लाख से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 2.94 लाख हो गई है।

डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने भी ‘नो योर कस्टमर’ (केवाईसी) नियमों पर चिंता जताई है क्योंकि केवाईसी का नवीकरण न होने की स्थिति में बैंकों ने ग्राहकों के खाते को फ्रीज कर दिया जो उनके लिए मानसिक यंत्रणा वाली स्थिति है।

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First Published - May 22, 2025 | 10:42 PM IST

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