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मिस-सेलिंग की असली कहानी: बैंक इंसेंटिव ढांचे का नतीजा

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आईआरडीएआई के बीमा भरोसा पोर्टल को वित्त वर्ष 25 में 2,57,790 शिकायतें मिलीं। यह एक साल पहले की तुलना में 20 फीसदी अधिक थीं

Last Updated- February 19, 2026 | 10:02 PM IST
Banks

मध्य भारत के एक कस्बे में मौजूद एक बड़े सरकारी बैंक की शाखा गत वर्ष कम लागत वाले चालू और बचत खातों (कासा) तथा खुदरा सावधि जमा में न्यूनतम वृद्धि हासिल करने में भी नाकाम रही। वास्तव में उसने तीन प्रमुख कारोबारी मानकों पर वार्षिक वृद्धि लक्ष्यों को हासिल नहीं किया। कासा और सावधि जमा में गिरावट के अलावा उसके फंसे हुए कर्ज की मात्रा भी बढ़ गई।

इसके बावजूद शाखा प्रमुख विदेश यात्रा हासिल करने के मुहाने पर ही था। इसका इंतजाम बैंक के बीमा साझेदार ने किया था। उसने जीवन बीमा योजनाओं के मामले में बहुत उल्लेखनीय कारोबार किया था। जब बैंकर को पता चला कि शाखा प्रीमियम लक्ष्य से केवल 10 लाख रुपये दूर है तो उसने और बीमा एजेंट ने (जो खुद को बैंक कर्मचारी बताता था) उमा देवी (बदला हुआ नाम) नामक एक 71 वर्षीय महिला से कहा कि वे अपनी जमा राशि निकाल कर बेहतर रिटर्न वाली योजना में डाल दें।

सालों तक वह बुजुर्ग महिला पैसे निकालने और अपने स्वर्गीय पति द्वारा खोली गई सावधि जमा का नवीनीकरण कराने बैंक आती रहीं थीं। अब इनमें से दो सावधि जमा का भुगतान लेकर उन्हें जीवन बीमा योजना में निवेश कर दिया गया था। इसका सालाना प्रीमियम 10 लाख रुपये था। किसी ने यह नहीं सोचा कि अगले पांच साल तक वह कैसे यह राशि चुकाएंगी। बदले में शाखा प्रबंधक को सात दिन की विदेश यात्रा का अवसर मिला। वह ‘प्रशिक्षण’ के लिए अमेरिका गया।

इस साल जब बीमा कंपनी ने दोबारा प्रीमियम मांगा तो उमा देवी स्तब्ध रह गईं। वह भागी-भागी शाखा गईं। तब तक प्रबंधक की पदोन्नति हो चुकी थी और वह किसी दूसरे राज्य में जा चुका था। बीमा एजेंट जिसने बैंक कर्मी होने का स्वांग रचा था वह दूसरी कंपनी में जा चुका था।

काफी दिक्कतों के बाद शाखा ने उन्हें उनके हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव दिखाया। उन्होंने आग्रह किया कि उनकी राशि वापस कर दी जाए क्योंकि अगले महीने उनकी बेटी की शादी थी। शाखा ने मना कर दिया। बीमा कंपनी ने भी पल्ला झाड़ लिया और कहा कि उन्होंने कागजात पर हस्ताक्षर किए थे।

उनकी बेटी इस मामले को वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग तक ले गई। विभाग के सचिव एम नागराजू ने व्यक्तिगत रूप से इसकी सुनवाई करने का निश्चय किया। सुनवाई के एक दिन पहले पूरी राशि बिना किसी कटौती के उमा देवी के खाते में वापस कर दी गई।

ऐसे मामले देश भर में आम हैं। भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, जीवन बीमा क्षेत्र में अनुचित व्यावसायिक चलन के अंतर्गत वर्गीकृत शिकायतें वित्त वर्ष 2025 में लगभग 14.3 फीसदी बढ़कर 26,667 हो गईं, जो वित्त वर्ष 2024 में 23,335 थीं। बीमा कंपनियों के खिलाफ शिकायतों के प्रतिशत के रूप में देखा जाए तो अनुचित व्यावसायिक चलन से संबंधित शिकायतें वित्त वर्ष 24 में 19.33 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 22.14 फीसदी हो गईं।

आईआरडीएआई के बीमा भरोसा पोर्टल को वित्त वर्ष 25 में 2,57,790 शिकायतें मिलीं। यह एक साल पहले की तुलना में 20 फीसदी अधिक थीं। इनमें से करीब 1.20 लाख शिकायतें जीवन बीमा से संबंधित और 1.37 लाख शिकायतें सामान्य बीमा और स्वास्थ्य बीमा से संबंधित थीं।

वित्त वर्ष 23 में जीवन बीमा कंपनियों के खिलाफ दर्ज कुल शिकायतों में लगभग पांच में से एक मिस-सेलिंग के बारे में थीं। निजी क्षेत्र से बहुत अधिक शिकायतें मिलीं। बीमा लोकपाल परिषद को वित्त वर्ष 2024 में 52,575 शिकायतें प्राप्त हुईं। बीमा लोकपाल नियम, 2017 के तहत स्थापित यह परिषद पॉलिसीधारकों को बीमा कंपनियों और उनके मध्यस्थों या बीमा दलालों के खिलाफ शिकायतों के निवारण के लिए एक वैकल्पिक मंच प्रदान करती है।

एक प्रमुख स्वतंत्र मंच पर वित्त वर्ष 25 की आखिरी तिमाही से वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही के बीच में इस तरह की ​शिकायत में 45 फीसदी का इजाफा हुआ। इसमें मिस-सेलिंग की अहम भूमिका थी। इस पीड़ा से गुजरने वालों में कई विधवा और वरिष्ठ नागरिक हैं जो अपनी सेवानिवृत्ति के बाद मिली राशि बैंकों में जमा करते हैं। लगभग सभी घर खरीदने वालों को साथ में बीमा योजना खरीदने पर विवश किया जाता है। इसी प्रकार सूक्ष्म, लघु और मझोले उपक्रम कर्जदारों को कर्जदाता बीमा साझेदारों की योजनाओं में निवेश पर विवश किया जाता है।

आर्थिक समीक्षा में भी कहा गया है कि बीमा क्षेत्र की प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति वित्त वर्ष 25 में 74.4 लाख करोड़ रुपये हो गई। प्रीमयम राशि वित्त वर्ष 21 के 8.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 11.9 लाख करोड़ रुपये हो गई। प्रबंधनाधीन संपत्ति में 91 फीसदी हिस्सा जीवन बीमा का है।

इसके बावजूद देश में बीमा पहुंच वित्त वर्ष 25 में सकल घरेलू उत्पाद के 3.7 फीसदी तक रही। यह वैश्विक औसत का आधा है। जीवन बीमा क्षेत्र में पहुंच में मामूली गिरावट आई और यह 2024 के 2.8 फीसदी से कम होकर 2.7 फीसदी रह गई। इस बीच बीमा घनत्व यानी प्रति व्यक्ति प्रीमियम 95 डॉलर से बढ़कर 97 डॉलर हो गया। यानी यह कम पहुंच और उच्च लागत वाला मामला है। इसे समुचित बनाए बिना 2047 तक सबके लिए बीमा का स्वप्न पूरा नहीं होगा।

आईआरडीएआई ने एक अप्रैल 2023 से कमीशन भुगतान विनियम, 2023 और प्रबंधन व्यय (ईओएम) विनियम, 2023 लागू किए, जिन्होंने कमीशन ढांचे को उदार बनाया और कठोर उत्पाद वार कमीशन सीमा से हटकर कंपनी स्तरीय प्रबंधन व्यय की कुल सीमा पर आधारित व्यवस्था की ओर बदलाव किया। नए ढांचे में, बीमा कंपनियां अपनी स्वयं की कमीशन संरचनाएं तैयार कर सकती हैं, बशर्ते कि कुल कमीशन और अन्य व्यय निर्धारित ईओएम सीमाओं के भीतर रहें।

आईआरडीएआई ने एक कदम आगे बढ़ते हुए इन नियमों को आईआरडीएआई (प्रबंधन व्यय, जिसमें बीमा कंपनियों का कमीशन शामिल है) विनियम, 2024 में समेकित कर दिया, जिससे अनुपालन सरल हो गया। लेकिन यह मूल सिद्धांत बरकरार रहा कि निदेशक मंडल को कमीशन संरचना तय करने का विवेकाधिकार है बशर्ते कि यह कुल ईओएम सीमा के भीतर रहे (सामान्य बीमा के लिए 30 फीसदी और स्वास्थ्य बीमा के लिए 35 फीसदी)।

वास्तव में उदार कमीशन ढांचा और तीव्र बिक्री लक्ष्यों का संयोजन बैंक एश्योरेंस को और भी आक्रामक चैनल बना सकता है, यदि विनियमित संस्थाओं के बोर्ड संयम नहीं बरतते और बैंक प्रबंधन कर्मचारी पुरस्कारों और प्रोत्साहनों को तृतीय पक्ष आय से जोड़ना जारी रखते हैं। बैंक एश्योरेंस में बैंक और बीमा कंपनी मिलकर बैंक के ग्राहकों को बीमा उत्पाद बेचते हैं।

इस साझेदारी में बैंक कर्मचारी और टेलर ग्राहक के लिए बिक्री और संपर्क के केंद्र बन जाते हैं। जो ग्राहक शाखाओं में बुनियादी बैंकिंग सेवाओं के लिए आते हैं, विशेषकर ग्रामीण और कस्बाई शाखाओं में, उन्हें व्यवस्थित रूप से प्रेरित करके या दबाव डालकर ऐसे जटिल वित्तीय उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है जिन्हें वे न तो चाहते हैं और न ही समझते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया मसौदा संशोधन निर्देशों की यही पृष्ठभूमि है। यह वित्तीय उत्पादों की बिक्री और मार्केटिंग से संबंधित हैं। मिस-सेलिंग कोई अपवाद नहीं है, बल्कि अधिकांश बैंकों में वर्तमान प्रोत्साहन संरचना का एक उप-उत्पाद है। यदि वे ग्राहकों का विश्वास पाना चाहते हैं तो उन्हें इसे बेहतर बनाना होगा।


(लेखक जन स्मॉल फाइनैंस बैंक के वरिष्ठ सलाहकार हैं)

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First Published - February 19, 2026 | 10:00 PM IST

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