कोविड-19 महामारी की घातक दूसरी लहर ने सुधार की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया और माना जा रहा है कि पिछली तिमाहियों की तुलना में अप्रैल-जून तिमाही में उत्पादन में भारी कमी आई होगी।
उदाहरण के लिए निक्केई मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक में जून माह में 11 महीनों में पहली बार गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों ने कहा कि कंपनियों में चिंता फैल रही थी जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन अनुमान में कमी आई। आठ उद्योगों वाले बुनियादी क्षेत्र में मई में सालाना आधार पर 16.8 फीसदी का विस्तार देखा गया क्योंकि आधार कम था लेकिन उत्पादन में क्रमिक आधार पर 3.75 फीसदी की कमी आई। बुनियादी क्षेत्रों के उत्पादन में कमी औद्योगिक उत्पादन को प्रभावित करेगी और वृद्धि के समग्र आंकड़ों पर भी इसका असर होगा। अप्रैल और मई में ई-वे बिल तैयार करने में कमी भी आर्थिक गतिविधियां कम होने का सूचक है।
परंतु एक उजला पक्ष भी है। दूसरी लहर का असर पिछले वर्ष की तरह गंभीर नहीं रहा क्योंकि लॉकडाउन स्थानीय स्तर पर लगाए गए। इसके अलावा संक्रमण में गिरावट के साथ कारोबारी गतिविधियों में सुधार भी काफी तेज गति से हुआ। इसकी वजह से सरकार की राजकोषीय स्थिति अपेक्षाकृत ठीक रही।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-मई में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 8.2 फीसदी था क्योंकि कर और गैर कर राजस्व दोनों में तेजी रही। वस्तु एवं सेवा कर संग्रह बीते कुछ महीनों में तेजी से सुधरा है क्योंकि अनुपालन बेहतर हुआ है। सरकार का अनुमान है कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। प्रत्यक्ष कर संग्रह में भी तेज इजाफा देखने को मिला। इसके अलावा सरकार को रिजर्व बैंक से अपेक्षा से अधिक अधिशेष हस्तांतरण से भी अपेक्षा से अधिक लाभ हुआ।
चालू वित्त वर्ष में सुधार इस बात पर निर्भर करेगा कि कोविड-19 संक्रमण का प्रसार किस गति से होता है। आबादी के बड़े हिस्से का पूरा टीकाकरण होने में अभी समय लगेगा। इस बीच वित्त मंत्रालय ने अन्य विभागों से कहा है कि दूसरी तिमाही में व्यय सीमित किया जाए। इसमें स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय शामिल नहीं हैं। सरकार ने ऐसे समय में व्यय की प्राथमिकता तय करके अच्छा किया है जब राजकोषीय घाटा बढ़ा हुआ है। संक्रमण कम होने और आर्थिक गतिविधियों में सुधार से राजस्व सुधरेगा और सरकार को वर्ष की दूसरी छमाही में अधिक खर्च करने का अवसर मिलेगा। इससे वृद्धि को तेजी दी जा सकेगी।
मजबूत बाहरी मांग और निर्यात में अहम इजाफा आर्थिक सुधार को गति देगा। रिजर्व बैंक की ताजा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट दर्शाती है कि बैंकिंग तंत्र में तनाव बढ़ सकता है लेकिन यह पहले जताए गए अनुमानों से काफी कम होगा और बैंक ऋण देने की स्थिति में रहेंगे। इन बातों से निकट भविष्य में सुधार को गति मिलनी चाहिए।
व्यापक स्तर पर देखें तो यदि कोविड के मामले सीमित रहते हैं और आने वाले महीनों में टीकाकरण की गति तेज होती है तो सरकार को मध्यम अवधि का व्यापक आर्थिक खाका पेश करना चाहिए। मुद्रास्फीति के दबाव को देखते हुए शायद आरबीआई को आने वाली तिमाहियों में नीतिगत समायोजन वापस लेना पड़े। इसके अलावा सार्वजनिक ऋण के स्तर को देखते हुए सरकार को स्पष्ट राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के पथ पर जाना होगा। निकट भविष्य में वैश्विक वृद्धि के मजबूत रहने का अनुमान है। परंतु यह स्वत: अर्थव्यवस्था के लिए उच्च स्थायी वृद्धि में नहीं बदलेगा। हमें नीतिगत योजना की जरूरत पड़ेगी।