facebookmetapixel
Advertisement
Stocks To Watch Today: कमाई का मौका या जोखिम? आज इन शेयरों पर रखें नजर, दिख सकता है एक्शनभारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर मुहर: 100% शुल्क-मुक्त पहुंच, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का रास्ता खुला26th Business Standard-Seema Nazareth Award: पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने मीडिया को दी ‘संवाद’ की नसीहतसन फार्मा ने ऑर्गेनान पर लगाया बड़ा दांव, 11.75 अरब डॉलर में खरीदने का ऐलानसंजय कपूर संपत्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने कहा— मध्यस्थता अपनाएं, लड़ने की यह उम्र नहीं हैसर्ट-इन की बड़ी चेतावनी: क्लॉड मिथोस जैसे AI मॉडल से बढ़ा साइबर हमलों का खतरा, रहें सावधानबंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में वादे तो बड़े, पर आर्थिक गुंजाइश कमआबकारी नीति मामला: केजरीवाल ने अदालत को लिखा पत्र, सुनवाई में नहीं होंगे शामिलमुख्य आर्थिक सलाहकार का विजन: ऊर्जा संकट और आर्थिक दिक्कतों का समाधान है ‘उत्पादकता में बढ़ोतरी’निजी बैंकों में तकनीक का असर: ऐक्सिस, HDFC और RBL बैंक में घटी कर्मचारियों की संख्या

ऊर्जा शक्ति: सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विनिर्माण की चुनौतियां

Advertisement

कई देशों द्वारा स्थानीय सौर ऊर्जा और इसकी वैल्यू चेन को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही अच्छी-खासी सब्सिडी शायद अपेक्षित परिणाम न दे पाए।

Last Updated- April 09, 2024 | 10:59 PM IST
IREDA Share Price:

कई देशों द्वारा स्थानीय सौर ऊर्जा और इसकी वैल्यू चेन को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही अच्छी-खासी सब्सिडी शायद अपेक्षित परिणाम न दे पाए। उदाहरण के तौर पर अमेरिका में प्रोत्साहन केवल उच्च उत्पादन लागत की आंशिक भरपाई करते हैं। ब्लूमबर्गएनईएफ के प्रमुख अमेरिकी सौर विश्लेषक पोल लेजकानो का कहना है, ‘दक्षिण पूर्व एशिया के सर्वश्रेष्ठ मॉड्यूल जल्द ही अमेरिकी डेवलपर के लिए काफी सस्ते हो जाएंगे। अधिकांश कारखाना योजनाओं के खत्म होने के कारण कुछ आपूर्तिकर्ता ही अमेरिका में मॉड्यूल बना पाएंगे।’

स्थानीय विनिर्माण के लिए विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया जा रहा है और आयात को हतोत्साहित किया जा रहा है। अगर विदेश से सामान लाने की लागत कर शुल्क के बाद भी कम है तब ये दोनों तरीके कारगर नहीं होंगे। दरअसल संरक्षित बाजार की मूल्य साम्यता भी उसी स्तर पर चली जाती है जो बिना संरक्षण के होता है जैसा कि अमेरिका में होता है।

एक नये उद्योग में जब विनिर्माण की मात्रा बढ़ती है तब शुरुआत की ऊंची लागत लंबे समय में रणनीतिक तौर पर प्रतिस्पर्धात्मक लाभ में तब्दील हो सकती है जब तक कि उत्पाद की नकल आसानी से नहीं की जाती है। लेजकैनो का कहना है, ‘सौर ऊर्जा से जुड़े उद्योग में ऐसा होने की संभावना नहीं है क्योंकि ऐसे उत्पाद कोई भी बना सकता है।’

यूरोप भी स्थानीय पैनल निर्माण को प्रोत्साहित कर रहा है। स्विटजरलैंड के सौर पैनल निर्माता कंपनी मेयर बर्गर ने जर्मनी में एक विनिर्माण इकाई बंद करने की घोषणा की और उन्होंने इसके बाद अमेरिका में विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया। उनका कहना था कि यूरोप में व्यापारिक माहौल खराब हो रहा है।

कंपनी ने पिछले महीने एक बयान जारी किया था जिसमें लिखा था, ‘जर्मनी के फ्रीबर्ग (सैक्सोनी) साइट पर सोलर मॉड्यूल उत्पादन, मार्च 2024 के मध्य में ही बंद कर दिया गया जिससे अप्रैल से लागत में अच्छी बचत होगी। जर्मनी के थालहेम में सौर सेल उत्पादन के जरिये फिलहाल कुछ वक्त तक एरिजोना के गुडइयर में अमेरिकी सौर मॉड्यूल निर्माण के उत्पादन में तेजी के लिए समर्थन दिया जाएगा।’

भारत में बने सौर पैनलों को बढ़ावा देने और साथ ही सौर ऊर्जा उत्पादन को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के प्रयास के तहत में नीतिगत बदलावों की एक श्रृंखला के बाद भारत का सौर पैनल आयात पर फिर से रोक लगाने का फैसला वास्तव में निर्माताओं के लिए सकारात्मक है लेकिन इसका मतलब डेवलपर के लिए इसकी कीमत अधिक होगी और वह भी ऐसे वक्त में जब वैश्विक आपूर्ति की अधिकता कम कीमतों के संकेत दे रही है। दुनिया की सबसे बड़ी निर्माण कंपनियां ना सिर्फ चीजें बनाती हैं बल्कि वे सभी चीजों पर नियंत्रण भी करती हैं और साथ ही ये कंपनियां बड़ी मात्रा में उत्पादन कर सकती हैं।

उदाहरण के तौर पर चीन की जिंको सोलर ने 2023 में 78 गीगावॉट से अधिक का निर्यात किया। इस साल इसके 100-110 गीगावॉट तक बढ़ने की उम्मीद है। यह चीन के बाद चार सबसे बड़े बाजारों, अमेरिका, भारत, ब्राजील और जर्मनी के लिए संयुक्त रूप से नए निर्माण करने के पूर्वानुमान से अधिक है। चीन इस साल 300 गीगावॉट से अधिक की क्षमता स्थापित कर सकता है।

यूरोपीय आयोग ने इस सप्ताह, रोमानिया में एक सौर अनुबंध की विदेशी सब्सिडी विनियमन के तहत जांच शुरू की जिसका मकसद सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में बोली लगाने वाले को दी गई विदेशी सब्सिडी की बाजार में संभावित विकृत भूमिका की जांच करना है। यूरोपीय संघ के आंतरिक बाजार आयुक्त थियरी ब्रेटन ने ब्लूमबर्ग न्यूज से कहा, ‘यूरोप के लिए सौर पैनल रणनीतिक रूप से हमारे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, यूरोप में नौकरियों और आपूर्ति की सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण हो गए हैं। जांच का उद्देश्य यूरोप की आर्थिक सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा को बनाए रखना है।’

मीथेन नियंत्रण

हाल में कुछ घटनाक्रम से मीथेन उत्सर्जन की बेहतर निगरानी और नियंत्रण की जा सकेगी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, तेल, प्राकृतिक गैस और कोयला से जुड़ा ऊर्जा क्षेत्र मानवीय गतिविधियों के कारण वैश्विक मीथेन उत्सर्जन के मुख्य स्रोतों में से एक है जबकि दूसरा क्षेत्र कृषि है। आईईए ने कहा कि वर्ष 2023 में जीवाश्म ईंधन से अनुमानतः 12 करोड़ टन मीथेन उत्सर्जन में से दो-तिहाई उत्सर्जन 10 देशों, अमेरिका, रूस, ईरान, तुर्कमेनिस्तान, वेनेजुएला, चीन, अल्जीरिया, सऊदी अरब, कनाडा और इराक से हुए हैं।

ऐसा लगता है कि उत्सर्जन करने वाले इस गैस के उत्सर्जन को सीमित करने के लिए कार्रवाई करना चाहते हैं क्योंकि यह 20 वर्षों में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 80 गुना अधिक गर्मी को बांधे रख सकता है। दुबई में कॉप28 सम्मेलन में 50 से अधिक तेल और गैस कंपनियों ने तेल एवं गैस डिकार्बोनाइजेशन चार्टर पर हस्ताक्षर कर दशक के अंत तक अपने मीथेन उत्सर्जन को सीमित करने का वादा किया था।

मीथेन उत्सर्जन का पता लगाना और इसे मापना अब आसान हो गया है जैसे कि मीथेनसैट उपग्रह के माध्यम से यह संभव है। इंटरनैशनल मीथेन इमिशन ऑब्जर्वेटरी संयुक्त राष्ट्र का एक हिस्सा है और 2021 में जी20 की बैठक में इसकी शुरुआत होने के बाद से ही कई सफलताएं मिली हैं। विश्व बैंक की ग्लोबल फ्लेयरिंग ऐंड मीथेन रिडक्शन पार्टनरशिप विकासशील देशों पर केंद्रित है। अब तक 155 देश ग्लोबल मीथेन प्लेज के तहत उत्सर्जन कम करने पर सहमति जता चुके हैं और इसकी राष्ट्रीय नीतियों में भी झलक मिल रही है।

नतीजतन, एसएलबी जैसी कंपनियां मीथेन उत्सर्जन प्रबंधन समाधानों में बहुत अधिक दिलचस्पी दिखा रही हैं। हालांकि, इसको लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। बीएनईएफ के अपस्ट्रीम ऑयल विश्लेषण के प्रमुख इल्हान सवुत का कहना है, ‘संयुक्त राष्ट्र और इससे संबंधित निकाय एवं उपग्रहों ने नीति निर्माताओं और निवेशकों की हाल की जांच को बढ़ा दिया है। यह शुरुआती दिलचस्पी वास्तव में कम मीथेन उत्सर्जन में तब्दील होगी या नहीं यह अभी तक निश्चित नहीं है।’

(लेखिका न्यूयॉर्क में ब्लूमबर्गएनईएफ की वरिष्ठ संपादक, वैश्विक नीति हैं)

Advertisement
First Published - April 9, 2024 | 10:59 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement