facebookmetapixel
Advertisement
MSCI EM: 0.8% पर अटकी Reliance-HDFC Bank की हिस्सेदारी, TSMC बनी विदेशी निवेशकों का फेवरेटUS-Iran War: Trump ने ‘Project Freedom’ रोका, Iran से डील की उम्मीद बढ़ीHero MotoCorp ने किया 75 रुपये डिविडेंड का ऐलान, जानिए रिकॉर्ड डेट₹100 से कम वाले शेयरों में बड़ा ब्रेकआउट, इन 5 स्टॉक्स पर बुलिश हुए एक्सपर्टStock Market Today: GIFT Nifty में तेजी, US-Iran डील की उम्मीद से कच्चा तेल फिसला; कैसी रहेगी आज बाजार की चाल?Stocks To Watch Today: आज के ट्रेडिंग सेशन में L&T, Biocon, Vedanta समेत कई स्टॉक्स निवेशकों के रडार पर रहेंगे; बाजार में रह सकता है जोरदार मूवशोरूम्स में उमड़ी भीड़: अप्रैल में बिके रिकॉर्ड 26.1 लाख वाहन, ग्रामीण इलाकों ने शहरों को पछाड़ा!बायोकॉन में उत्तराधिकार का आगाज! किरण मजूमदार-शॉ ने भतीजी क्लेयर को चुना अपना वारिसगोदरेज एरोस्पेस की ऊंची उड़ान: 2032 तक सालाना 20% विकास का लक्ष्य, मुंबई में लगेगा नया प्लांटMahindra & Mahindra Q4 Results: चौथी तिमाही में मुनाफा 42% उछला, राजस्व में 29% की दमदार बढ़त

Editorial: एयर इंडिया दुर्घटना: जांच में गति, पारदर्शिता और जवाबदेही हो प्राथमिकता

Advertisement

एएआईबी की भूमिका अहम, रिपोर्ट में देरी या अस्पष्टता भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा सकती है

Last Updated- June 15, 2025 | 11:04 PM IST
Air India crash
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अहमदाबाद हवाई अड्‌डे से उड़ान भरने के बाद एयर इंडिया की उड़ान 171 के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से सबका ध्यान एक बार फिर विमानन कंपनी, नियामक और देश में नागरिक विमानन की व्यापक स्थिति की तरफ चला गया है। यह विमान रनवे से दो किलोमीटर दूर एक मेडिकल हॉस्टल पर जा गिरा। मगर अभी तक यह पता नहीं है कि यह विमान दुर्घटना का शिकार कैसे हुआ। बेहतर यही होगा कि इस विषय में कोई अटकल लगाने के बजाय जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जाए। यह भी आवश्यक है कि ये रिपोर्ट प्रासंगिक अधिकारियों द्वारा पारदर्शी ढंग से तैयार की जाए और इसे समय पर जारी किया जाए।

इस जांच की नोडल एजेंसी एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) को बनाया गया है जो केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय की ही शाखा है। भारत ने 2012 में एक स्वतंत्र जांच एजेंसी का गठन किया था। इसने जो इकलौती बड़ी जांच की वह थी एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान संख्या 1344 के 2020 में कोझिकोड हवाई अड्‌डे पर लैंडिंग के समय दुर्घटनाग्रस्त होने की। दुनिया भर में अधिकांश जांचें वैश्विक विशेषज्ञों की सहायता से की जाती हैं, अक्सर इसमें उस देश से भी सहयोग लिया जाता है जहां वह उड़ान जा रही होती है। चूंकि इस मामले में विमान लंदन के गैटविक हवाई अड्‌डे पर उतरना था और उसमें सवार 50 से अधिक यात्री ब्रिटिश नागरिक थे इसलिए यूनाइटेड किंगडम की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी ने पहले ही चार लोगों को सहायता के लिए नियुक्त कर दिया है। दुर्घटनाग्रस्त विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग ने भी कुछ लोग भेजे हैं।

अभी तक की यह दूसरी ऐसी बड़ी हवाई दुर्घटना है, जिसकी जांच एएआईबी कर रही है। इससे पता चलता है कि विमानन उद्योग के बेहद तेज विस्तार के बावजूद भारत में उड़ान कितनी अधिक सुरक्षित हैं। 1970 और 1980 के दशक में कई विमान देश में हादसों के शिकार हुए और भारतीय विमानन उद्योग आतंकी हमलों समेत तमाम चुनौतियों से जूझता रहा। 21वीं सदी में निजी विमानन कंपनियों का विस्तार हुआ और यात्रियों की संख्या में भी काफी वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही बड़ी विमान दुर्घटनाओं तथा मौत के मामलों में काफी कमी आई है।

देश के विमानन क्षेत्र ने कड़ी मेहनत से अच्छी खासी प्रतिष्ठा अर्जित की है मगर वह तभी बरकरार रह पाएगी, जब इस दुर्घटना की जांच सहज और विश्वसनीय तरीके से हो और विमानन कंपनियों तथा प्राधिकारियों की सिफारिशों को स्वीकार तेजी से उनका क्रियान्वयन किया जाए।

यह बात भी ध्यान देने लायक है एयर इंडिया कई मोर्चों पर मुश्किलों से जूझती रही मगर 1982 में मुंबई में लैंडिंग के वक्त दुर्घटनाग्रस्त होने के अलावा उसके विमान (आतंकी वारदात को छोड़कर) किसी बड़ी दुर्घटना के शिकार नहीं हुए । यह रिकॉर्ड दुनिया की कई बड़ी विमानन कंपनियों के जैसा ही है। परंतु इसकी किफायती सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस का प्रदर्शन अपेक्षाकृत खराब रहा है।

इस बीच देश में निजी विमानन के 30 सालों में किसी बड़ी निजी विमान सेवा को बड़ी दुर्घटना नहीं झेलनी पड़ी है। ये सवाल पूछे जाने चाहिए और पूछे जाएंगे कि एयर इंडिया की सेवाओं का आंतरिक पुनर्गठन होने और उसका निजीकरण होने के बाद सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है या नहीं। इन सवालों के जवाब शायद जांच से निकलें और इसमें पूरा सहयोग करना कंपनी के हित में होगा।

अन्य देशों की कुछ घटनाओं मसलन 2016 में इजिप्टएयर की उड़ान 804 जैसे मामलों में जांच में विलंब हुआ, विवाद हुए और राजनीतिक प्रतिबंध देखे गए। भारत में इस जांच में ऐसी दिक्कत नहीं आनी चाहिए। सरकार ने 2030 तक देश के भीतर हवाई यातायात दोगुना करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस दौरान 50 और हवाई अड्डे तैयार करने हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरक्षा प्रक्रियाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ऐसे में एएआईबी के काम पर बारीक नजर रखनी होगी और उसे भी जितनी जल्दी संभव हो सके एक व्यापक और सटीक रिपोर्ट तैयार करनी होगी।

 

Advertisement
First Published - June 15, 2025 | 10:57 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement