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उपभोक्ता धारणाएं उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं

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Last Updated- April 13, 2023 | 7:21 PM IST
Ambani, Adani, Tata, Amazon all eyeing consumer market, competition growing fast: HUL chief
BS

मार्च 2023 में उपभोक्ता धारणाओं में मामूली तौर पर 1.2 प्रतिशत का सुधार हुआ। यह जनवरी और फरवरी में दर्ज की गई क्रमशः 4 और 5 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में कम वृद्धि थी। हालांकि यह वृद्धि भी थोड़ी मुश्किल ही लग रही है। समग्र धारणाओं में दिखी वृद्धि वास्तव में बहुस्तरीय सुधारों को नहीं दर्शाती है।

यह शहरी क्षेत्रों में दिख रहे उत्साह और देश के ग्रामीण क्षेत्रों में दिख रही उदासीनता का मिला-जुला रूप है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि लोगों की उम्मीदों और मौजूदा आमदनी में सुधार हुआ है लेकिन इसका असर उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं पर खर्च करने के इरादे पर नहीं पड़ा है।

अर्थव्यवस्था में होने वाले बदलाव का प्रासंगिक संकेतक यह है कि अधिक परिवार उन वस्तुओं और सेवाओं पर अधिक खर्च करने के लिए उत्साहित महसूस करते हैं जिस पर काफी सोच-समझ कर खर्च किया जाता है। बदलाव के ये संकेत अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।

मार्च 2023 के दौरान, 24 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि यह एक साल पहले की तुलना में उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं पर खर्च करने का बेहतर समय है। यह, एक साल पहले मार्च 2022 की तुलना में एक बड़ा सुधार है जब केवल 10.5 प्रतिशत परिवारों ने कहा था कि इस तरह के मदों पर खर्च करने का यह बेहतर समय है। लेकिन, 31 प्रतिशत परिवारों का मानना था कि एक साल पहले की तुलना में टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं पर खर्च करने का यह एक खराब समय है।

इस तरह, शुद्ध आधार पर, 7 प्रतिशत परिवार अब भी मानते हैं कि टिकाऊ वस्तुओं पर खर्च करने के लिए यह बेहतर समय नहीं है। गैर-जरूरी वस्तुओं की खरीदारी पर खर्च करने के लिए परिवारों का झुकाव काफी नकारात्मक और निराशाजनक है, हालांकि वे सभी संकेतक जो सकारात्मक नतीजे दे सकते हैं वे सही दिशा में हैं। अन्य संकेतकों में घरेलू आमदनी और भविष्य की आमदनी की अपेक्षाएं, और लघु तथा मध्यम अवधि में कारोबार और आर्थिक माहौल से जुड़ी अपेक्षाएं शामिल हैं।

अप्रैल 2020 में कोविड-19 के झटके के बाद पहली बार, परिवारों ने कहा कि उनकी आमदनी एक साल पहले की तुलना में अधिक थी। फरवरी और मार्च 2023 में करीब 25-26 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उनकी आमदनी एक साल पहले के स्तर से अधिक थी और केवल 21-23 प्रतिशत ने कहा कि उनकी आमदनी कम थी। इस प्रकार, शुद्ध आधार पर 3 प्रतिशत से अधिक परिवारों ने कहा कि उनकी आमदनी, एक साल पहले की तुलना में अधिक थी।

एक साल बाद घरेलू आमदनी की उम्मीदें अप्रैल 2020 के बाद पहली बार मार्च 2023 में सकारात्मक हो गईं। करीब 25 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि एक साल बाद उनकी आय अधिक होगी और केवल 21 प्रतिशत को खराब आमदनी की आशंका थी।

24 प्रतिशत परिवारों के अनुसार, अगले 12 महीने में वित्तीय और कारोबारी स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है, जबकि 22 प्रतिशत को आशंका है कि स्थिति खराब होगी। शुद्ध आधार पर, करीब 2 प्रतिशत परिवारों को सुधार की उम्मीद है। फरवरी 2023 में परिवारों का रुझान इस मोर्चे पर सकारात्मक हो गया।

परिवारों में फरवरी के साथ-साथ पांच साल की अवधि के लिए भी सकारात्मक धारणा बनी और यह रुझान मार्च में भी बना रहा। सकारात्मकता का प्रतिशत 0.4-0.5 के स्तर पर कम था लेकिन अब भी अप्रैल 2020 के बाद पहली बार शुद्ध-सकारात्मक स्थिति बनी है।

अगर कोई परिवार कहता है कि शुद्ध आधार पर उनकी आमदनी में सुधार हुआ है और वे यह भी मानते हैं कि आने वाले वर्ष में उनकी आमदनी में सुधार के साथ ही व्यापार और आर्थिक स्थितियों में सुधार की उम्मीद है, तब परिवारों के लिहाज से इसे गैर-जरूरी वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च करने का एक अच्छा समय मानने के लिए परिस्थितियां भी अनुकूल हैं।

हालांकि, परिवार इस मामले में ज्यादा खुलकर बात नहीं करते हैं। पहले भी कहा गया था कि 7 प्रतिशत परिवारों को नहीं लगता है कि यह उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं को खरीदने का अच्छा समय है।

मार्च में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गैर-जरूरी वस्तुओं पर खर्च करने में हिचक ज्यादा स्पष्ट लग रही थी क्योंकि 8 प्रतिशत परिवारों को भरोसा नहीं था कि यह इस तरह के खर्च के लिए अच्छा समय नहीं है।

देश के शहरी क्षेत्रों में भी 4 प्रतिशत परिवार इसको लेकर काफी चौकन्ने थे। जनवरी-मार्च 2023 तिमाही के दौरान देश के शहरी इलाकों में उपभोक्ता धारणाओं में काफी सुधार हुआ है। देश के शहरी क्षेत्र में उपभोक्ता धारणा सूचकांक जनवरी में 3.6 प्रतिशत बढ़ा, फिर फरवरी में 6.4 प्रतिशत और मार्च में 4.1 प्रतिशत बढ़ा। इसके विपरीत मार्च में 0.2 फीसदी की गिरावट से पहले, ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ा सूचकांक जनवरी में 4.5 प्रतिशत बढ़ा और फिर फरवरी में 5.2 प्रतिशत बढ़ा।

शहरी परिवारों ने सभी मोर्चे पर ग्रामीण इलाकों की तुलना में बेहतर नतीजे दिए चाहे वह एक साल पहले की तुलना में आमदनी हो, अगले वर्ष के लिए अपेक्षित आय, एक वर्ष से लेकर पांच साल की अवधि के दौरान कारोबार और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ी उम्मीदें हों।

शहरी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों का प्रदर्शन उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं को खरीदने के इरादे के लिहाज से ग्रामीण परिवारों की तुलना में बेहतर है। फिर भी, यह शहरी परिवारों को उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं पर खर्च करने के लिए सकारात्मक रूप से प्रेरित करने के लिए पर्याप्त नहीं था।

हालांकि इस पर गौर करना भी जरूरी है कि मौसम की प्रतिकूल स्थिति और गर्मी के सीजन में अलनीनो प्रभाव की संभावनाओं के कारण ग्रामीण धारणाएं कमजोर हैं। रिपोर्ट से पता चलता है कि रबी की फसल प्रभावित नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्टों की तुलना में कमजोर धारणाओं से भी दबाव के संकेत मिल रहे हैं। आमदनी और अपेक्षाओं में अधिक निरंतर सुधार से परिवार, गैर-जरूरी वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

(लेखक सीएमआईई प्रा. लि. के एमडी और सीईओ हैं)

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First Published - April 13, 2023 | 7:21 PM IST

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