केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को अब यह निर्देश देने पर विचार कर रही है कि वह सेल्फ-एम्प्लॉयड और गिग-प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए नई भविष्य निधि (PF) और पेंशन स्कीम तैयार करे। यह जानकारी न्यूज वेबसाइट द टेलीग्राफ के हवाले से दी गई है।
यह कदम सोशल सिक्योरिटी कोड लागू होने के बाद उठाया जा रहा है, जिसके तहत अब केंद्र सरकार को पारंपरिक सैलरी वाले कर्मचारियों के अलावा भी सामाजिक सुरक्षा देने का अधिकार मिल गया है।
श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी ने न्यूज वेबसाइट द टेलीग्राफ को बताया कि सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है, पर ‘दोगुनी करना लगभग मुश्किल है’।
पिछले हफ्ते श्रम मंत्रालय ने चारों नए लेबर कोड नोटिफाई किए थे, जिनमें सोशल सिक्योरिटी कोड भी शामिल है। इस कोड के सेक्शन 15(1)(d) में केंद्र को अधिकार दिया गया है कि वह सेल्फ-एम्प्लॉयड वर्कर्स या किसी भी दूसरे वर्ग के लोगों के लिए अलग से सामाजिक सुरक्षा स्कीम बना सकता है।
इससे पहली बार सेल्फ-एम्प्लॉयड और गिग वर्कर्स को भी औपचारिक रूप से PF-पेंशन के दायरे में लाना संभव हो गया है।
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सरकारी सूत्रों ने न्यूज वेबसाइट द टेलीग्राफ को बताया कि अब EPFO से कहा जाएगा कि वह सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों के लिए लचीली PF और पेंशन स्कीम बनाए।
एक सरकारी सूत्र के हवाले से खबर में कहा गया: “सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों की कमाई फिक्स नहीं होती, इसलिए वे हर महीने नियमित पैसा नहीं डाल पाएंगे। स्कीम ऐसी होगी कि वे जब मन करे, जब पैसा डाल सकें। जितना पैसा जमा होगा और उस पर जितना ब्याज आएगा, उसी हिसाब से उनकी पेंशन या PF तय होगी।”
सूत्र ने कहा कि यह स्कीम मौजूदा पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) से बेहतर रिटर्न और ज्यादा लचीलापन देगी।
सोशल सिक्योरिटी कोड में गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जैसे डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर) के लिए अलग से व्यवस्था की गई है।
धारा 114(4) के तहत स्विगी-जोमैटो, ओला-ऊबर जैसी कंपनियों को अपना सालाना टर्नओवर का 1-2 प्रतिशत एक नए वेलफेयर फंड में डालना होगा। इसी फंड से इन वर्कर्स को PF, पेंशन और इंश्योरेंस मिलेगा। इस स्कीम का डिजाइन भी EPFO तैयार करेगा।
ट्रेड यूनियन्स चाहती हैं कि कंपनियां अपना सही-सही टर्नओवर बताएं, ताकि फंड में पूरा पैसा आए।
सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 में पुराने 9 कानूनों को मिलाकर एक ही फ्रेमवर्क बना दिया गया है। इसका मकसद है नियमों को आसान करना और काम काज में तेजी लानाा। साथ ही सरकार ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ये सुविधाएं पहुंचाना चाहती हैं:
यानी अब धीरे-धीरे देश में हर तरह के काम करने वाले को सामाजिक सुरक्षा कवर मिलने की राह खुल गई है।