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बुधवार को घरेलू दर निर्धारण समिति ने नीतिगत दर 25 आधार अंक तक घटाकर 6 फीसदी कर दी।

Last Updated- April 09, 2025 | 11:40 PM IST
RBI Governor Sanjay Malhotra

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय बैंक का लक्ष्य नीतिगत रीपो दर में 50 आधार अंक (बीपीएस) की कटौती को जल्द लागू करना है लेकिन बैंकरों का कहना है कि प्रणाली में जमा राशि की तंगी उन्हें जमा दरों को तत्काल कम करने से रोक सकती है। इस वजह से उधारी दरें, खासतौर पर सीमांत लागत आधारित ऋण दरों (एमसीएलआर) में तत्काल कमी आने की संभावना नहीं है। हालांकि, बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी ऋण दरों में जल्द बदलाव देखने को मिलेगा।

मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हम चाहेंगे कि बदलाव जल्द से जल्द हो। लेकिन यह नुकसानदायक नहीं होना चाहिए। इसलिए, यह हम कैसे करेंगे, इस पर विचार किया जाएगा और उसके बाद निर्णय लिया जाएगा।’ बुधवार को घरेलू दर निर्धारण समिति ने नीतिगत दर 25 आधार अंक तक घटाकर 6 फीसदी कर दी। फरवरी में भी उसने रीपो दर में इतनी ही कटौती की थी।

एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2025 में आरबीआई के रीपो दर 25 आधार अंक घटाने के बाद सरकारी बैंकों ने जमा दरों में 6 आधार अंक की कटौती की है और विदेशी बैंकों ने दरें 15 आधार अंक घटाई हैं। निजी बैंकों ने जमा दरें 2 आधार अंक तक बढ़ाई हैं। एक सरकारी बैंक में वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘तुरंत दरें कम करना काफी कठिन है क्योंकि दरें काफी ऊंची हैं। साथ ही, बैंकों में ज्यादा जमाएं जुटाने के लिए प्रतिस्पर्धा भी है। इसलिए जमा दरें घटाने से ज्यादा मदद नहीं मिलेगी।’

इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी बिनोद कुमार ने कहा, ‘रीपो दर से सीधे जुड़े ऋणों पर तुरंत असर दिखेगा। लेकिन देनदारी की बात करें तो पिछली दर कटौती के बाद भी जमा दरें ऊंची बनी हुई हैं। इसलिए, हम जमाओं में तुरंत कटौती नहीं करेंगे।’

विशेषज्ञों ने शुरू में दरों में कमी में विलंब के लिए मुख्य मसले के रूप में तरलता को बताया था। जनवरी 2025 में सिस्टम में लिक्विडिटी की कमी थी। लिक्विडिटी एडजस्टमेंट सुविधा (एलएएफ) के तहत डाली जाने वाली शुद्ध नकदी 23 जनवरी को 3.1 लाख करोड़ रुपये की ऊंचाई पर पहुंच गई थी। हालांकि आरबीआई (जिसने 6.9 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में डाले) के कई कदमों के बाद फरवरी-मार्च 2025 के दौरान तरलता की कमी दूर होने लगी और 29 मार्च तक यह अधिशेष में बदल गई। मार्च के उत्तरार्ध में सरकारी खर्च में भी वृद्धि होने से सिस्टम की तरलता में सुधार जारी रहा और यह 7 अप्रैल तक 1.5 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष तक पहुंच गई।

फेडरल बैंक के कार्यकारी निदेशक हर्ष दुगड़ ने कहा, ‘मौजूदा बाह्य बेंचमार्क से जुड़े ऋणों पर तत्काल प्रभाव पड़ेगा (तीन महीने के भीतर) लेकिन नए ऋणों पर असर जमा की लागत पर निर्भर करेगा। इसी तरह, एमसीएलआर से जुड़े ऋणों पर दर कटौती धीमी हो सकती है क्योंकि यह जमा दरों की लागत पर निर्भर करती है।’

अधिशेष तरलता और आरबीआई के पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराने के आश्वासन के बावजूद बैंकरों का मानना है कि बैंकिंग प्रणाली के अंदर संरचनात्मक मसलों, खास तौर पर जमा प्रोफाइल में बदलाव, के कारण उधार और जमा दरों का ट्रांसमिशन इतना आसान भी नहीं हो सकता है।

घरेलू बचत तेजी से जमाओं की बजाय इक्विटी, बीमा और पेंशन फंड जैसी परिसंपत्तियों की ओर जा रही है जिससे बैंकिंग प्रणाली की जमा संरचना -कासा (चालू और बचत खाते) और खुदरा सावधि जमा से लेकर थोक जमा राशि में बदलाव आया है। इस बदलाव के कारण बैंकों के लिए जमा दरों को कम करना मुश्किल हो रहा है जो एमसीएलआर में कटौती पर विचार करने के लिहाज से महत्वपूर्ण कारक है।

आरबीआई का ब्याज दरों में कटौती करना और रुख को बदलकर उदार बनाना त्वरित और समय पर उठाया गया कदम है। बाजार के लिए पैदा हो रही वैश्विक अनिश्चितताओं के खिलाफ अनुकूल बने रहने का अग्रिम उपाय है। रुख में बदलाव से घरेलू अर्थव्यवस्था पर टैरिफ के अतिरिक्त प्रभाव को कम किया जा सकेगा। मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहने से वित्त वर्ष 2026 में विकास से जुड़ी अनिवार्यताओं पर जोर रहेगा।
सी एस शेट्टी, चेयरमैन, भारतीय स्टेट बैंक

नीति में अनिश्चितता वाले वैश्विक परिवेश में अर्थव्यवस्था की जरूरत को ध्यान में रखा गया है। जीडीपी में मामूली गिरावट के अनुमान और मुद्रास्फीति दबाव के नरम पड़ने को देखते हुए दर कटौती से वृद्धि संबंधित चिंताएं दूर करने, इक्विटी और डेट बाजारों, वित्तीय और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों की सेहत सुधारने में मदद मिलनी चाहिए और अमेरिकी टैरिफ वृद्धि से जुड़ी आशंकाओं से जूझ रही अर्थव्यवस्था के लिए आशाजनक राह तैयार होगी।
के बालासुब्रमण्यन, मुख्य कार्य अधिकारी, सिटी इंडिया

रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती के साथ साथ तरलता बढ़ाने के ताजा उपायों से वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी। मुद्रास्फीति में गिरावट ने भी आरबीआई को अपने मौद्रिक नीतिगत रुख को नरम बनाने में मदद की।
पी डी सिंह, मुख्य कार्य अधिकारी, (भारत, द. एशिया), स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक

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First Published - April 9, 2025 | 11:40 PM IST

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