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रेपो रेट घटने से FD निवेशकों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, एक्सपर्ट बता रहे हैं बचाव के स्मार्ट तरीके

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RBI ने पांच साल बाद रेपो रेट घटाकर 6.25% किया, जिससे लोन सस्ते होने की उम्मीद है, लेकिन FD निवेशकों के लिए चिंता बढ़ गई।

Last Updated- February 14, 2025 | 6:37 PM IST
BOI FD Rates

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पांच साल बाद पहली बार रेपो रेट घटा दिया है। अब रेपो रेट 6.25% हो गया है, यानी बैंकों को कर्ज सस्ता मिलेगा। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI कम हो सकती है, लेकिन फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों के लिए बुरी खबर है। ब्याज दरें कम होने का मतलब है कि FD से कम रिटर्न मिलेगा, जिससे खासकर सीनियर सिटिजंस की कमाई पर असर पड़ सकता है।

FD में पैसा लगाने वालों के लिए क्या करें, क्या न करें?

अगर आप FD में पैसा लगाना चाहते हैं या पहले से निवेश कर चुके हैं, तो अब आपको थोड़ा चतुराई से प्लानिंग करनी होगी।

बैंकबाजार के CEO आदिल शेट्टी ने कुछ टिप्स दिए हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं।

अब ही FD करवा लें

अगर आप नई FD खोलने का प्लान बना रहे हैं, तो देर मत करें। अभी की ऊंची ब्याज दरें बाद में घट सकती हैं, इसलिए जितनी जल्दी हो सके, मौजूदा दर पर लॉक कर लें।

FD के अलावा और ऑप्शन भी देखें

अगर ब्याज दरें गिरती रहीं, तो आप डेट म्यूचुअल फंड, कॉरपोरेट बॉन्ड, या इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) जैसे विकल्पों में पैसा लगा सकते हैं। हालांकि, इसमें जोखिम होता है, इसलिए सोच-समझकर फैसला लें।

FD लैडरिंग अपनाएं

सीधी बात— सारा पैसा एक ही FD में मत लगाइए! इसे अलग-अलग समय की FD में बांटिए। इससे हर कुछ महीनों में एक FD मैच्योर होगी और आपको ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव का असर कम महसूस होगा।

पुरानी FD की समीक्षा करें

अगर आपकी पुरानी FD जल्दी तुड़वाने की सुविधा देती है, तो चेक करें कि क्या उस पर पेनल्टी कम है। हो सकता है कि इसे किसी और निवेश में डालकर आप ज्यादा रिटर्न कमा सकें।

FD लैडरिंग से क्या फायदा?

FD लैडरिंग यानी एक ही रकम को अलग-अलग FD में लगाना। इससे आपकी नकदी (liquidity) बनी रहती है और ब्याज दरें गिरने का असर भी कम होता है।

उदाहरण के लिए, अगर आपके पास 20 लाख रुपये हैं, तो इसे एक बार में लंबी अवधि की FD में लगाने के बजाय, इसे चार हिस्सों में बांट दें— 5 लाख की FD 1 साल, 1.5 साल, 2 साल और 2.5 साल के लिए बनाएं। इससे हर कुछ महीनों में एक FD मैच्योर होगी, और आपको जरूरत पड़ने पर पैसा भी मिलता रहेगा।

इनक्रेड मनी के CEO विजय कुप्पा के मुताबिक, यह रणनीति DICGC बीमा सुरक्षा के तहत भी आती है, जिससे प्रति बैंक 5 लाख रुपये तक की जमा सुरक्षित रहती है। इसके अलावा, ब्याज की इनकम अगर अलग-अलग FD में बंटी हो, तो कई निवेशक TDS छूट सीमा (50,000 रुपये) के अंदर रह सकते हैं।

मध्य वर्ग को टैक्स में राहत, निवेश का बढ़िया मौका

वहीं, केंद्रीय बजट 2025 में सरकार ने मिडिल क्लास को बड़ी राहत दी है। अब 12 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम नए टैक्स सिस्टम में पूरी तरह से कर-मुक्त होगी। यानी लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा, जिससे वे निवेश और बचत को बेहतर प्लान कर सकते हैं।

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First Published - February 14, 2025 | 6:33 PM IST

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