डिजिटल इंडिया के इस दौर में क्रेडिट और डेबिट कार्ड हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुके हैं। शॉपिंग हो, खाना ऑर्डर करना हो या बिल भरना, एक टैप में सब काम हो जाता है। लेकिन इसी आसान दुनिया में एक छिपा खतरा भी है, जिसे हम अक्सर तब तक नजरअंदाज कर देते हैं जब तक जेब हल्की न हो जाए।
हैकर्स और साइबर ठग उसी मौके का इंतजार करते हैं जब हम एक छोटी सी गलती कर दें, और फिर मिनटों में कार्ड से पैसा साफ। हर साल हजारों लोग ऐसे फ्रॉड का शिकार बनते हैं, और कई बार तो लोगों को पता भी नहीं चलता कि कब, कहां और कैसे पैसा गायब हो गया। यही वजह है कि बैंक, RBI और कोर्ट लगातार नियम सख्त कर रहे हैं, ताकि लोगों को उसका हक मिल सके और ठगों की चालें बेअसर हों।
बीते नवंबर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक केस में बैंक को फ्रॉड के 76,777 रुपये रिफंड करने का आदेश दिया था, क्योंकि बैंक ने सही तरीके से शिकायत नहीं सुनी। कोर्ट ने ये भी कहा कि रिकवरी एजेंट्स का हरासमेंट बर्दाश्त नहीं होगा।
फ्रॉड से बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप अलर्ट रहें। समय समय पर अपना स्टेटमेंट चेक करते रहें। हर महीने जब कार्ड का बिल आता है, तो उसमें अनजान ट्रांजेक्शन ढूंढें, जैसे कोई अजनबी जगह से शॉपिंग या गलत कैश विदड्रॉल। अगर अमाउंट छोटा भी हो, जैसे 500 रुपये का, तो भी उसे नजरअंदाज न करें। कई बार ठग छोटे-छोटे अमाउंट से शुरुआत करते हैं।
दूसरा, अगर आपका कार्ड खो गया हो या फोन पर किसी के द्वारा बिना वजह OTP मांगा जाए , तो तुरंत शक करें। RBI के 2017 के सर्कुलर के मुताबिक, अगर आप फ्रॉड की भनक लग जाए तो 3 दिन के अंदर रिपोर्ट करें, वरना मुश्किल बढ़ सकती है। आजकल बैंक ऐप्स में रीयल-टाइम अलर्ट आते हैं, तो नोटिफिकेशन ऑन रखें।
एक हालिया सर्वे में पता चला कि 70% फ्रॉड मोबाइल ऐप्स या फिशिंग लिंक्स से होते हैं। इसलिए किसी से पासवर्ड शेयर न करें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल जरूर करें। अगर फ्रॉड हो गया, तो घबराएं नहीं, बल्कि उसे सही से रिपोर्ट करें।
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फ्रॉड पकड़ में आ गया? अब कुछ जरूरी कदम सबसे पहले उठाएं।
हर बैंक की वेबसाइट पर ईमेल ID मिल जाएगी।
अगर आपने बैंक को सूचना दे दी है तो उसके बाद सबसे पहले FIR दर्ज करवाएं।
ये स्टेप जरूरी है क्योंकि बिना FIR के बैंक इंवेस्टिगेशन नहीं करता। FIR दर्ज करने के बाद आपका केस और मजबूत हो जाता है। RBI के नियमों के तहत, बैंक को 10 डेज में प्रोविजनल क्रेडिट देना पड़ता है अगर लायबिलिटी जीरो है।
मतलब, अगर आपने 3 दिन में रिपोर्ट किया, तो जांच के बाद पैसे अकाउंट में आने की संभावना ज्यादा है। लेकिन 4 से 7 दिन में रिपोर्ट करने पर 5,000 से 25,000 तक का नुकसान आपका हो सकता है, जो कार्ड पर निर्भर करता है।
अगर बैंक 30 दिन में आपकी समस्या का सामाधान नहीं कर रहा है तो आप RBI के ‘इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम’ का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसी CRN को ‘Track Complaint’ सेक्शन में डालकर आप कभी भी अपनी शिकायत की स्थिति (Under Process / Assigned / Resolved) रियल-टाइम में देख सकते हैं।