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पोर्टफोलियो में संतुलन जरूरी, न तो सारे शेयर बेचें न जरूरत से ज्यादा खरीदें

मिडकैप और स्मॉलकैप श्रेणी से मुनाफा कमाएं और उससे मिली रकम सोने और तयशुदा आय वाले विकल्पों में लगाएं

Last Updated- December 31, 2023 | 7:22 PM IST
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भारतीय शेयर बाजार दौड़ रहे हैं, सेंसेक्स पिछले हफ्ते पहली बार 72,000 का आंकड़ा लांघ गया। बाजार के जानकार कह रहे हैं कि यह तेजी अभी बनी रहेगी। ट्रस्ट म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी मिहिर वोरा कहते हैं, ‘दुनिया भर में ब्याज दरों में नरमी, वैश्विक वृद्धि दर में सुस्ती और देसी वृद्धि दर बरकरार रहने के कारण भारत के लिए एकदम सही स्थिति पैदा हो गई है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अचानक और तेज गिरावट नहीं आई तो अगली कुछ तिमाहियों में भारत के बाजार 5 से 10 फीसदी चढ़ सकते हैं।’

मगर चढ़ते बाजार निवेशकों को ऊहापोह में डाल देते हैं कि शेयर खरीदते रहें, थोड़े शेयर बेचें या पूरे बेचकर बाजार से बाहर हो जाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेशक को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए और अपने मूल संपत्ति आवंटन पर टिके रहना चाहिए।

बाजार में जोश देखकर आपको लग सकता है कि अभी शेयर नहीं खरीदे तो मौका चूक जाएंगे। मगर यह सोचकर शेयर या इक्विटी म्युचुअल फंडों में जरूरत से ज्यादा निवेश न कर डालें। जर्मिनेट इन्वेस्टर सर्विसेज ऐंड रीफोलियो इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य कार्य अधिकारी (सीईओ) और संस्थापक संतोष जोसेफ की सलाह है, ‘बाजार चढ़ता है तो कई लोग कुछ भी खरीद लेते हैं। मगर भावनाओं में बहने के बजाय मूल्यांकन और बुनियादी कारकों पर ध्यान देना चाहिए।’

कुछ निवेशक सारे शेयर बेचकर बाजार से निकलने की भी सोच सकते हैं। ऐसा किया तो बाजार दोबारा चढ़ने पर आप फायदा नहीं ले पाएंगे। जेएम फाइनैंशियल एसेट मैनेजमेंट के वरिष्ठ फंड मैनेजर-इक्विटी असित भंडारकर कहते हैं, ‘लंबे समय के लिए निवेश कर संपत्ति तैयार करनी है तो इक्विटी में रकम जरूर लगानी चाहिए।’

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स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों ने हाल में तगड़ा रिटर्न दिया है मगर उनमें बहुत ज्यादा निवेश से बचना चाहिए। वोरा कहते हैं, ‘मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों का मूल्यांकन काफी अधिक हो चुका है और गिरावट से बचने की गुंजाइश बहुत कम रह गई है। ज्यादा रिटर्न के फेर में अपने पोर्टफोलियो में कुछ खास शेयर भर लेना बहुत बड़ा जोखिम है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।’

लार्ज-कैप शेयरों और म्युचुअल फंड में अधिक निवेश करें। भंडारकर की सलाह है, ‘हमारे हिसाब से लार्ज-कैप शेयरों में स्थिरता, मजबूती और उचित मूल्यांकन देखते हुए हमें उनमें निवेश बेहतर लगता है।’

बाजार चढ़ने पर कई निवेशक चवन्नी शेयर खरीद लेते हैं। इसमें बहुत जोखिम है। वोरा का कहना है, ‘शेयरों में कम तेजी आने के कारण मिड-कैप बेचकर स्मॉल-कैप खरीदना और स्मॉल-कैप बेचकर माइक्रो-कैप खरीदना भूल हो सकती है। अभी कई शेयर आम निवेशकों की लिवाली के लिए बहुत कम संख्या में उपलब्ध हैं मगर उनमें तेजी बहुत अधिक है। इसलिए फौरन खरीदने और बेचने से बचिए।’

अपने पोर्टफोलियो में परिसंपत्ति आवंटन पर करीबी नजर रखें। अगर संपत्ति आवंटन नहीं किया है तो अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता के मुताबिक आवंटन कीजिए। जोसेफ कहते हैं, ‘संपत्ति आवंटन जरूरी होता है क्योंकि इससे स्थिर पोर्टफोलियो तैयार होता है और किसी एक संपत्ति या निवेश साधन में जरूरत से ज्यादा निवेश का जोखिम नहीं रहता।’

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अगर शेयरों में आपका निवेश कम है तो इक्विटी और इक्विटी म्युचुअल फंडों में चरणबद्ध तरीके (एसआईपी के जरिये) से रकम लगाएं। शेयरों में ज्यादा निवेश हो गया है तो उसे भी दुरुस्त करें। सैंक्टम वेल्थ के निवेश योजना प्रमुख आलेख यादव कहते हैं, ‘बाजार में काफी तेजी रहे तो पोर्टफोलियो में शेयरों का हिस्सा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए रकम दूसरी संपत्ति श्रेणियों में लगाकर अपने पोर्टफोलियो को नए सिरे से संतुलित करने का यह एकदम सही समय है।’

पोर्टफोलियो बनाते समय विविधता का पूरा ध्यान रखें। यादव का सुझाव है, ‘निवेशकों को विभिन्न संपत्ति श्रेणियों, क्षेत्रों और योजनाओं में निवेश कर पोर्टफोलियो में विविधता जरूर लानी चाहिए। आवंटन तय करते समय उन्हें देखना चाहिए कि जोखिम कितना सह सकते हैं, रिटर्न कितना चाहते हैं, निवेश कितने समय के लिए कर रहे हैं और तरलता कितनी चाहिए।’

बाजार की इस समय की तेजी डेट श्रेणी में ज्यादा निवेश की गुंजाइश नहीं दे रही। वोरा समझाते हैं, ‘शेयरों का मूल्यांकन बढ़ने और स्थिर आय की दरें भी अधिक होने के कारण स्थिर आय की योजनाओं में निवेश ज्यादा आकर्षक है। ऐसे में आप तयशुदा आय वाले निवेश विकल्पों में रकम बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं।’

First Published - December 31, 2023 | 7:22 PM IST

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