facebookmetapixel
Gold Jewellery Sales: कीमतों में तेजी के बावजूद सोने की चमक बरकरार, दिसंबर में ज्वेलरी बिक्री 12% बढ़ीSBI MF ने उतारा क्वालिटी फंड, ₹5,000 से निवेश शुरू; किसे लगाना चाहिए पैसा?मर्सिडीज, BMW, ऑडी जैसी प्रीमियम कारें होंगी सस्ती! India-EU FTA का घरेलू ऑटो सेक्टर पर कैसे होगा असर₹2 लाख से ₹12 लाख तक: 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इनकम टैक्स में अब तक क्या बदला?Budget 2026: क्या म्युचुअल फंड पर घटेगा टैक्स?Budget 2026 की इनसाइड स्टोरी: वित्त मंत्री की टीम में शामिल ये 7 ब्यूरोक्रेट्स बनाते हैं ‘ब्लूप्रिंट’Edelweiss MF ने उतारा नया फंड, ₹100 की SIP से फाइनेंशियल कंपनियों में निवेश का मौकाRealty Stock में बन सकता है 65% मुनाफा! Q3 नतीजों के बाद ब्रोकरेज सुपर बुलिश; कर्ज फ्री हुई कंपनीIndia-EU FTA: ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ में भारत के 93% से ज्यादा सामानों को 27 यूरोपीय देशों में ड्यूटी-फ्री एंट्रीBank Stock पर 3 ब्रोकरेज ने ₹1,500 का दिया टारगेट, शेयर 4% चढ़ा; खरीदें या मुनाफा काटें?

बाजार में आया उतार-चढ़ाव तो निवेशकों ने बढ़ाया एकमुश्त दांव

म्युचुअल फंडों की इक्विटी योजनाओं में एकमुश्त निवेश फरवरी में दो साल की ऊंचाई पर पहुंच गया

Last Updated- March 26, 2024 | 10:48 PM IST
New MF Rules: From NFO investment to stress testing, SEBI changed the rules related to mutual funds, investors will get big benefit! NFO निवेश से लेकर स्ट्रेस टेस्टिंग तक, SEBI ने बदले म्युचुअल फंड से जुड़े नियम, निवेशकों को होगा बड़ा फायदा!

इक्विटी म्युचुअल फंड योजनाओं ने पिछले छह महीने (फरवरी 2024 तक) में एकमुश्त निवेश के तौर पर 46,200 करोड़ रुपये हासिल किए हैं जो इससे पिछले छह महीने में मिले निवेश का करीब तीन गुना है। फरवरी में निवेशकों ने एकमुश्त निवेश के जरिये म्युचुअल फंडों में 11,500 करोड़ रुपये लगाए जो मार्च 2022 के बाद का सर्वोच्च आंकड़ा है। उद्योग निकाय एम्फी के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

म्युचुअल फंडों के अधिकारियों ने कहा कि निवेशक इक्विटी में अतिरिक्त रकम के निवेश के लिए बाजार के उतार-चढ़ाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। मिरे ऐसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) के मुख्य निवेश अधिकारी नीलेश सुराणा ने कहा कि एकमुश्त निवेश आमतौर पर विवेक पर निर्भर करते हैं और निवेशक अक्सर अस्थिर बाजार के दौरान ऐसी रकम लगाना पसंद करते हैं। यह तरीका तार्किक और एसआईपी से अलग है।

ऐक्सिस फंड के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी बी. गोपकुमार ने कहा कि इसकी वजह का पता लगाना मुश्किल है क्योंकि निवेशकों के विविध आधार को देखते हुए यह विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है। हालांकि आम तौर पर देखा गया है कि जब-जब बाजार में गिरावट आती है तो एकमुश्त निवेश में तेजी आ जाती है।

हाल के महीनों में इक्विटी बाजार में उतारचढ़ाव रहा है और लार्जकैप इंडेक्स निफ्टी मजबूती के दौर में है। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में ज्यादा उतारचढ़ाव रहा क्योंकि नियामक ने मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों के बढ़ते भावों को लेकर चिंता जताई। 12 फरवरी को यह इंडेक्स 4 फीसदी से ज्यादा टूट गया। दो अन्य मौकों पर यह एक फीसदी से ज्यादा नीचे आया।

इसके साथ ही एसआईपी के जरिये शुद्ध निवेश अपेक्षाकृत सुस्त रहा। सितंबर 2023 से फरवरी 2024 के बीच शुद्ध एसआईपी निवेश 38,210 करोड़ रुपये रहा जो मार्च 2023 से अगस्त 2023 की अवधि के मुकाबले 22 फीसदी ज्यादा है।

माना जाता है कि एसआईपी निवेश का बाजार के हालात से कोई लेना देना नहीं होता है लेकिन एकमुश्त निवेश का बाजार के मौजूदा सेंटिमेंट से काफी जुड़ाव होता है। ज्यादातर एकमुश्त निवेश मौके के हिसाब से होते हैं। उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि ऐसा ज्यादातर निवेश अमीर निवेशकों की तरफ से आता है।

सुराणा ने कहा कि बाजार की टाइमिंग हमेशा सही तरीका नहीं होती लेकिन जब बाजार सही कीमत वाले दायरे में हो तब अगर रकम का निवेश किया जाए तो समझदारी बनती है और बाजार में गिरावट के साथ यह चरणबद्ध तरीके से भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्मॉलकैप में जरूरत से ज्यादा आवंटन करने वाले निवेशकों को अपना पोर्टफोलियो दोबारा संतुलित करने पर विचार करना चाहिए। हमारा मानना है कि लंबी अवधि के लिए आदर्श फंड अब या तो मल्टीकैप या लार्ज व मिडकैप श्रेणी में होना चाहिए।

एकमुश्त निवेश में बढ़ोतरी ने इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश फरवरी के दौरान 26,860 करोड़ रुपये पर पहुंचा दिया जो मार्च 2022 के बाद का सर्वोच्च आंकड़ा है। एकमुश्त निवेश के तौर पर मिले 11,500 करोड़ रुपये के अलावा बाकी रकम एसआईपी या एनएफओ के जरिए आई है। एसआईपी ने जहां 6,470 करोड़ रुपये का योगदान दिया वहीं एनएफओ के जरिये 11,470 करोड़ रुपये मिले।

First Published - March 26, 2024 | 10:48 PM IST

संबंधित पोस्ट