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Jane Street जैसे मामलों में NSE की भूमिका महज आंकड़े उपलब्ध कराने तक सीमित: आशिष कुमार चौहान

चौहान ने यह बात मुंबई में एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (एपीएमआई) के वार्षिक सम्मेलन के अवसर पर कही।

Last Updated- August 06, 2025 | 9:44 PM IST
NSE

एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमडी और सीईओ) आशिष कुमार चौहान ने बुधवार को कहा कि जेन स्ट्रीट जैसे मामलों में नियामक को आंकड़े उपलब्ध कराने के अलावा नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की कोई भूमिका नहीं है। चौहान ने यह बात मुंबई में एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (एपीएमआई) के वार्षिक सम्मेलन के अवसर पर कही।

चौहान ने निगरानी संबंधी संभावित चिंताओं के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में कहा, ‘एक्सचेंजों का अधिकार क्षेत्र एक्सचेंजों द्वारा विनियमित संस्थाओं यानी ब्रोकरों और कंपनियों पर होता है, निवेशकों पर नहीं। निवेशकों को एक्सचेंजों द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है। जेन स्ट्रीट निवेशकों का ही हिस्सा है। एक्सचेंजों, विशेष रूप से एनएसई, की कोई भूमिका नहीं है, सिवाय इसके कि वह नियामक के मांगने पर उसेडेटा उपलब्ध कराता है।’

इससे पहले अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट पर प्रतिबंध हटाते हुए बाजार नियामक ने एक्सचेंजों को समूह के लेनदेन और पोजीशनों पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई हेराफेरी न हो। जवाब में एक्सचेंजों ने पूर्ण अनुपालन के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई।

इक्विटी डेरिवेटिव बाजार में प्रस्तावित सुधारों पर सवालों का जवाब देते हुए चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि एक्सचेंज नियामकीय दायरे में काम करते हैं। चौहान ने कहा, ‘सेबी की जरूरत के आधार पर एक्सचेंजों को उसका पालन करना होगा। हमारे पास एक अग्रणी नियामक का काम भी है।’

एनएसई के बहुप्रतीक्षित आईपीओ के बारे में चौहान ने कहा कि एक्सचेंज बाजार नियामक से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलने के कुछ महीनों बाद अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल करेगा। उनका अनुमान है कि एनओसी मिलने के बाद से लेकर आईपीओ की मंजूरी हासिल करने तक की पूरी प्रक्रिया में लगभग 8 से 9 महीने लग सकते हैं।

First Published - August 6, 2025 | 9:39 PM IST

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