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AI के डर से भारतीय IT सेक्टर में दो दशक की सबसे बड़ी गिरावट, निवेशकों के ₹6.2 लाख करोड़ डूबे

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अगर फरवरी के बाकी तीन कारोबारी सत्रों में भी इस सूचकांक की सेहत नहीं सुधरती है तो यह अप्रैल 2003 के बाद से इसका सबसे खराब मासिक प्रदर्शन होगा

Last Updated- February 24, 2026 | 10:19 PM IST
Stock Market
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देसी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के शेयरों में दो दशक में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी जा रही है। एआई के कारण होने वाली भारी उथल-पुथल से निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। मंगलवार को आईटी इंडेक्स लगभग 5 प्रतिशत गिर गया। इस तरह इस महीने इसमें 21 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। निफ्टी आईटी सूचकांक 30,054 पर बंद हुआ था, जो 3 अगस्त, 2023 के बाद से सबसे निचला स्तर है।

अगर फरवरी के बाकी तीन कारोबारी सत्रों में भी इस सूचकांक की सेहत नहीं सुधरती है तो यह अप्रैल 2003 के बाद से इसका सबसे खराब मासिक प्रदर्शन होगा।

बिकवाली का यह नया दौर सिट्रिनी रिसर्च की एक रिपोर्ट के बाद आया है। रिपोर्ट में वैश्विक टेक्नॉलजी सेवा उद्योग में एआई के बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में एक ऐसा परिदृश्य बताया गया है जिसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और विप्रो जैसी बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों के अनुबंध के रद्द होने की रफ्तार 2027 तक तेजी से बढ़ सकती है, क्योंकि एआई से जुड़े कोडिंग टूल्स लागत कम करते हैं और पारंपरिक ऑफशोर लेबर मॉडलों पर निर्भरता घटाते हैं।

सिट्रिनी की दलील है कि प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारतीय आईटी सेवाएं आकर्षक थीं और पश्चिमी कंपनियों के मुकाबले काफी ज्यादा सस्ती थीं। इसे अब चुनौती मिल रही है क्योंकि एआई कोडिंग एजेंटों की लागत तेजी से घटी है। उसने चेतावनी दी कि सेवा निर्यात में लगातार कमी से भारत का बाहरी संतुलन डगमगा सकता है, क्योंकि यह सेक्टर चालू खाता अधिशेष के मामले में सबसे अधिक योगदान देता है।

इस महीने अब तक सूचीबद्ध आईटी कंपनियों का लगभग 6.2 लाख करोड़ रुपये (68 अरब डॉलर) का बाजार पूंजीकरण घट गया है। इसमें कई लार्जकैप नाम वर्षों के सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं।

ब्रोकरेज फर्में भी ज्यादा सतर्क हो गई हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में जेफरीज ने मध्यावधि में बढ़ती अनिश्चितता के बीच मूल्यांकन में बढ़ोतरी की कम गुंजाइश का हवाला देते हुए इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नॉलजीज और एम्फैसिस को डाउनग्रेड कर दिया।

जेफरीज ने 22 फरवरी के एक नोट में कहा, ‘निफ्टी आईटी में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है और उसने इस साल अब तक निफ्टी 50 के मुकाबले 12 प्रतिशत अंक से कम प्रदर्शन किया है। हालांकि तीसरी तिमाही के नतीजों में ज्यादातर आईटी कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी हुई, लेकिन एआई में हाल के घटनाक्रम ने मध्यावधि से दीर्घावधि वृद्धि के आउटलुक को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और मूल्यांकन में 27 फीसदी तक की कमी आई है।’

ब्रोकरेज का मानना है कि शेयरों का प्रदर्शन अब अल्पावधि आय के बजाय दीर्घावधि व्यावसायिक निरंतरता की धारणा से ज्यादा तय होगा।

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First Published - February 24, 2026 | 10:19 PM IST

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