केंद्रीय कृषि व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिजनेस स्टैंडर्ड के कार्यक्रम ‘बीएस मंथन’ में कृषि क्षेत्र की नई वास्तविकताएं’ विषय पर चर्चा के दौरान कहा कि खाद सब्सिडी कंपनियों को क्यों दी जाए? इसे किसानों को सीधे देने पर राष्ट्रीय स्तर पर मंथन करने का समय आ गया है। चौहान ने कहा, ‘मैं किसानों से भी उनकी राय मांग रहा हूं क्योंकि तकनीक के माध्यम से खाद सब्सिडी सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर की जा सकती है। हम इस संभावना पर भी विचार कर रहे हैं। अगर आप मुझसे पूछें तो मैं कहना चाहूंगा कि खाद सब्सिडी का बड़ा हिस्सा इधर-उधर चला जाता है, ऐसा नहीं होना चाहिए। इसका पूरा लाभ सीधे किसानों को ही दिया जाना चाहिए।’
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने राष्ट्रीय कृषि रोडमैप पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार तीन तरह के कृषि रोडमैप बनाने पर काम कर रही है। एक राष्ट्रीय स्तर का रोडमैप होगा। दूसरा हर राज्य के हिसाब से और तीसरा अलग-अलग फसल के आधार पर।
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार द्वारा अमेरिका समेत अन्य देशों के साथ किए गए एफटीए में भारतीय किसान और कृषि के हितों की पूरी रक्षा की गई है। इन समझौतों से किसानों को नुकसान नहीं लाभ ही होगा जैसे अमेरिका के बाजार भारतीय मसाला, चाय, कॉफी, कपास आदि किसानों के लिए खुल रहे हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंथन कार्यक्रम के दौरान अब वापस लिए जा चुके कृषि कानूनों को दोबारा लाने के जटिल सवाल पर कहा कि उन्हें फिर से लागू करने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य स्वयं कृषि विपणन के क्षेत्र में कई सुधार कर रहे हैं और अपने कृषि बाजारों को कितना खोलना है, यह राज्यों पर ही निर्भर करता है।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने सरकार की नीतियों को दिशा देने वाले छह सूत्रीय रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, खेती की लागत कम करना, फसलों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना, आवश्यकता पड़ने पर नुकसान की भरपाई करना, फसल विविधीकरण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करना शामिल है।
चौहान ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कहा कि सरकार ने उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किया है। उन्होंने गेहूं और धान के बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद के साथ-साथ टमाटर, प्याज और आलू जैसी फसलों के लिए किए गए हस्तक्षेपों का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत राज्यों को एमएसपी पर खरीद की अनुमति दी गई है। कुछ मामलों में कीमतों को स्थिर रखने के लिए केंद्र सरकार ने परिवहन लागत भी वहन की है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए मंत्री ने ‘भावांतर’ मूल्य अंतर भुगतान मॉडल को याद किया। इस मॉडल में फसल की सरकारी खरीद के बजाय एमएसपी और बाजार मूल्य के अंतर की राशि सीधे किसान के खाते में स्थानांतरित की जाती है। उन्होंने बताया कि केंद्र ने अब तिलहन के लिए भी राज्यों को इसी तरह का मॉडल अपनाने की सुविधा दी है। हा लांकि भौतिक खरीद और मूल्य अंतर भुगतान के बीच चयन राष्ट्रीय जरूरतों, किसानों की प्राथमिकता और राज्यों की क्षमता पर निर्भर करेगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि 8.5 करोड़ से अधिक किसानों को डिजिटल किसान आईडी जारी की जा चुकी हैं, जिसमें उनकी जोत और फसल संबंधी विवरण दर्ज हैं। यह डेटाबेस प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) को सक्षम बनाता है और फर्जी या अधिक दावों को रोकने में मदद करता है।