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BS Manthan में सुमन बेरी ने कहा: उत्पादकता में चीन से काफी पीछे है भारत, पूंजी बढ़ाने की है सख्त जरूरत

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बीएस मंथन में आधुनिक भारत की राह शीर्षक से आयोजित एक अनौपचारिक वार्ता में बेरी ने कहा कि अगले 25 वर्षों में भारत की कामकाजी आबादी की आयु में सबसे ज्यादा वृद्धि होगी

Last Updated- February 24, 2026 | 11:21 PM IST
Suman Bery
नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी बिज़नेस स्टैंडर्ड 'मंथन' में अपनी बात रखते हुए

नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने मंगलवार को सुझाव दिया कि सरकार का पॉलिसी थिंक टैंक अपना नाम बदलकर उत्पादकता आयोग रख सकता है। उनका तर्क है कि भारत के आबादी लाभ को उत्पादकता में सुधार के लिए एक मजबूत और निरंतर प्रयास के जरिये सहारा दिया जाना चाहिए।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित बिजनेस स्टैंडर्ड के कार्यक्रम बीएस मंथन में आधुनिक भारत की राह शीर्षक से आयोजित एक अनौपचारिक वार्ता में बेरी ने कहा कि अगले 25 वर्षों में भारत की कामकाजी आबादी की आयु में सबसे ज्यादा वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इससे श्रम उत्पादकता में सुधार पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करना जरूरी हो गया है।

नीति आयोग की दोबारा ब्रांडिंग

वैश्विक उदाहरणों का हवाला देते हुए बेरी ने कहा, ऑस्ट्रेलिया में उत्पादकता आयोग नाम की एक संस्था है और मेरे मन में यह विचार आया है कि शायद हमें (नीति आयोग को) उत्पादकता आयोग के रूप में नया नाम दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे एक औपचारिक प्रस्ताव के रूप में नहीं बल्कि एक विचार के रूप में देखा जाना चाहिए, जिस पर विमर्श किया जा सकता है।

बेरी ने कहा कि भारत का आबादी लाभ और 2047 तक विकसित भारत बनने का लक्ष्य आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादकता में सुधार किए बिना युवा और बढ़ते कार्यबल के लाभों को पूरी तरह से महसूस नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि भारत की श्रम उत्पादकता कमजोर नहीं है, फिर भी चीन की तुलना में काफी कम है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए भारत को श्रम बल में भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि श्रम बाजार में प्रवेश करने वाले नए कामगारों के कारण श्रमिक के औसत उत्पादन में कमी न आए।

महिला कामगारों की भागीदारी अहम

बेरी के अनुसार महिला श्रमशक्ति की भागीदारी बढ़ाने में एक बड़ा मौका छिपा हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी करीब 18.3 करोड़ महिलाएं कार्यबल का हिस्सा हैं जबकि लगभग 26.4 करोड़ कामकाजी उम्र वाली महिलाएं कार्यबल में शामिल नहीं हैं। उन्होंने इस अंतर को देश के लिए विशाल मौका बताया। कुशल महिलाओं की इस विशाल संख्या को इकट्ठा करने के लिए सामाजिक मानदंडों, बच्चों की देखभाल संबंधी चुनौतियों और अन्य बाधाओं को दूर करना आवश्यक होगा, जो महिलाओं को काम करने से रोकती हैं। नीतियों में भी यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्यबल में ज्यादा महिलाओं को शामिल करने से समग्र उत्पादकता में कमी न आए।

बेरी ने कहा, आंकड़े बताते हैं कि क्रय शक्ति समता के संदर्भ में मापी गई श्रम उत्पादकता और वास्तविक प्रति व्यक्ति आय के बीच लगभग एकसमान संबंध दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत 2047 तक वास्तविक प्रति व्यक्ति आय को 18,000 डॉलर तक बढ़ाना चाहता है तो श्रम उत्पादकता को वर्तमान स्तर (करीब 3,000 डॉलर) से कई गुना बढ़ाना होगा।

निवेश और शहरीकरण

बेरी ने कहा कि तेज वृद्धि के लिए ज्यादा निवेश की आवश्यकता होगी। जैसे-जैसे कामकाजी उम्र की आबादी बढ़ती है, भारत को पूंजी की कमी से बचना होगा, जहां प्रति कामगार पूंजी घटती है। उन्होंने कहा, वृद्धि को गति देने का मतलब है ज्यादा लोगों को सक्रिय श्रम बल में लाना और साथ ही उनकी औसत उत्पादकता बढ़ाना।

बेरी का अनुमान है कि भारत को अपनी निवेश दर को सकल घरेलू उत्पाद के दो से तीन फीसदी तक बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है। पूंजी की मांग को बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में घरेलू निवेश, ऊर्जा परिवर्तन के लिए प्रतिबद्धताएं और तेजी से शहरीकरण शामिल हैं।

उन्होंने निर्यात के महत्त्व पर भी जोर दिया। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में, बढ़ते आयात की भरपाई मजबूत निर्यात के माध्यम से ही की जा सकेगी। लेकिन वैश्विक बाजारों में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धा क्षमता की आवश्यकता होगी, खासकर अगर वैश्विक व्यापार वृद्धि धीमी बनी रहती है।

सेवाएं, कौशल और भविष्य की रणनीति

क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए बेरी ने सुझाव दिया कि भारत को अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के मुख्य स्रोत के रूप में विनिर्माण पर अपने पारंपरिक ध्यान पर दोबारा विचार करने की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि अगर सेवा क्षेत्र का उचित प्रबंधन किया जाए तो यह महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मजबूत अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों और आजीवन शिक्षा को बढ़ावा देने की भी अपील की। ​​उन्होंने चेतावनी दी कि उच्च शिक्षा पर अत्यधिक निर्भरता सही नहीं है क्योंकि यह मुख्य रूप से सरकारी नौकरी हासिल करने के मकसद से बनाई गई है।

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First Published - February 24, 2026 | 11:12 PM IST

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