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लाल निशान के साथ बाजार बंद, सेंसेक्स 873 अंक और निफ्टी 261 अंक गिरा; HDFC और रिलायंस गिरावट के मुख्य कारण

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सेंसेक्स की गिरावट में सबसे अधिक योगदान एचडीएफसी बैंक का था जिसमें 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज का स्थान रहा जो 1.1 प्रतिशत गिरा।

Last Updated- May 20, 2025 | 11:19 PM IST
Stock Market
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

मंगलवार को वित्तीय क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज में बिकवाली दबाव की वजह से शेयर बाजार गिरावट की गिरफ्त में चला गया। बीएसई का सेंसेक्स 873 अंक या 1.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,186 पर बंद हुआ। निफ्टी 261 अंक या 1.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,684 पर बंद हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध फर्मों का कुल बाजार पूंजीकरण 5.6 लाख करोड़ रुपये घटकर 438 लाख करोड़ रुपये रह गया।

सेंसेक्स की गिरावट में सबसे अधिक योगदान एचडीएफसी बैंक का था जिसमें 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज का स्थान रहा जो 1.1 प्रतिशत गिरा। वित्तीय शेयरों पर भी बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी फाइनैंशियल सर्विसेज में 1.2 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी के सभी सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट आई जिनमें निफ्टी ऑटो में सबसे अधिक 2.2 प्रतिशत की गिरावट आई।

भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह नुकसान के साथ बंद हो रहे हैं। पिछले सप्ताह इनमें 4.2 प्रतिशत की तेजी आई थी जो 18 अप्रैल के बाद से उनका सर्वश्रेष्ठ साप्ताहिक प्रदर्शन था। पिछले सप्ताह भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम समझौते के बाद शेयर बाजारों में तेजी आई। लेकिन अमेरिका और चीन के बीच 90 दिन तक जवाबी टैरिफ में कटौती पर सहमति बनने के बाद कुछ मुनाफावसूली हुई। हालांकि, सप्ताह के आखिर में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद खरीदारी लौट आई कि भारत ने अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क हटाने की पेशकश की है।  लेकिन इस सप्ताह बाजारों में सकारात्मक कारकों की कमी के कारण गिरावच आ रही है।

जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘प्रमुख सकारात्मक कारकों के अभाव और अमेरिकी खजाने की स्थिरता को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली का विकल्प चुना और सतर्क रुख अपनाया। कारोबारी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। इसलिए बिकवाली का दबाव ज्यादा रहा। मौजूदा महंगे भावों और व्यापार करार में देरी को देखते हुए हम अल्पावधि में बाजार के एक दायरे की उम्मीद कर रहे हैं। इसकी वजह से एफआईआई भारतीय बाजार में अपना निवेश कम कर सकते हैं।’

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की दिशा, शेष कंपनियों के वित्तीय परिणाम और मॉनसून बाजार की दिशा तय करेंगे। रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्र ने कहा, ‘यह गिरावट कोई बड़ा घरेलू ट्रिगर न होने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कारोबारियों की बढ़ती सतर्कता दर्शाती है। अमेरिकी बाजारों में बीच-बीच में हो रहे उतार-चढ़ाव और भारत सहित उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेश पर अमेरिका-चीन व्यापार करार के संभावित असर की चिंताओं ने भी धारणा को प्रभावित किया।’

मिश्र ने कहा कि निवेशकों को हालिया गिरावट पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए और इसके बजाय स्पष्ट संकेतों का इंतजार करना चाहिए। मिश्र ने कहा, ‘निफ्टी में 24,800 का स्तर टूटने से धारणा प्रभावित हुई है।  लेकिन जब तक यह सूचकांक 24,400 के स्तर से ऊपर बना रहेगा, तब तक शॉर्ट-टर्म रुझान सकारात्मक है।’ बाजार धारणा कमजोर रही। गिरने वाले शेयरों की संख्या 2,642 रही और 1,341 में तेजी आई। 

 

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First Published - May 20, 2025 | 10:52 PM IST

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