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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से अनिश्चितता घटेगी, निवेश और कैपिटल फ्लो को मिलेगा बढ़ावा: तुहिन कांत पांडेय

भारत के साथ व्यापार समझौते और टैरिफ घटाने की घोषणा के एक दिन बाद, मंगलवार को FIIs ने 7,561 करोड़ रुपये के भारतीय शेयरों की खरीदारी की

Last Updated- February 04, 2026 | 9:45 PM IST
Tuhin Kanta Pandey

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को कहा कि भारत-अमेरिका समझौता व्यापार मोर्चे पर अनिश्चितताओं को दूर करेगा। इससे ज्यादा स्थिरता आएगी, अनुमान लगाने की क्षमता बढ़ेगी और भारत में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

कॉरपोरेट बॉन्ड पर एक कार्यक्रम के मौके पर पांडेय ने कहा, ‘जब आपके पास किसी नियामकीय कार्रवाई का दबाव होता है, जिसे अगर हटा दिया जाए और व्यापारिक चिंताएं दूर कर ली जाएं तो इस तरह की अनिश्चितताएं समाप्त होने से किसी भी पूंजी निर्माण में हमेशा तेजी आती है। इस समझौते से निवेश संबंधी निर्णयों को बढ़ावा मिलेगा और उस पूंजी के बारे में ज्यादा सटीक अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। इसका विनिमय दर पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा।’

भारत के साथ व्यापार समझौते और टैरिफ घटाने की घोषणा के एक दिन बाद, मंगलवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफआईआई) ने 7,561 करोड़ रुपये के भारतीय शेयरों की खरीदारी की।

पांडेय की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय शेयर बाजारों में लगातार विदेशी बिकवाली देखी गई है। एफआईआई ने 2025 में 1.66 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की और 2026 में अब तक लगभग 23,000 करोड़ के शेयर बेच चुके हैं।

सेबी चेयरमैन ने कहा कि नियामक की जिम्मेदारी एफपीआई के लिए सतत, अनुमान योग्य, आसान और बिना रुकावट वाला ढांचा देना है ताकि पूंजी प्रवाह आसान हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि बाजार नियामक लगातार अपनी प्रक्रियाओं को बेहतर बना रहा है। उन्होंने बिजनेस करने में आसानी के लिए उठाए गए कदमों के तौर पर कॉमन कॉन्ट्रैक्ट नोट, आसान रजिस्ट्रेशन, डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल और एफपीआई के लिए मार्जिन की प्रस्तावित नेटिंग जैसे उपायों का जिक्र किया।

पांडेय ने बजट में सट्टेबाजी को रोकने के लिए वायदा और विकल्प पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद डेरिवेटिव बाजार में और सख्ती की संभावना को लेकर कारोबारियों की चिंताओं को भी दूर किया। उन्होंने कहा कि सेबी फिलहाल डेरिवेटिव पर किसी अतिरिक्त नियामकीय उपाय पर विचार नहीं कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘नियामक के तौर पर हम डेटा और दूसरे इनपुट के आधार पर डेरिवेटिव बाजार को बहुत ही व्यवस्थित तरीके से देख रहे हैं। इस समय, हम किसी भी नए उपाय पर विचार नहीं कर रहे हैं और हमने जो भी फ्रेमवर्क बनाया है, वह जारी रहेगा।’

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के विकास पर पांडेय ने कहा कि सेबी उद्योग के कारोबारियों और निवेशकों, दोनों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।

नियामक प्राइमरी और पब्लिक बॉन्ड जारी करने में सुधार, सेकंडरी बाजार में तरलता बढ़ाने, निवेशकों की भागीदारी में इजाफा करने और बॉन्ड योजनाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनियों और निवेश बैंकों के साथ बातचीत कर रहा है।

सेबी प्रमुख ने कई ढांचागत चुनौतियों का जिक्र किया। इनमें बाजार का ज्यादा रेटिंग वाले जारीकर्ताओं की तरफ झुकाव, फंड जुटाने में अलग अलग उद्योगों के बजाय ज्यादातर वित्तीय संस्थानों का दबदबा होना, निजी नियोजन की अधिक हिस्सेदारी, जिससे पारदर्शित कम होती है, और एक कमजोर सेकेंडरी बाजार शामिल हैं।

First Published - February 4, 2026 | 9:40 PM IST

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