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भूराजनीतिक तनाव से टूटे शेयर बाजार

Last Updated- December 11, 2022 | 9:06 PM IST

बाजारों में मंगलवार को लगातार पांचवें दिन गिरावट दर्ज हुई क्योंंकि रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को जोखिम वाली परिसंपत्तियां बेचने के लिए प्रोत्साहित किया। कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 1,289 अंक यानी 2.3 फीसदी तक टूट गया था, लेकिन बाद में अपने दो तिहाई नुकसान की भरपाई कर ली।
सेंसेक्स 57,300 अंक पर बंद हुआ और कुल मिलाकर उसमें 0.66 फीसदी यानी 383 अंकों की गिरावट दर्ज हुई। दूसरी ओर निफ्टी 114 अंकों की गिरावट के साथ 17,092 पर कारोबार की समाप्ति की।  व्यापक बाजार में ज्यादा फिसलन देखने को मिली और निफ्टी स्मॉलकैप-100, 2.1  फीसदी टूटा जबकि मिडकैप 100 इंडेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज हुई।
विदेशी निवेशकों ने 3,246 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, वहीं देसी संस्थानों ने 4,109 करोड़ रुपये की खरीदारी कर मजबूत सहारा दिया। बढ़ती महंगाई, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख और तेल की कीमतें व भूराजनैतिक तनाव आदि के बीच विदेशी निवेशकों ने इस महीने करीब 22,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है।
सोमवार को ब्लादिमिर पुतिन ने अपने भाषण में पूर्वी यूक्रेन में दो स्वघोषित अलगाव वाले इलाकों को मान्यता देने के रूस के फैसले का ऐलान किया था, जिससे रूस व पश्चिम के बीच तनाव और बढ़ गया। रूस के राष्ट्रपति ने विवाद वाले इलाकों में शांति सेना भेजने के आदेश पर भी हस्ताक्षर किए हैं। रूस के इस कदम की अमेरिका व उसके सहयोगियों ने भत्र्सना की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन के अलगाव वाले इलाकों में अमेरिकी निवेश, व्यापार व वित्त पोषण पर पाबंदी के आदेश जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियोंं के हवाले से कहा गया है कि मंगलवार को रूस पर अतिरिक्त पाबंदी लगाए जाने की घोषणा होगी। यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन भी मंगलवार को पाबंदी की घोषणा कर सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 1.50 लाख रूसी सैनिक यूक्रेन की सीमा पर तैनात हैं। विश्लेषकों ने कहा कि पूर्वी यूरोप में भूराजनैतिक संकट ने इक्विटी बाजारों के लिए खासी अनिश्चितता पैदा की है, जो पहले ही केंद्रीय बैंकों के रुख व नकदी की वापसी से परेशान हैं।
विशेषज्ञों को डर है कि रूस व पश्चिम के वबीच तनाव से जिंस की कीमतें बढ़ेंगी, साथ ही महंगाई में इजाफा होगा और मौद्रिक नीति सख्त होगी।
मोतीलाल ओसवाल के प्रबंध निदेशक व सीईओ मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि अल्पावधि में बाजार और गिर सकते हैं।
उतारचढ़ाव की माप करने वाला इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स 26.6 पर रहा, जो 26 फरवरी, 2021 के बाद का सर्वोच्च स्तर है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, रूस व यूक्रेन के बीच बढ़ रहे तनाव से वैश्विक स्तर पर अवधारणा प्रभावित की है क्योंंकि भागीदार बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने कहा, हम अपना सतर्क रुख दोहरा रहे हैं और हमारा सुझाव है कि उधार वाली पोजीशन को सीमित करें। निफ्टी अगर 16,800 से नीचे गया तो उसमें और गिरावट हो सकती है। अन्यथा एक दायरे में अस्थिरता जारी रहेगी।

First Published - February 22, 2022 | 11:17 PM IST

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Last Updated- December 11, 2022 | 9:06 PM IST

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सेंसेक्स 57,300 अंक पर बंद हुआ और कुल मिलाकर उसमें 0.66 फीसदी यानी 383 अंकों की गिरावट दर्ज हुई। दूसरी ओर निफ्टी 114 अंकों की गिरावट के साथ 17,092 पर कारोबार की समाप्ति की।  व्यापक बाजार में ज्यादा फिसलन देखने को मिली और निफ्टी स्मॉलकैप-100, 2.1  फीसदी टूटा जबकि मिडकैप 100 इंडेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज हुई।
विदेशी निवेशकों ने 3,246 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, वहीं देसी संस्थानों ने 4,109 करोड़ रुपये की खरीदारी कर मजबूत सहारा दिया। बढ़ती महंगाई, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख और तेल की कीमतें व भूराजनैतिक तनाव आदि के बीच विदेशी निवेशकों ने इस महीने करीब 22,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है।
सोमवार को ब्लादिमिर पुतिन ने अपने भाषण में पूर्वी यूक्रेन में दो स्वघोषित अलगाव वाले इलाकों को मान्यता देने के रूस के फैसले का ऐलान किया था, जिससे रूस व पश्चिम के बीच तनाव और बढ़ गया। रूस के राष्ट्रपति ने विवाद वाले इलाकों में शांति सेना भेजने के आदेश पर भी हस्ताक्षर किए हैं। रूस के इस कदम की अमेरिका व उसके सहयोगियों ने भत्र्सना की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन के अलगाव वाले इलाकों में अमेरिकी निवेश, व्यापार व वित्त पोषण पर पाबंदी के आदेश जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियोंं के हवाले से कहा गया है कि मंगलवार को रूस पर अतिरिक्त पाबंदी लगाए जाने की घोषणा होगी। यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन भी मंगलवार को पाबंदी की घोषणा कर सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 1.50 लाख रूसी सैनिक यूक्रेन की सीमा पर तैनात हैं। विश्लेषकों ने कहा कि पूर्वी यूरोप में भूराजनैतिक संकट ने इक्विटी बाजारों के लिए खासी अनिश्चितता पैदा की है, जो पहले ही केंद्रीय बैंकों के रुख व नकदी की वापसी से परेशान हैं।
विशेषज्ञों को डर है कि रूस व पश्चिम के वबीच तनाव से जिंस की कीमतें बढ़ेंगी, साथ ही महंगाई में इजाफा होगा और मौद्रिक नीति सख्त होगी।
मोतीलाल ओसवाल के प्रबंध निदेशक व सीईओ मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि अल्पावधि में बाजार और गिर सकते हैं।
उतारचढ़ाव की माप करने वाला इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स 26.6 पर रहा, जो 26 फरवरी, 2021 के बाद का सर्वोच्च स्तर है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, रूस व यूक्रेन के बीच बढ़ रहे तनाव से वैश्विक स्तर पर अवधारणा प्रभावित की है क्योंंकि भागीदार बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने कहा, हम अपना सतर्क रुख दोहरा रहे हैं और हमारा सुझाव है कि उधार वाली पोजीशन को सीमित करें। निफ्टी अगर 16,800 से नीचे गया तो उसमें और गिरावट हो सकती है। अन्यथा एक दायरे में अस्थिरता जारी रहेगी।

First Published - February 22, 2022 | 11:17 PM IST

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