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थोड़ी खरीद से सेंसेक्स बढ़ा

Last Updated- December 11, 2022 | 6:03 PM IST

बाजारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और गुरुवार को प्रमुख सूचकांक करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुए, क्योंकि निवेशकों ने पिटे हुए शेयरों में खरीदारी करने पर जोर दिया, भले ही वैश्विक मंदी की चिंताओं ने इस तेजी की रफ्तार को नियंत्रित बनाए रखा। विश्लेषकों का कहना है कि तेल कीमतों और अन्य प्रमुख जिंसों में गिरावट ने घरेलू बाजार के लिए मजबूत प्रदान की है।
कच्चे तेल की कीमतें महीने के ऊंचे स्तरों से करीब 15 प्रतिशत नीचे आई हैं। तेल कीमतों में इन चिंताओं से कमजोरी आई है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है।
सेंसेक्स 443 अंक, या 0.9 प्रतिशत चढ़कर 52,263 पर बंद हुआ। निफ्टी 0.93 प्रतिशत, या 143 अंक चढ़कर 15,557 पर बंद हुआ। दो साल से ज्यादा समय में सबसे बड़ी साप्ताहिक कमजोरी (5 प्रतिशत) दर्ज की गई और इस सप्ताह चार कारोबारी सत्रों में गिरावट आई।  दूसरी तरफ, बाजार मूल्यांकन गिरकर आकर्षक स्तरों पर रह गए हैं, लेकिन दूसरी तरफ वैश्विक निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली और अनिश्चित आर्थिक परिदृश्य से प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ा है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 2,319 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) 2,438 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों में खरीदार रहे। इस साल अब तक एफपीआई ने बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल और मुद्रास्फीति को लेकर फेडरल की सख्ती के बीच घरेलू बाजार से 2.1 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं।
फेड की आक्रामक मौद्रिक सख्ती से अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी की चपेट में आने की आशंका को बढ़ावा मिला है।
बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने इन आशंकाओं को दूर किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी में फंसने के खतरे में है।
इस महीने के शुरू में अपनी बैठक के दौरान फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 75 आधार अंक तक का इजाफा किया। पॉवेल की प्रतिक्रिया के बाद शिकागो फेड के अध्यक्ष चार्ल्स इवांस ने कहा कि जुलाई की एफओमसी बैठक में अन्य 75 आधार अंक की वृद्धि की जा सकती है।
फेडरल के नीतिगत बदलाव को देखते हुए निवेशक मंदी की आशंका को गंभीरता से ले रहे हैं। इससे जिंस कीमतों में भारी गिरावट को बढ़ावा मिला है। ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स गुरुवार को लगातार चौथे दिन कमजोर रहा।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (रिटेल रिसर्च) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘बाजार वैश्विक मंदी की आशंका, मौद्रिक सख्ती, रुपये में गिरावट, और बॉन्ड प्रतिफल में तेजी से समस्याओं का सामना कर रहे हैं। वहीं सकारात्मक नजरिये से, कच्चे तेल में गिरावट और पिटे हुए शेयरों में खरीदारी से बाजार को कुछ हद तक रफ्तार बनाए रखने में मदद भी मिल रही है।’
इसके अलावा बीएसई का मिडकैप 1.40 फीसदी और स्मॉलकैप सूचकांक 1.18 फीसदी चढ़ गया। एशिया के अन्य बाजारों में जापान का निक्की, हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक और चीन का शंघाई कंपोजिट में मजबूती रही जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार के दौरान गिरावट रही। अमेरिकी शेयर बाजार भी मंगलवार को मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

First Published - June 24, 2022 | 12:18 AM IST

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