facebookmetapixel
Advertisement
बदलेंगे स्मार्टफोन PLI नियम! अगले चरण में उत्पादन के बजाय लोकल वैल्यू-एडिशन को मिल सकती है प्राथमिकताRBI के स्पष्टीकरण से UPI लेनदेन पर राहत, PhonePe-Paytm को बड़ा फायदाटैरिफ पर अनिश्चितता के बीच हॉवर्ड लटनिक और पीयूष गोयल में ‘सार्थक’ बातचीतएंटरप्राइज एआई में तेजी से बढ़त: यूनिफोर को भारत में दिख रहीं अपार संभावनाएंiPhone के ग्लोबल उत्पादन का 30% भारत में होने की संभावना, Apple की रणनीति में बदलाव की उम्मीद नहींस्टार्टर तकनीक के लिए सेडेमैक की नजर ग्लोबल बाजार पर, टीवीएस-बजाज के बाद विदेशी OEM से बातचीत तेजकीमत बनी सबसे बड़ा फैक्टर: भारतीय ग्राहक 15 लाख के भीतर कार पसंद कर रहे, हाइब्रिड की मांग बढ़ीBEE सख्त नियमों पर कर रहा विचार, 6 प्रमुख कार कंपनियों ने कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य हासिल किएEditorial: एग्रीस्टैक बनेगा ‘अगला UPI’? किसानों के लिए डिजिटल क्रांतिएक बार फिर निजी बैंकों पर भारी सरकारी बैंक, तिमाही मुनाफा रिकॉर्ड ऊंचाई पर

SBI Fund Raise: इन्फ्रा बॉन्ड के जरिए 10,000 करोड़ रुपये जुटाएगा एसबीआई!

Advertisement

बैंक 5,000 करोड़ रुपये के बेस साइज एवं 5,000 करोड़ रुपये के ग्रीन शू ऑप्शन के साथ 15 साल के इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड्स जारी कर सकता है।

Last Updated- July 20, 2023 | 10:07 AM IST
SBI Scheme

SBI Fund Raise: देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जुलाई महीने के अंत तक 10 हजार करोड़ रुपये तक का फंड जुटाने (SBI Fund Raise)  की योजना बना रहा है। एसबीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड्स की बिक्री के जरिए ये फंड जुटा सकता है। इस बारे में बैंक से संबधित सूत्रों ने ईटी को जानकारी दी। ईटी की खबर के मुताबिक बैंक 5,000 करोड़ रुपये के बेस साइज एवं 5,000 करोड़ रुपये के ग्रीन शू ऑप्शन के साथ 15 साल के इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड्स जारी कर सकता है।

जनवरी में बैंक ने जारी किए थे इन्फ्रा बॉन्ड

इसी साल जनवरी महीने में बैंक ने इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड्स जारी किए थे, इन बॉन्ड्स की 15-साल की मेच्योरिटी थी। बता तें, ये पहली बार थी जब किसी भी भारतीय बैंक ने 15 साल की मेच्योरिटी अवधि के इस तरह के बॉन्ड जारी किए थे।

फंड जुटाने के लिए क्या है बैंक का प्लान

ईटी के खबर के अनुसार, “बैंक का अनुमान है कि 15 साल के इन्फ्रास्ट्रक्चर ब्रैकेट में अधिक (बॉन्ड्स) इश्यू किए जाने से लंबी अवधि के मेच्योरिटी सेग्मेंट में अधिक फंड जुटाने को प्रोत्साहन मिलेगा जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग लिए बेहतर कीमत तय करने में मदद मिलेगी। ”

ये भी पढ़ें- Jio Financial Services: जियो फाइनैंशियल की कीमत पर हर किसी की नजर

क्या होते हैं ये बॉन्ड

इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड लंबी अवधि के डेट इंस्ट्रुमेंट्स होते हैं जिनकी मेच्योरिटी अवधि कम-से-कम सात साल की होती है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक, इन इंस्ट्रुमेंट्स का इस्तेमाल इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को कर्ज देने के लिए किया जाता है। ऐसे में बैंकों को कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) और स्टेच्युटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR) को मेंटेन करने की जरूरत नहीं होती है।

Advertisement
First Published - July 20, 2023 | 10:07 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement