देश की शीर्ष छह कार विनिर्माता कंपनियां वित्त वर्ष 24 के साथ-साथ वित्त वर्ष 25 में कैफे-2 के मानदंडों के तहत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के अपने-अपने लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम रही हैं। यही वजह है कि ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) का मानना है कि अब सख्त लक्ष्य पेश करने का समय आ गया है, जो आगामी कैफे-3 की व्यवस्था के तहत हर साल उत्तरोत्तर कड़े होते जाएंगे। बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी मिली है।
इस बीच बीईई द्वारा संकलित आंकड़े प्रदर्शन मार्जिन में साफ तौर पर भिन्नता का संकेत दे रहे हैं। ह्युंडै मोटर इंडिया और किया इंडिया जैसी कंपनियों ने दोनों ही वर्षों में मुश्किल से अपने बेड़े के औसत लक्ष्यों को पूरा किया है। दूसरी ओर मारुति सुजूकी इंडिया महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम), टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (टीएमपीवी) ने सहजता से अनुपालन किया है, जो निर्धारित सीमाओं और वास्तविक उत्सर्जन के बीच व्यापक अंतर दिखाते हैं।
मारुति सुजूकी में वित्त वर्ष 24 के दौरान बेड़े का उत्सर्जन 109.185 ग्राम प्रति किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले 103.635 ग्राम प्रति किलोमीटर रहा। वित्त वर्ष 25 के दौरान उत्सर्जन और घटकर 110.076 ग्राम प्रति किलोमीटर के लक्ष्य की तुलना में 101.389 ग्राम प्रति किलोमीटर रह गया, जो अनिवार्य स्तरों से ऊपर बढ़ते स्तर का संकेत देता है।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने छह कार विनिर्माताओं के बीच सबसे व्यापक अंतर दर्ज किया। वित्त वर्ष 24 में इसका उत्सर्जन 119.722 ग्राम प्रति किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले 95.119 ग्राम प्रति किलोमीटर रहा। वित्त वर्ष 25 में इसने 120.939 ग्राम प्रति किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले 96.852 ग्राम प्रति किलोमीटर उत्सर्जन दर्ज किया, जो दोनों वर्षों में 20 ग्राम प्रति किलोमीटर से अधिक का अंतर दर्शाता है।
कैफे की यह नीति अवधि आधारित दृष्टिकोण का पालन करते हुए काम करती है। बीईई प्रत्येक पांच साल की अवधि के लिए समूचे उद्योग के लिए एकल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित करता है, जो कैफे-1 (वित्त वर्ष 17 से वित्त वर्ष 22) के लिए 130 ग्राम प्रति किलोमीटर और कैफे-2 (वित्त वर्ष 23 से वित्त वर्ष 27) के लिए 113 ग्राम प्रति किलोमीटर तय किया गया है।
बीईई के अधिकारियों ने यह भी कहा कि मारुति सुजूकी और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स सहित कई कार विनिर्माताओं के लिए व्यक्तिगत उत्सर्जन लक्ष्य पिछले कुछ वर्षों के दौरान कैफे-2 के तहत मामूली रूप से बढ़ चुकी हैं, जो इस अवधि के दौरान उनके वाहन बेडे के औसत कर्ब वेट में वृद्धि को दर्शाता है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के सवालों के जवाब में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रवक्ता ने कहा कि कर्ब वेट में वृद्धि को सुरक्षा बढ़ाने के लिहाज से देखा जाना चाहिए। प्रवक्ता ने कहा, ‘टीएमपीवी में वाहन डिजाइन और इंजीनियरिंग में सुरक्षा प्रमुख प्राथमिकता होती है। आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं और संरचनात्मक सुदृढीकरण के जुड़ने से वाहन के कर्ब वेट में लगातार वृद्धि हुई है।’
बीईई के अधिकारियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को यह भी बताया कि कैफे-2 के तहत लक्ष्यों और वास्तविक उत्सर्जन के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है। इससे पता चलता है कि उद्योग कैफे-3 के मानदंडों में कड़े मानकों को संभाल सकता है, जो वित्त वर्ष 28 और वित्त वर्ष 32 के बीच लागू होंगे।