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एक बार फिर निजी बैंकों पर भारी सरकारी बैंक, तिमाही मुनाफा रिकॉर्ड ऊंचाई पर

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दिसंबर तिमाही में 30 सूचीबद्ध सार्वभौमिक बैंकों में से केवल 3 का फंसा हुआ कर्ज यानी एनपीए 1 फीसदी से अधिक रहा। सभी 3 निजी क्षेत्र के बैंक हैं

Last Updated- February 26, 2026 | 9:28 PM IST
Banks

इससे पहले कि हम उनके मुनाफे की बात करें, आइए पहले नजर डालते हैं परिसंपत्ति गुणवत्ता पर जो बैंकों को मुनाफे वाला बनाने में अहम भूमिका निभाती है। दिसंबर तिमाही में 30 सूचीबद्ध सार्वभौमिक बैंकों में से केवल 3 का फंसा हुआ कर्ज यानी एनपीए 1 फीसदी से अधिक रहा। सभी 3 निजी क्षेत्र के बैंक हैं। और इन 30 में से 18 का शुद्ध एनपीए आधे फीसदी से कम है।

सबसे कम विशुद्ध एनपीए यानी परिसंपत्तियों के प्रतिशत के रूप में सबसे कम फंसे कर्ज बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन बैंक (0.15 फीसदी), आईडीबीआई बैंक लिमिटेड (0.18 फीसदी), करुर वैश्य बैंक लिमिटेड (0.19 फीसदी) और तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक लिमिटेड (0.20 फीसदी) का रहा। वहीं इंडियन ओवरसीज बैंक में यह 0.24 फीसदी रहा।

बड़े बैंकों की बात करें तो सरकारी क्षेत्र में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नैशनल बैंक, केनरा बैंक और निजी क्षेत्र में एचडीएफसी बैंक लिमिटेड, आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड, ऐक्सिस बैंक लिमिटेड और कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड का शुद्ध एनपीए आधा फीसदी से कम रहा। फंसे हुए कर्ज की वसूली, नए फंसे कर्ज में कमी और संकटग्रस्त परिसंपत्तियों की बिक्री करके हुए परिसंपत्ति पुनर्गठन ने भी इसे कम करने में मदद की है।

इस बीच केवल दो बैंकों (दोनों निजी) का सकल एनपीए एक फीसदी से कम था। वे हैं करुर वैश्य बैंक (0.71 फीसदी) और तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक (0.91 फीसदी)। इसके अलावा 11 बैंकों का सकल एनपीए 2 फीसदी से कम रहा। इनमें शामिल बड़े बैंकों का नाम था एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक और कोटक बैंक।

दूसरी ओर, इंडसइंड बैंक लिमिटेड, डीसीबी बैंक लिमिटेड और धनलक्ष्मी बैंक लिमिटेड का शुद्ध एनपीए एक फीसदी से अधिक था। तीन निजी बैंकों और दो सरकारी बैंकों का सकल एनपीए 3 फीसदी या उससे अधिक रहा। इनमें इंडसइंड बैंक (3.56 फीसदी), बंधन बैंक लिमिटेड (3.33 फीसदी), पीएनबी (3.19 फीसदी), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (3.06 फीसदी) और जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड (3 फीसदी) शामिल हैं।

पूरे उद्योग का सकल एनपीए दिसंबर तिमाही में सालाना आधार पर 12.44 फीसदी घटकर 3,84,258 करोड़ रुपये हो गया। तिमाही आधार पर इसमें 3.6 फीसदी की गिरावट आई। दोनों ही मानकों पर सरकारी बैंक निजी बैंकों से बेहतर रहे। प्रावधान के बाद शुद्ध एनपीए सालाना 11.33 फीसदी और तिमाही आधार पर 2.12 फीसदी घटकर 85,356 करोड़ रुपये पर आ गया। यहां भी, सरकारी बैंकों ने अपने निजी समकक्षों की तुलना में तेज गिरावट दिखाई।

बैंकिंग क्षेत्र ने काफी दूरी तय कर ली है। मार्च 2018 में जब एनपीए चरम पर था तब अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए इसकी मात्रा करीब 10.36 लाख करोड़ रुपये थी। उस समय उद्योग का शुद्ध एनपीए 5.2 लाख करोड़ रुपये था।

दो बातें जो बैंकों के मुनाफे को प्रभावित करती हैं वे हैं शुद्ध ब्याज मार्जिन यानी एनआईएम अर्थात फंड की लागत और आय का अंतर तथा कम लागत वाले चालू और बचत खातों का भंडार यानी कासा।

दिसंबर में अधिकांश बैंकों के एनआईएम में तिमाही आधार पर इजाफा हुआ हालांकि कई मामलों में यह इजाफा मामूली रहा। हालांकि सालाना आधार पर देखें तो कुछ को छोड़कर लगभग सभी के एनआईएम में गिरावट आई। येस बैंक लिमिटेड, फेडरल बैंक लिमिटेड, धनलक्ष्मी बैंक और तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक ने सालाना और तिमाही दोनों आधारों पर एनआईएम में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की।

निजी बैंकों के समूह का एनआईएम सरकारी बैंकों से अधिक रहा। दिसंबर में केवल चार सरकारी बैंकों का एनआईएम 3 फीसदी से अधिक था। ये थे बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी), यूको बैंक और इंडियन बैंक। इसके विपरीत, तीन को छोड़कर सभी निजी बैंकों का एनआईएम 3 फीसदी से अधिक रहा। बंधन बैंक लिमिटेड इस समूह में सबसे आगे रहा (5.9 फीसदी), इसके बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड (5.76 फीसदी) का स्थान रहा। आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आरबीएल बैंक लिमिटेड और तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक का एनआईएम 4 फीसदी से अधिक था।

कासा के संदर्भ में, अधिक बैंकों ने वृद्धि की तुलना में गिरावट दर्ज की। ऐतिहासिक रूप से, सरकारी बैंक निजी बैंकों की तुलना में अधिक कासा का आनंद लेते हैं, और यह प्रवृत्ति जारी है। कुल मिलाकर, दिसंबर में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का कासा सबसे अधिक रहा (51.6 फीसदी), इसके बाद बैंक ऑफ महाराष्ट्र (49.54 फीसदी), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (47.13 फीसदी), आईडीबीआई बैंक (44.6 फीसदी), जे ऐंड के बैंक (44.1 फीसदी), कोटक महिंद्रा बैंक (41.3 फीसदी) और आईओबी (40.8 फीसदी) का स्थान रहा। अन्य कोई भी बैंक 40 फीसदी तक नहीं पहुंचा।

एनआईएम और कासा को अलग-अलग देखने से किसी बैंक की परिचालन दक्षता की पूरी तस्वीर नहीं मिलती। उदाहरण के लिए, असुरक्षित ऋण हमेशा सुरक्षित ऋणों की तुलना में अधिक रिटर्न देते हैं, लेकिन वे खराब परिसंपत्तियां बनने का जोखिम भी रखते हैं। इसी तरह, कोई बैंक बचत खातों पर 2.5 फीसदी ब्याज दे रहा है, तो कोई 6 फीसदी या उससे अधिक दे रहा है। कुछ बैंक मासिक ब्याज भुगतान की पेशकश कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे तिमाही आधार पर देते हैं। इसी तरह, चालू खातों में रखी गई राशि पर आमतौर पर कोई ब्याज नहीं मिलता।

पहली बार, उद्योग ने एक तिमाही में 1 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ पार किया। दिसंबर तिमाही में सूचीबद्ध बैंकों का कुल शुद्ध लाभ 1,00,056 करोड़ रुपये रहा जो सालाना आधार पर 10.67 फीसदी और तिमाही आधार पर 3.8 फीसदी अधिक था। 30 सूचीबद्ध बैंकों में से केवल तीन यानी एसबीआई, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ने उद्योग के लाभ में कम से कम 50 फीसदी का योगदान दिया! यदि इसमें अन्य पांच (ऐक्सिस बैंक, केनरा बैंक, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया) को जोड़ दिया जाए, तो आठ बैंकों ने शुद्ध लाभ में लगभग 76 फीसदी योगदान किया।

सरकारी बैंकों का प्रदर्शन निजी बैंकों से बेहतर रहा और उन्होंने सालाना आधार पर 18.28 फीसदी और तिमाही आधार पर 6.37 फीसदी वृद्धि हासिल की। निजी बैंकों में यह क्रमश: 3.29 फीसदी और 0.85 फीसदी रही। सरकारी बैंकों का शुद्ध लाभ भी निजी बैंकों से बेहतर रहा।

विशुद्ध ब्याज आय यानी एनआईआई जो बैंकों के मुनाफे का मुख्य जरिया है वह 2.18 लाख करोड़ रुपये के साथ सालाना आधार पर 4.79 फीसदी और तिमाही आधार पर 3.78 फीसदी अधिक रहा। इस मानक पर निजी और सरकारी दोनों बैंक एक ही स्तर पर हैं। परंतु अन्य आय के मामले में सरकारी बैंक बेहतर हैं।

शुद्ध लाभ में योगदान देने वाला एक अन्य कारक फंसे कर्जों के लिए कम प्रावधान रहा। यह तिमाही आधार पर लगभग 7 फीसदी घटा, लेकिन सालाना लगभग 15 फीसदी बढ़ा। बैंकिंग क्षेत्र का अच्छा प्रदर्शन जारी है, और सरकारी बैंकों में निजी बैंकों से बेहतर प्रदर्शन की आदत बन गई है।

दरों में कटौती चक्र समाप्त हो चुका है, और बैंकिंग उद्योग की जमा वृद्धि ऋण वृद्धि से पीछे है (31 जनवरी तक सालाना आधार पर 12.5 फीसदी बनाम 14.6 फीसदी)। अब सबकी नजर इस पर होगी कि बैंक अपनी देनदारियों का प्रबंधन कैसे करते हैं और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए अपनी बैलेंस शीट को लाभकारी तरीके से कैसे बढ़ाते हैं।

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First Published - February 26, 2026 | 9:23 PM IST

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