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नॉर्वे के फंड ने कर के लिए 1.7 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किए

Last Updated- December 12, 2022 | 5:17 AM IST

दुनिया में सबसे बड़े नॉर्वेजियाई सॉवरिन वेल्थ फंड ने भारत में अपने निवेश के जरिये हुए लाभ पर कर चुकाने के लिए बड़ी राशि निर्धारित की है।
सॉवरिन फंड के ताजा सालाना खुलासे में कहा गया है, ‘वर्ष 2019 से, फंड ने भारत में पूंजीगत लाभ से संबंधित आगामी कर देनदारियों के लिए प्रावधान किया। इससे 2020 में वित्तीय परिणाम में 184.4 करोड़ क्रोनेर तक की कमी आई।’ यह ताजा विनियम दर के हिसाब से करीब 1,670 करोड़ रुपये है।
उसकी भारतीय होल्डिंग की कुल वैल्यू 89,801.6 करोड़ रुपये है। फंड ने उन 317 कंपनियों में निवेश कर रखा है जो भारत में स्थापित की गई हैं। उसके द्वारा निवेश से जुड़े क्षेत्रों में उद्योग मुख्य मैटेरियल, वित्त, यूटीलिटीज, उपभोक्ता वस्तु, हेल्थकेयर, कंज्यूमर सर्विस, तेल एवं गैस, दूरसंचार और प्रौद्योगिकी मुख्य रूप से शामिल हैं।
यह स्पष्ट नहीं है कि क्या प्रावधान उसके द्वारा पहले ही दर्ज किए गए मुनाफे के लिए है और  इसका इस्तेमाल कर चुकाने में किया जाना है, या उन निवेश पर पूंजीगत लाभ पर कर के लिए है, जिनसे वह अभी बाहर नहीं निकला है। सरकार ने वर्ष 2018 में शेयर बाजार निवेश पर 10 प्रतिशत का पूंजीगत लाभ कर लगाया था।
फंड का सबसे बड़ा निवेश रिलायंस इंडस्ट्रीज (9,361.2 करोड़ रुपये) में है। इसके बाद इन्फोसिस (5,922.2 करोड़ रुपये) और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनैंस कॉरपोरेशन (4,873.8 करोड़ रुपये) में है।
वर्ष 2020 के अंत में, उसकी इक्विटी होल्डिंग में वित्तीय क्षेत्र का योगदान 25.3 प्रतिशत था। इसके बाद प्रौद्योगिकी (15.2 प्रतिशत) और उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र (14.9 प्रतिशत) योगदान रहा। इस सूची में चौथे स्थान पर तेल एवं गैस क्षेत्र रहा। कुल इक्विटी होल्डिंग में तेल एवं गैस क्षेत्र का योगदान 12.6 प्रतिशत था और 2019 में उसके 10.7 प्रतिशत के मुकाबले यह ज्यादा था।

First Published - May 1, 2021 | 12:07 AM IST

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