facebookmetapixel
Advertisement
उत्तर प्रदेश में बिजली लाइन लॉस घटा, बकाया वसूली में भी तेजी; अभियान से ₹654 करोड़ जुटाएपर्पल स्टाइल लाएगी ₹660 करोड़ का IPO, शाहरुख-सचिन और माधुरी दीक्षित समेत इन सेलिब्रिटीज के लगे हैं पैसेएयरटेल के प्रीपेड प्लान में बदलाव, ARPU में 4 से 12 रुपये तक की वृद्धि संभवसोने-चांदी में तेजी के संकेत, अगले हफ्ते कहां तक जाएंगे भाव?Explainer: म्युचुअल फंड में ₹3,811 करोड़ अनक्लेम्ड, कहीं आपका पैसा तो नहीं? ऐसे करें चेक और क्लेमइस हफ्ते खुलेंगे 8 नए IPOs, ₹5,499 करोड़ से ज्यादा जुटाएंगी कंपनियांशेयर बाजार की इस हफ्ते कैसी रहेगी चाल? अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल और फेड के फैसले पर टिकी नजरेंभारतीय शेयर बाजार में फिर बढ़ा विदेशी निवेशकों का भरोसा, अगस्त में अब तक लगाए 16,621 करोड़ रुपयेशेयर बाजार में मंदी की मार, टॉप-5 कंपनियों के ₹1 लाख करोड़ स्वाहा; TCS को लगा सबसे बड़ा झटकापश्चिम एशिया संकट से सरकार ने लिया सबक, LPG उत्पादन के लिए 21 रिफाइनरियों को दिए नए टारगेट

बाजार में रिकॉर्ड निवेश! DIIs ने ₹7.1 लाख करोड़ लगाए, FPIs की सेलिंग को दिया करारा जवाब

Advertisement

घर के निवेशक म्यूचुअल फंड्स के जरिए बाजार में भारी रकम लगा रहे हैं, FPIs की बिक्री का असर अब कम।

Last Updated- August 25, 2025 | 3:33 PM IST
AUM growth of mutual funds remained strong amid slowdown, raised Rs 68.6 lakh crore सुस्ती के बीच मजबूत रही म्युचुअल फंडों की AUM ग्रोथ, जुटाए 68.6 लाख करोड़ रुपये

देश के शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs), खासकर म्युचुअल फंड्स, रिकॉर्ड स्तर पर निवेश कर रहे हैं। पिछले 12 महीनों यानी हाल के 250 ट्रेडिंग सेशन्स में DIIs ने घरेलू शेयरों में कुल 7.1 लाख करोड़ रुपये लगाये हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसमें से लगभग तीन-चौथाई यानी 5.3 लाख करोड़ रुपये म्युचुअल फंड्स ने निवेश किया।

SIPs के बढ़ते चलन से मजबूती

इस निवेश में तेजी का मुख्य कारण सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (SIPs) की लोकप्रियता है। इक्विटी म्युचुअल फंड्स में SIP के जरिए घरेलू निवेशक लगातार बचत का एक हिस्सा शेयर बाजार में लगा रहे हैं। इस वजह से DIIs विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिक्री से पैदा होने वाली उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

विदेशी निवेशकों के भारी निकासी का असर कम

जुलाई से FPIs ने भारतीय शेयरों से 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल लिए हैं। लेकिन DIIs के मजबूत निवेश ने इस भारी बिक्री के प्रभाव को कम कर दिया है। ICICI Securities के अनुसार, DIIs की यह ‘काउंटर-बायिंग’ पिछले किसी भी विदेशी बिक्री के मुकाबले बहुत बड़ी रही है। ICICI के इक्विटी रणनीतिकार विनोद कार्की के अनुसार, “DIIs द्वारा FPI बिक्री के खिलाफ की गई खरीदारी किसी भी पहले की घटना से कहीं ज्यादा है, चाहे वह 2008 का ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस हो या 2022 में ब्याज दर बढ़ने की वजह से हुई बिक्री।”

बाजार पर दबाव

हालांकि घरेलू निवेशकों का समर्थन मजबूत है, लगातार FPI निकासी ने बाजार पर दबाव डाला है। पिछले 12 महीनों में लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप इंडेक्स में लगभग फ्लैट या नकारात्मक रिटर्न रहे।

Q1 FY26 में अलग ट्रेंड

दिलचस्प बात यह है कि जुलाई में FPI बिक्री से पहले, जून तिमाही (Q1 FY26) में DIIs और FPIs दोनों नेट खरीदार थे। ICICI Securities के अनुसार, ये खरीदारी प्रमोशंस, व्यक्तिगत निवेशकों (सिर्फ स्मॉल-कैप को छोड़कर) और कुछ विदेशी डायरेक्ट निवेशकों की बिक्री से लगभग संतुलित हो गई थी।

Advertisement
First Published - August 25, 2025 | 3:33 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement