Budget 2026: यूनियन बजट 2026 के नजदीक आते ही म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की नजर टैक्स सुधारों पर टिक गई है। मकसद है रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना और लंबे समय के लिए निवेश को प्रोत्साहित करना। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कैपिटल गेन टैक्स में कमी और स्थिर टैक्स नीतियां निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
VSRK Capital के डायरेक्टर स्वप्निल अग्रवाल ने कहा कि बजट से हमारी उम्मीदें टैक्स सुधारों पर केंद्रित हैं, ताकि म्युचुअल फंड के माध्यम से लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने कहा, “अगर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) 12.5 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (STCG) लगभग 15 फीसदी कर दिया जाए, तो निवेशकों को ज्यादा फायदा मिलेगा और वे लगातार निवेश करते रहेंगे।”
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टैक्स से जुड़े नियम हमेशा से ही निवेशकों के लिए सबसे अहम पहलू रहे हैं, क्योंकि ये तय करते हैं कि उनका निवेश कितना फायदेमंद होगा। सही टैक्स नीतियां न सिर्फ पोस्ट-टैक्स रिटर्न बढ़ाती हैं, बल्कि निवेशकों को लंबे समय तक निवेश जारी रखने के लिए भी प्रोत्साहित करती हैं।
पिछले साल के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत दी थी। इसके तहत 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री कर दिया गया, जिससे निवेशकों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ी है और लॉन्ग टर्म बचत व सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को सपोर्ट दिया है।
अगर आगे और कर प्रोत्साहन मिलते हैं, तो इससे सिस्टमैटिक इन्वेस्टिंग और रिटायरमेंट-फोकस्ड प्रोडक्ट्स पर पॉजिटिव असर पड़ सकता है। यह SIP में भागीदारी बढ़ाने और निवेशकों को लंबे समय तक निवेश करने के लिए प्रेरित करने में मदद करेगा।
साल 2025 में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव बाजार पर बना रहा। पूरे साल के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने करीब 1.51 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की। ऐसे में आने वाले बजट में विदेशी निवेशकों का भरोसा दोबारा लौटाने और उनकी बाजार में वापसी पर भी खास फोकस रहने की उम्मीद है।
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एविसा वेल्थ क्रिएटर्स के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) आदित्य अग्रवाल कहते हैं, “बजट 2026 के वित्तीय बाजारों के लिए निर्णायक रहने की उम्मीद है, जिसमें स्थिरता और टैक्स समानता पर जोर होगा। निवेशकों की धारणा मजबूत करने के लिए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को 10 फीसदी तक घटाने और विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को वापस लेने जैसे कदमों की उम्मीद है।”
इसके अलावा, इंडस्ट्री चाहती है कि डेट और दूसरे निवेश प्रोडक्ट्स पर टैक्स को भी इक्विटी जैसा सरल और कम किया जाए। अभी इन पर टैक्स बहुत ज्यादा लगता है, जो कई बार 40 फीसदी से भी ऊपर चला जाता है। टैक्स में राहत मिलने से सुरक्षित निवेश करने वाले लोगों और लंबे समय की बचत को बढ़ावा मिल सकता है।
वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और टैरिफ के दबाव के बीच, इस बार के बजट में मैन्युफैक्चरिंग को रफ्तार देने और खपत बढ़ाने पर पहले से कहीं ज्यादा जोर दिए जाने की उम्मीद है।
बर्टेल्समैन इंडिया इन्वेस्टमेंट्स के चीफ फाइनैंशियल ऑफिसर जयेश बावले कहते हैं, “इस सरकार के बजट की एक बड़ी खासियत इसके फोकस एरिया में निरंतरता रही है, और हमें उम्मीद है कि बजट 2026 भी इसी दिशा में आगे बढ़ेगा। वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के मौजूदा माहौल में घरेलू उत्पादन और खपत को मजबूत करना पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गया है। वर्तमान में कम महंगाई और नियंत्रित राजकोषीय घाटे जैसे पॉजिटिव मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर सरकार को इस बजट में खपत बढ़ाने वाले कदम उठाने का सही मौका प्रदान करते हैं।”
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कैनरा रोबेको एएमसी के सीआईओ– इक्विटी, श्रीदत्ता भंडवालदार ने कहा, “बजट से हमारी उम्मीदें सीमित हैं। भले ही पिछले बजटों ने बाजारों में उत्साह पैदा किया हो, लेकिन टैक्स या रणनीति में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है। लाइफ इंश्योरेंस और म्युचुअल फंड टैक्सेशन समेत अधिकतर सेक्टर-स्पेसिफिक बदलाव पहले ही किए जा चुके हैं। मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए हमें लगता है कि डिफेंस कैपेक्स में बढ़ोतरी हो सकती है।”
उन्होंने आगे कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि सरकार कड़े वित्तीय सख्ती से बचे। कमजोर मांग, निजी निवेश में सुस्ती और घरेलू आय में ठहराव के बीच सरकारी खर्च बेहद अहम बना हुआ है। हालांकि, कम टैक्स कलेक्शन की भरपाई के लिए डिवेस्टमेंट टारगेट बढ़ाए जा सकते हैं। पिछला बजट खपत और रेवेन्यू खर्च की ओर झुकाव दिखाता था, और इस बार के बजट में किसी अतिरिक्त सख्ती से बचना चाहिए।
बावले कहते हैं कि टैक्स के लिहाज से, हमें किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है और नए आयकर अधिनियम की दिशा में उठाए गए कदम का हम स्वागत करते हैं। इसके सरल और संक्षिप्त ढांचे को देखते हुए, इसके तहत बनने वाले नियम बेहद अहम होंगे। हम चाहते हैं कि नियमों में अधिक स्पष्टता हो, ताकि इसका प्रभावी क्रियान्वयन और अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
म्युचुअल फंड इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्थिर कर नीतियां, साथ ही निवेशक शिक्षा पर लगातार ध्यान और छोटे शहरों तक पहुंच बढ़ाने से निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। इससे मेट्रो शहरों से बाहर भी म्युचुअल फंड की पहुंच बढ़ेगी और लंबी अवधि व एसेट एलोकेशन आधारित प्रोडक्ट्स में इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ने और SIP की रफ्तार तेज होने के बीच, म्युचुअल फंड सेक्टर बजट 2026 पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि इससे आने वाले वर्षों में निवेश के रुझान तय हो सकते हैं।