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निजी बैंकों से दूरी बना रहे फंड प्रबंधक

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Last Updated- December 15, 2022 | 7:49 AM IST

निजी क्षेत्र के बैंकों को लेकर घरेलू म्युचुअल फंड (एमएफ) प्रबंधकों का लगाव हमेशा बरकरार रहा है। शेयर बाजार में फंडों द्वारा लगाई जाने वाली रकम का 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सा निजी क्षेत्र के बैंकों में जाता है। लेकिन अब कई बड़े फंड प्रबंधक इस क्षेत्र से अपनी उम्मीदें घटा रहे हैं।
मई में निजी बैंकों में इक्विटी एमफ निवेश 20 महीने के निचले स्तर पर रह गया। यह निवेश उनकी कुल प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) का 16.7 प्रतिशत था। मोतीलाल ओसवाल रिसर्च द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल अब तक (वाईटीडी) के आधार इस भारांक में करीब 440 आधार अंक की कमी दर्ज की गई है।
हालांकि बैंकिंग और वित्त ऐसा क्षेत्र बना हुआ है जिसमें ज्यादा एमएफ परिसंपत्तियों का निवेश हुआ है , लेकिन इस क्षेत्र पर फंड हाउसों की निर्भरता इस साल काफी घटी है, जबकि फार्मास्युटिकल, वाहन, और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में फंडों का भारांक बढ़ा है।
हालांकि बैंकिंग शेयरों में हाल के सप्ताहों के दोरान अच्छी तेजी देखी गई है, लेकिन वे वाईटीडी के आधाार पर पीछे बने हुए हैं। 2020 में बीएसई बैंकेक्स और निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक दोनों 34 फीसदी नीचे आए हैं। तुलनात्मक तौर पर सेंसेक्स में 15 फीसदी की कमी आई है।
इस कमजोरी में काफी हद तक बैंकिंग सेक्टर के निवेश में आई कमी की भी योगदान है। इक्विनॉमिक्स के संस्थापक एवं सीआईओ जी चोकालिंगम का कहना है, ‘हाल के वर्षों में पहली बार, बैंकिंग उद्योग दबाव की स्थिति से गुजर रहा है। क्रेडिट 6 फीसदी की दर से बढ़ रहा है, लेकिन इसमें राहत पैकेज का योगदान है। दूसरा, ईएमआई स्थगन की वजह से, फंसे कर्ज बढ़ेंगे। बुनियादी आधार में बदलाव से निजी बैंकों से दूरी बढ़ रही है। साथ ही, अन्य क्षेत्रों में भी अवसर हैं। फार्मा और हेल्थकेयर महत्वपूर्ण हैं, जिनकी मौजूदा कोविड-19 अवधि के दौरान मांग बढ़ी रही है। आपको अगले तीन से छह महीनों में निजी क्षेत्र के बैंकों को लेकर काफी सतर्क रहना होगा।’ मौजूदा समय में बैंकिंग क्षेत्र का अर्थव्यवस्था से मजबूत संंबंध होने की वजह से कई निवेशक इन शेयरों में निवेश से परहेज कर रहे हैं। चूंकि इस वित्त वर्ष अर्थव्यवस्था पर दबाव बढऩे की आशंका है, इसलिए बैंक और वित्तीय शेयर प्रभावित हो सकते हैं।
चोकालिंगम का कहना है, ‘जब अर्थव्यवस्था दबाव के दौर से गुजरती है तो बैंकिंग सेक्टर वृद्घि और परिसंपत्ति गुणवत्ता के संदर्भ में प्रभावित होता है।’
कुल मिलाकर, बैंकिंग निवेश मई में घटकर 18.7 फीसदी रह गया, जो साल के शुरू में 25.3 फीसदी था। इसी तरह, वित्तीय शेयरों में निवेश समान अवधि के दौरान 10.24 फीसदी से घटकर 8.81 फीसदी रह गया।

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First Published - June 29, 2020 | 12:57 AM IST

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