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टी+वन से एफपीआई चिंतित

Last Updated- December 11, 2022 | 6:46 PM IST

वैश्विक निवेशकों के साथ साथ ब्रोकरों, कस्टोडियन और क्लियरिंग कंपनियों को संक्षिप्त कारोबार निपटान चक्र पर अमल को लेकर अभी भी कई तरह की समस्याएं दिख रही हैं।
कई उद्योग जानकारों का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को कारोबार पुष्टि की समय-सीमा, फॉरेक्स बुकिंग और प्री-फंडिंग जरूरत को लेकर चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि इससे समस्या तब बढ़ सकती है जब अगले साल से नई टी+1 निपटान व्यवस्था पर पूरी तरह से अमल शुरू हो जाएगा।
फरवरी 2022 से, कम बाजार वैल्यू वाले 500 शेयर संक्षिप्त टी+1 निपटान चक्र वाली व्यवस्था में शामिल किए जा रहे हैं। उन शीर्ष-200 शेयरों को जनवरी 2023 से इस नई व्यवस्था में शामिल किया जाएगा, जिनमें एफपीआई अपनी परिसंपत्तियां बड़ी तादाद में लगा रखी हैं। हालांकि  एफपीआई शेयरधारिता वाले कुछ शेयर अगले महीने टी+1 में शामिल होंगे।
टी का मतलब कारोबारी दिन है। मौजूदा समय में निपटान काफी हद तक टी+2 आधार पर होता है।
उद्योग कारोबारियों का कहना है कि एफपीआई अपने सौदों की पुष्टि टी+1 वाले दिन चाहते हैं। सेबी और स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा जारी समय-सीमा के तहत कारोबार की पुष्टि कारोबार के दिन शाम 7.30 बजे संभव होगी।
समान दिन ‘ट्रेड कन्फर्मेशन’ यानी कारोबार की पुष्टि सुनिश्चित करने के लिए, एफपीआई को पहले से ही कोष और विदेशी मुद्रा की व्यवस्था बनाए रखनी होगी। इससे ट्रेडिंग की लागत बढ़ जाएगी, क्योंकि एफपीआई कारोबार पुष्टि हासिल होने के बाद ही कोष और फॉरेक्स की व्यवस्था पसंद करते हैं।
उद्योग के जानकारों का कहना है कि एफपीआई यह उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें अगले दिन सुबह अपने कारोबार की पुष्टि की अनुमति मिल जाएगी। हालांकि इससे ब्रोकरों के लिए समस्या पैदा हो जाएगी, क्योंकि आरबीआई उन्हें इंट्रा-डे फंडिंग बढ़ाने के लिए 50 प्रतिशत कॉलेटरल चाहता है।
एक अधिकारी ने कहा, ‘एफपीआई कारोबार की पुष्टि टी+1 की सुबह चाहेंगे। यदि सेबी इस पर सहमत होता है तो उन्हें खुशी होगी। हालांकि ब्रोकरों को यह बदलाव पसंद नहीं आएगा, क्योंकि इससे उनके लिए व्यवसाय करने का खर्च बढ़ जाएगा। आरबीआई के ताजा आदेश के बाद, यह अव्यवहार्य भी हो सकता है। इंट्रा-डे कारोबार के संदर्भ में बैंकों को 50 प्रतिशत कॉलेटरल की व्यवस्था करनी होगी।’ उद्योग के कारोबारियों का कहना है कि कई ब्रोकरों के पास बड़े कॉलेटरल मुहैया कराने के लिए पर्याप्त बैलेंस शीट नहीं भी हो सकती है।
सूत्रों ने कहा कि एफपीआई उद्योग की संस्था असिफमा ने इन समस्याओं को दूर करने के लिए बाजार नियामक सेबी और विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत की है। असिफमा के अधिकारी ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

First Published - May 24, 2022 | 12:47 AM IST

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