facebookmetapixel
Advertisement
ऑटो सेक्टर को PLI स्कीम के तहत FY27 में ₹4,700 करोड़ देगी सरकार, निवेश बढ़ाने की तैयारी तेजटाटा कैपिटल का रिवॉल्विंग क्रेडिट एक्सपोजर 5% से कम, RBI के नए प्रस्ताव से कंपनी पर पड़ेगा सीमित असररूस से तेल खरीद पर 100% अमेरिकी टैरिफ की धमकी, भारत-अमेरिका वार्ता में बढ़ सकता है दबाव‘ग्रामीण भारत तक पहुंचे बैंकिंग AI, तभी असली सफलता होगी हासिल’, SBI चेयरमैन सीएस शेट्टी की सलाहपांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट तेज, भाजपा-सपा-कांग्रेस-बसपा समेत दलों ने कसी कमरBrand Canvas 2026: VIT की ‘पावर रेंजर्स’ ने जीता बीस्मार्ट की पहली विज्ञापन प्रतियोगिता का खिताबY2K से AI के दौर तक: 1991 के आर्थिक सुधारों ने कैसे बदल डाली भारतीय IT इंडस्ट्री की पूरी तस्वीरअमेरिका में क्रिप्टो बिल से भारत पर बढ़ा दबाव, ससंदीय समिति ने VDA कानून बनाने की मांग कीनई मर्सिडीज-BMW हुई मंहगी तो पुरानी लक्जरी कारों की बिक्री में आया उछाल, युवा खरीदारों की बनी पसंद‘जिम्मेदारी से करें AI का इस्तेमाल, हर फैसले के लिए आप होंगे जवाबदेह’, RBI गवर्नर ने दी बैंकों को हिदायत

डेली फंड ट्रांसफर से शेयर ब्रोकरों पर पड़ेगा दबाव

Advertisement
Last Updated- February 07, 2023 | 12:24 PM IST
NIIF launches $600 million India-Japan fund

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने स्टॉक ब्रोकरों से ​क्लियरिंग संस्थानों (सीसी) के बीच सभी निवेशक कोष के दैनिक स्थानांतरण को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा है। ग्राहक कोष के साथ जो​खिम घटाने के मकसद से उठाए जाने वाले इस कदम से ब्रोकरों का राजस्व प्रभावित होगा, क्योंकि उन्हें दैनिक तौर पर स्थानांतरण से ब्याज आय हासिल नहीं होगी।

मौजूदा समय में, शेयर ब्रोकर अतिरिक्त पैसे को बैंक गारंटी (बीजी) या फिक्स्ड डिपोजिट रिसीप्ट (एफडीआर) में तब्दील कर उससे अतिरिक्त आय कमाते हैं। यदि इस अतिरिक्त कोष को सीसी के लिए रोजाना स्थानांतरित किया जाएगा तो शेयर ब्रोकरों को यह कमाई करने का मौका नहीं मिलेगा।

ब्रोकरों की संस्था एसोसिएशन ऑफ नैशनल एक्सचेंजेस मेंबर्स ऑफ इंडिया के अध्यक्ष कमलेश शाह ने कहा, ‘सीसी इस कोष का इस्तेमाल करेंगे और इस पर ब्याज हासिल करेंगे। ब्रोकर ग्राहक कोष की एफडी/बीजी में तब्दील नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उन्हें यह पैसा मिलते ही सीसी को स्थानांतरित करने की जरूरत होगी।’

ब्रोकरों का मानना है कि प्रस्तावित नियमों से लेनदेन लागत बढ़ेगी, जिससे परिचालन संबं​धित समस्याओं और अनुपालन बोझ में इजाफा होगा। शेयर ब्रोकर दिन के अंत में सीसी को यह कोष स्थानांतरित करने से पहले संबद्ध ब्रोकरेज और अन्य शुल्क काटेंगे।  सूचीबद्ध शेयर ब्रोकरों के पिछली तिमाही परिणामों के विश्लेषण से पता चलता है कि कुछ कंपनियों के मामले में ब्याज करीब 30 प्रतिशत पर थी।

यह भी पढ़ें: Adani Group stocks: अदाणी समूह की कंपनियों का कंबाइंड मार्केट कैप हुआ आधा

विश्लेषकों का कहना है कि अन्य शेयर ब्रोकरों के लिए ब्याज आय कुल राजस्व के 20 प्रतिशत के आसपास हो सकती है। 6 जनवरी को हुए पिछले तिमाही खाता निपटान के अनुसार, निवेशकों के करीब 46,000 करोड़ रुपये ब्रोकरों और सीसी के पास पड़े हुए थे। सेबी का मानना है कि अन्य दिनों के दौरान यह रा​शि अ​धिक भी हो सकती है।

Advertisement
First Published - February 6, 2023 | 10:09 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement