चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (3QFY26) में सीमेंट कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है। मांग में सुधार और लागत में राहत के चलते इस तिमाही में सीमेंट कंपनियों की आमदनी और मुनाफे में अच्छी बढ़त देखी जा सकती है। ब्रोकरेज अनुमानों के मुताबिक, इस दौरान सीमेंट सेक्टर के नतीजे मजबूत रह सकते हैं।
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल का अनुमान है कि सीमेंट कंपनियों की आमदनी में सालाना आधार पर करीब 19 फीसदी, EBITDA में 42 फीसदी और शुद्ध मुनाफे (PAT) में 65 फीसदी की बढ़त हो सकती है। इस तिमाही में कुल सीमेंट बिक्री मात्रा करीब 17 फीसदी बढ़कर 108 मिलियन टन रहने की उम्मीद है। हालांकि, समान आधार (लाइक-टू-लाइक) पर वॉल्यूम ग्रोथ करीब 13 फीसदी रह सकती है।
दिसंबर तिमाही के दौरान सीमेंट की कीमतों पर दबाव बना रहा और ज्यादातर क्षेत्रों में दाम घटे। पूर्वी और दक्षिणी भारत में कीमतों में ज्यादा गिरावट देखी गई, जबकि पश्चिम, उत्तर और मध्य भारत में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही। GST दर में कटौती के बाद नॉन-ट्रेड सेगमेंट में कीमतों में तेज सुधार देखा गया, जबकि ट्रेड सेगमेंट की कीमतें ज्यादा नहीं बदलीं। नवंबर–दिसंबर में मांग सुधरने के बाद कुछ बाजारों में कीमतें बढ़ाने की कोशिश सफल भी रही।
रिपोर्ट के अनुसार, तिमाही की शुरुआत में त्योहारों और मजदूरों की कमी के चलते सीमेंट की मांग कमजोर रही। हालांकि, नवंबर के अंत से मांग में सुधार आया और दिसंबर में यह मजबूत बनी रही। दक्षिण और पश्चिम भारत में सरकारी खर्च बढ़ने से नॉन-ट्रेड सेगमेंट की मांग में अच्छी तेजी देखने को मिली, जबकि उत्तर और मध्य भारत में मांग अभी भी सीमित रही।
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ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रासिम की आमदनी में सालाना आधार पर करीब 20 फीसदी की बढ़त हो सकती है। VSF बिजनेस की बिक्री मात्रा लगभग स्थिर रह सकती है, लेकिन कीमतों में करीब 6 फीसदी की बढ़ोतरी संभव है। केमिकल बिजनेस में भी मामूली बढ़त का अनुमान है। ओपस और बिरला पिवट जैसे हाई-ग्रोथ बिजनेस से कंपनी की आमदनी में तेज इजाफा हो सकता है। ग्रासिम का नेट लॉस घटकर करीब 130 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है।
अनुमान के मुताबिक, अल्ट्राटेक सीमेंट की बिक्री मात्रा में करीब 21 फीसदी की बढ़त हो सकती है, जबकि समान आधार पर यह करीब 13 फीसदी रहेगी। JK सीमेंट का वॉल्यूम करीब 14 फीसदी बढ़ सकता है। अंबुजा सीमेंट की कुल बिक्री मात्रा में करीब 13 फीसदी की बढ़त का अनुमान है। इसके अलावा ACC, डालमिया भारत, बिरला कॉर्प, श्री सीमेंट और अन्य कंपनियों में भी मध्यम स्तर की ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
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फ्रेट, कर्मचारियों और अन्य खर्चों में कमी आने से प्रति टन लागत में करीब 2 फीसदी की गिरावट हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमतों में नरमी से कंपनियों को राहत मिली है, हालांकि पेटकोक की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है। इसके चलते सीमेंट कंपनियों का औसत EBITDA प्रति टन बढ़कर करीब 890 रुपये रहने का अनुमान है।
आने वाली मार्च तिमाही में निर्माण का काम ज्यादा रहेगा। इससे सीमेंट की मांग अच्छी बनी रह सकती है और कंपनियां दाम बढ़ाने की कोशिश भी कर सकती हैं। लेकिन आने वाले कुछ सालों में कई नई सीमेंट फैक्ट्रियां शुरू होंगी, इसलिए सीमेंट के दाम ज्यादा समय तक बढ़े रहने की उम्मीद कम है। इस रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने बड़ी कंपनियों में अल्ट्राटेक सीमेंट को बेहतर बताया है। वहीं, मिड-कैप कंपनियों में JK सीमेंट और डालमिया भारत को पसंद किया है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।