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विदेशी बाजारों की सुस्ती से ऑटो कलपुर्जा कंपनियों पर दबाव

व्यापार बाधाओं व विदेशी बाजारों में नरमी के कारण इन कंपनियों के पास बहुत कम गुंजाइश बची हुई है

Last Updated- December 15, 2025 | 7:11 AM IST
Global headwinds may hit growth prospects of auto parts suppliers
Representative Image

वाहन कलपुर्जा निर्माताओं के शेयरों पर दबाव पड़ने की आशंका है। इनकी अधिकांश आय प्रमुख विदेशी बाजारों से आती है। यह दबाव मांग में कमजोरी, टैरिफ पर अनिश्चितता, मार्जिन पर दबाव और अत्यधिक मूल्यांकन के कारण हो सकता है।

भारत फोर्ज, संवर्धन मदरसन इंटरनैशनल (सामिल), सोना बीएलडब्ल्यू प्रीसिजन फोर्जिंग्स (सोना कॉमस्टार) और बालकृष्ण इंडस्ट्रीज को इसका सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है क्योंकि उनके राजस्व का कम से कम 55 फीसदी वैश्विक बाजारों से आता है। इन शेयरों का प्रदर्शन व्यापक बाजार क्षेत्र से पिछड़ गया है। पिछले छह महीनों और एक वर्ष में इनका औसत रिटर्न क्रमशः 4.5 फीसदी और -6 फीसदी यानी घाटा रहा है जबकि निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने इसी अवधि में क्रमशः 19 फीसदी और 17 फीसदी का लाभ अर्जित किया है।

बाजार की मुख्य चिंता प्रमुख बाजारों में कमजोर मांग है। वाहन निर्माताओं ने भी इसी तरह की बात कही है। अधिकांश वैश्विक यात्री वाहन (पीवी) निर्माता कैलेंडर वर्ष 2024 की तुलना में कैलेंडर वर्ष 2025 में राजस्व और बिक्री में  सपाट या कम वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। भारी ट्रकों, विशेष रूप से उत्तरी अमेरिका में, को लेकर दृष्टिकोण ज्यादा निराशाजनक है।

जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान उत्तरी अमेरिका में क्लास 8 ट्रकों की खुदरा बिक्री में पिछले साल की तुलना में 20 फीसदी की गिरावट आई। क्लास 8 ट्रक फेडरल हाईवे एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा परिभाषित 33,000 पाउंड से अधिक सकल वाहन भार वाले सबसे भारी श्रेणी के ट्रक हैं। इसके विपरीत यूरोप में भारी वाणिज्यिक वाहनों (सीवी) की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 5 फीसदी की वृद्धि हुई।

वोल्वो, डैमलर और पैकर जैसी प्रमुख ट्रक निर्माता कंपनियों को उम्मीद है कि वर्ष 2025 कमजोर रहेगा, जिसमें उत्तरी अमेरिका में 19 फीसदी और यूरोपीय संघ (ईयू) में 14 फीसदी तक की गिरावट का अनुमान है। वर्ष 2026 में मिलेजुले परिणामों की उम्मीद है: उत्तरी अमेरिका में करीब 6 फीसदी की गिरावट की भरपाई यूरोपीय संघ में 2 फीसदी की वृद्धि से होगी।

रघुनंदन एन एल की अगुआई में नुवामा इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का कहना है कि यूरोपीय संघ का ट्रक बाजार प्रतिस्थापन आधारित बना हुआ है और रक्षा खर्च से 2026 से मांग में वृद्धि की संभावना है। इसके विपरीत, उत्तरी अमेरिका में लंबी दूरी की माल ढुलाई में गिरावट जारी है, जिसका कारण कम वॉल्यूम और अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के 2027 के मानदंडों और शुल्कों को लेकर ग्राहकों की सतर्कता है।

कई ब्रोकरेज फर्मों को उत्तरी अमेरिकी ऑटो बाजार में कमजोरी की आशंका है। कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार टैरिफ के कारण कीमत को लेकर मुद्रास्फीति, उधारी की ऊंची लागत और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग में बदलाव के कारण हल्के वाहनों की मांग में नरमी की संभावना है।

कोटक सिक्योरिटीज में विश्लेषक ऋषि वोरा और अपूर्वा दे साई का कहना है कि कमर्शियल व्हीकल (सीवी) सेक्टर में कमजोर माल ढुलाई गतिविधियों, ज्यादा स्टॉक और वर्ष 2026 के लिए कम ऑर्डर बुक के कारण क्लास 8 ट्रकों की मांग में गिरावट जारी है। उनका यह भी कहना है कि ठेकेदारों द्वारा वाहन बेड़े की अतिरिक्त क्षमता का उपयोग करने के कारण ऑफ-हाईवे से इतर मांग कम रहने की संभावना है जबकि कृषि मशीनरी पर बाजार का खराब माहौल और सख्त ऋण शर्तों के कारण दबाव बना हुआ है।

इलारा सिक्योरिटीज भी इसी सतर्क रुख की बात कहती है और वैश्विक ऑटोमोबाइल निर्माताओं की मांग संबंधी सतर्क टिप्पणियों, लगातार टैरिफ जोखिमों और बिगड़ती आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति की ओर इशारा करती है। जय काले के नेतृत्व वाली ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषकों का कहना है कि ऑटोमोबाइल निर्माता 2025 की चौथी तिमाही और 2026 में भी टैरिफ संबंधी दबाव से जूझ रहे हैं, जिससे अधिकांश वैश्विक कंपनियों का मुनाफा घटकर एक अंक में निचले स्तर पर आ गया है। इस पृष्ठभूमि के कारण अधिकांश ब्रोकरेज फर्म उन कंपनियों के प्रति नकारात्मक रुख अपनाए हुए हैं, जिनका विदेशी बाजार में बड़ा कारोबार है। कोटक सिक्योरिटीज ने भारत फोर्ज और सामिल को बेचने की रेटिंग जबकि सोना कॉमस्टार पर निवेश घटाएं रेटिंग बरकरार रखी है, जिसका कारण वैश्विक ऑटो सेक्टर के प्रति कमजोर अनुमान और ऊंचा मूल्यांकन है। हालांकि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की उम्मीदों  से इन शेयरों में तेजी आई है, लेकिन ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि टैरिफ में किसी भी तरह की छूट से मार्जिन में मामूली वृद्धि ही होगी, जो संभवतः कमजोर वैश्विक माहौल के कारण नगण्य हो जाएगा।

इलारा भी सामिल, सोना कॉमस्टार और भारत फोर्ज को लेकर सतर्क है। वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहनों की धीमी वृद्धि, चीन में ऑटोमोबाइल निर्माताओं के घटते लाभ, यूरोपीय संघ में पारंपरिक कंपनियों पर बाजार हिस्सेदारी का दबाव और अमेरिका में वृद्धि की गति में गिरावट सामिल पर दबाव डाल रही है। सोना कॉमस्टार के लिए टेस्ला की वृद्धि को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। साथ ही, संघीय कर क्रेडिट की समाप्ति के बाद अक्टूबर और नवंबर में आई गिरावट के कारण अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में सुधार महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है। भारत फोर्ज के लिए वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में सुस्ती बाधा बनी हुई है, खासकर इसलिए कि वोल्वो  ने 2025 के लिए उत्तरी अमेरिका में क्लास 8 इलेक्ट्रिक वाहनों के वृद्धि के अनुमान को कम कर दिया है।

लेकिन नुवामा का वित्त वर्ष 2026 को लेकर अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण है। उसका तर्क है कि वैश्विक ऑटोमोबाइल क्षेत्र के कई सेगमेंट में संभावनाएं बेहतर हुई हैं। उसका अनुमान है कि वाणिज्यिक वाहन (सीईओ) और निर्माण उपकरण के लिए स्थितियां वित्त वर्ष 2025 की तुलना में बेहतर होंगी, जिससे बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, भारत फोर्ज और सामिल जैसी वैश्विक स्तर पर मौजूद कंपनियों को लाभ हो सकता है। उनका कहना है कि ये कंपनियां ऑर्डर हासिल करने और विविधीकरण के प्रयासों के माध्यम से उद्योग से आगे निकल सकती हैं।

First Published - December 15, 2025 | 7:11 AM IST

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