facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

आईबीसी ने 26 लाख करोड़ रुपये के फंसे कर्ज निपटाए

Advertisement

क्रिसिल रेटिंग्स के विश्लेषण के मुताबिक के मुताबिक 12,000 हजार फंसे हुए कर्जदाताओँ के 12 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का प्रत्यक्ष निपटान किया गया है।

Last Updated- July 22, 2025 | 10:35 PM IST
IBC

दिवाला और धनशोधन संहिता (आईबीसी) ने वर्ष 2016 की स्थापना से अभी तक 26 लाख करोड़ रुपये के कुल ऋणों का निपटान किया है। क्रिसिल रेटिंग्स के विश्लेषण के मुताबिक के मुताबिक 12,000 हजार फंसे हुए कर्जदाताओँ के 12 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का प्रत्यक्ष निपटान किया गया है। लिहाजा यह चूक करने वाले उधारकर्ताओं पर इस संहिता के प्रभाव को दर्शाता है।

इससे भी महत्त्वपूर्ण यह है कि इसने ऋण लेने वालों के रुख में अहम बदलाव किया है। इसके चलते राष्ट्रीय कंपनी कानून प्राधिकरण (एनसीएलटी) में आवेदन दाखिल होने से पूर्व 14 लाख करोड़ रुपये के 30,000 मामलों का निपटान हो गया।

वर्ष 2016 के बाद विभिन्न ऋण समाधान तरीकों से कुल 48 लाख करोड़ रुपये के ऋणों का समाधान किया गया है। इस क्रम में आईबीसी के तहत सर्वाधिक वसूली दर 30 से 35 प्रतिशत है। हालांकि एसएआरएफएईएसआई से करीब 22 प्रतिशत, डीआरटी से करीब सात प्रतिशत और लोक अदालत से महज तीन प्रतिशत है।  

Advertisement
First Published - July 22, 2025 | 10:15 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement