सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) द्वारा कोरोनावायरस से बचाव के लिए तैयार किए गए एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफ र्ड टीकों की पहली खेप मंगलवार तक 25-30 देशों में भेजी जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने सोमवार को एक वेबिनार में कहा कि सोमवार या मंगलवार से भारत से टीके की पहली खेप 25-30 देशों में भेजी जाएगी जिसे सीरम इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है और इसके बाद हमें उम्मीद है कि देश में बनने वाले अन्य टीके भी इसी तरह भेजे जाएंगे।
टीके को अपने देश के साथ-साथ विदेश में भी जरूरतमंदों तक पहुंचाने की भावना को प्रोत्साहित करते हुए स्वामीनाथन ने कहा कि टीका निर्माताओं को विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय करार के लिए डब्ल्यूएचओ की अगुआई वाले कोवैक्स पहल को प्राथमिकता देने की जरूरत है जिसका मकसद निम्न और मध्यम आय वाले देशों तक भी टीके का सुरक्षित, प्रभावी और समान वितरण करना है। उन्होंने कहा, ‘आज हम देख रहे हैं कि कोवैक्स को टीके की आपूर्ति किए जाने से अधिक द्विपक्षीय करार हो रहे हैं।’
सीरम इंस्टीट्यूट के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने रविवार को ट्वीट किया था, ‘कई देश और सरकारें जो कोविशील्ड की आपूर्ति का इंतजार कर रही हैं, मैं विनम्रतापूर्वक आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया धैर्य रखें, सीरम इंस्टीट्यूट को भारत में टीके की व्यापक जरूरतों को प्राथमिकता देने के साथ ही बाकी दुनिया की जरूरतों के साथ भी संतुलन बिठाने का निर्देश दिया गया है। हम इसके लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं।’
इस प्रकार स्वामीनाथन ने इस बात पर भी जोर दिया कि उच्च, मध्यम और कम आमदनी वाले देशों को भी नियमों को मानने की जरूरत है क्योंकि कोवैक्स पहल तभी सफ ल होगा जब देश वितरण को प्राथमिकता देते हुए संसाधनों की पहुंच में बाधा नहीं बननी चाहिए और उन्हें निर्यात प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए।
इस बीच, भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कृष्णा एल्ला ने भी कहा कि वह कोवैक्स में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, ‘हम पहले से ही यूनिसेफ को टाइफाइड कंजुगेट और रोटावायरस आदि कई टीकों की आपूर्ति कर रहे हैं। हम जल्द ही डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व वाले कोवैक्स का हिस्सा बनना चाहते हैं। जैसे ही हम तीसरे चरण के प्रभाव वाले डेटा जारी करेंगे उसकेबाद हम कोवैक्स से जुडऩा चाहेंगे।’ उन्होंने कहा कि भारत बायोटेक भी डब्ल्यूएचओ के साथ इंट्रा-नेजल टीके पर काम करने के लिए उत्सुक है और इस पर कंपनी तेजी से आगे बढऩा चाहती है। इस सप्ताह इस टीके के पहले चरण का क्लीनिकल परीक्षण शुरू किया जाएगा।
एल्ला महसूस करते हैं कि इस समय टीके का वितरण थोड़ा विकेंद्रित और असंगठित है। वह कहते हैं, ‘हर देश टीके की खरीद की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि यह पूरी व्यवस्था अभी असंगठित है लेकिन एक बार पर्याप्त आपूर्ति हो जाने के बाद यह अधिक संगठित हो जाएगी। अगले 5-6 महीनों में मैं उम्मीद करूंगा कि दुनिया भर में टीके के वितरण के प्रयास अधिक संगठित होंगे।’
स्वामीनाथन ने बताया कि डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व वाले कोवैक्स के पास पहले से ही 2021 के लिए 2.3 अरब डॉलर की फं डिंग का अंतर है। वहीं कोविड-19 टूल्स एक्सीलरेटर या एसटीसी एक्सेलेरेटर के लिए फं डिंग का अंतर 23 अरब डॉलर या इससे अधिक होना चाहिए। एसीटी एक्सेलेरेटर अप्रैल 2020 में घोषित जी20 देशों की पहल है जिसमें कोविड-19 के इलाज, जांच, टीके के विकास, उत्पादन और समान वितरण के लिए वैश्विक सहयोग का आह्वान किया गया है। कोवैक्स एसीटी एक्सेलेरेटर के टीके का स्तंभ है।
कोवैक्सीन के असर का डेटा दो हफ्ते में
भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कृष्णा एल्ला ने कहा कि वे दो सप्ताह में कोवैक्सीन के तीसरे चरण के असर से जुड़े डेटा जारी करेंगे। एक वेबिनार में एल्ला ने कहा कि कंपनी दूसरे और तीसरे चरण के अध्ययनों को जोड़ा था और इसके प्रभाव से जुड़े डेटा जल्द ही उपलब्ध हो सकते हैं। भारत बायोटेक और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा तैयार किए गए स्वदेशी टीके को क्लीनिकल परीक्षण के तहत स्वास्थ्य सेवाकर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के टीकाकरण के लिए भारतीय दवा नियामक से मंजूरी मिली है। नियामक द्वारा प्रतिबंधित आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दूसरे चरण के सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता आधारित अध्ययनों के साथ-साथ बंदर पर किए गए परीक्षणों के आंकड़ों पर आधारित था।
एल्ला ने यह भी कहा कि इंट्रा-नेजल टीका भी इस हफ्ते पहले चरण के परीक्षण की शुरुआत करने के लिए तैयार है।