facebookmetapixel
2025 में भारत के शीर्ष 20 स्टार्टअप ने फंडिंग में बनाई बढ़त, पर छोटे स्टार्टअप को करना पड़ा संघर्षReliance Q3FY26 results: आय अनुमान से बेहतर, मुनाफा उम्मीद से कम; जियो ने दिखाई मजबूतीभारत-जापान ने शुरू किया AI संवाद, दोनों देशों के तकनीक और सुरक्षा सहयोग को मिलेगी नई रफ्तारभारत अमेरिका से कर रहा बातचीत, चाबहार बंदरगाह को प्रतिबंध से मिलेगी छूट: विदेश मंत्रालयIndia-EU FTA होगा अब तक का सबसे अहम समझौता, 27 जनवरी को वार्ता पूरी होने की उम्मीदStartup India के 10 साल: भारत का स्टार्टअप तंत्र अब भी खपत आधारित बना हुआ, आंकड़ों ने खोली सच्चाई‘स्टार्टअप इंडिया मिशन ने बदली भारत की तस्वीर’, प्रधानमंत्री मोदी बोले: यह एक बड़ी क्रांति हैसरकार की बड़ी कार्रवाई: 242 सट्टेबाजी और गेमिंग वेबसाइट ब्लॉकआंध्र प्रदेश बनेगा ग्रीन एनर्जी का ‘सऊदी अरब’, काकीनाडा में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा अमोनिया कॉम्प्लेक्सBMC Election: भाजपा के सामने सब पस्त, तीन दशक बाद शिवसेना का गढ़ ढहा

राजस्थान: पायलट पर गहलोत भारी

Last Updated- December 15, 2022 | 4:54 AM IST

राजस्थान में मची सियासी उथल-पुथल के बीच राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत करने वाले राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को आखिरकार तब पीछे हटना ही पड़ा जब गहलोत ने यह साबित कर दिया कि कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) का बहुमत उनके साथ है। सोमवार को गहलोत के साथ 100 से ज्यादा विधायक लामबंद नजर आए जिससे पायलट के समर्थकों के इस दावे पर सवालिया निशान लग गया कि उन्हें 30 विधायकों का समर्थन हासिल है। राजस्थान में 200 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के 107 विधायक हैं।
हालांकि कांग्रेस आलाकमान ने पायलट को किरकिरी होने से बचाने के लिए गहलोत को उनके खिलाफ आरोप (गहलोत की सरकार गिराने के लिए विपक्षी दल भाजपा का सहयोग करने की कोशिश से जुड़े आरोप) वापस लेने के लिए भी कहा। कांग्रेस ने उन्हें सार्वजनिक तौर पर आश्वासन दिया कि वह मौजूदा पद पर बने रहने के साथ ही अतिरिक्त पोर्टफोलियो के साथ राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत पायलट की साख पर सार्वजनिक रूप से सवालिया निशान लगाने में कामयाब रहे हैं जिसका तानाबाना वह कुछ महीने से रच रहे थे। राजस्थान पुलिस के विशेष परिचालन समूह (एसओजी) ने उन्हें राज्य में विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले में पेश होने के लिए नोटिस भेजा था। एसओजी ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज की है और मुख्यमंत्री समेत कांग्रेस के मुख्य सचेतक, कुछ मंत्रियों और विधायकों को नोटिस भी भेजा है। एसओजी मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करता है और उनसे आदेश भी लेता है।
रविवार की रात को पायलट ने अपना एकमात्र सार्वजनिक बयान न्यूजएक्स टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल नहीं हो रहे हैं। भाजपा के साथ गठबंधन करने और गहलोत सरकार को गिराने के लिए पायलट को कम से कम 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी जो गहलोत सरकार को गिराने में भाजपा के 75 विधायकों के साथ खड़े रहें। इन 25 विधायकों को अपने पद से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव के लिए तैयार रहना होगा। इनमें से कई ने विधानसभा चुनाव में भाजपा के वर्तमान उम्मीदवारों को पराजित किया था। इतनी बड़ी संख्या के इस्तीफे से बड़े पैमाने पर घमासान जैसी स्थिति बनेगी।
सीएलपी की बैठक के वक्त गहलोत थोड़े संतुष्ट नजर आए। बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया, ‘यदि कांग्रेस का कोई पदाधिकारी या सीएलपी का सदस्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकार और पार्टी के खिलाफ कोई कदम उठाता है या इस तरह की साजिश में शामिल होता है  तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।’
 वहीं दूसरी तरफ पायलट को शांत करने की कोशिश जारी हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा कांग्रेस के अन्य नेता जिन्होंने संभवत: पायलट से बात की है  उनमें अहमद पटेल, पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव के सी वेणुगोपाल शामिल हैं।
हालांकि संघ परिवार (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के शीर्ष सूत्रों का मानना है कि सचिन पायलट भाजपा से जुड़ सकते हैं। पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की जगह किसी और को लाने की इच्छुक है जो वसुंधरा के दबदबे वाले रुख से इतर थोड़ा नरम हो। 
अगर पायलट राज्यसभा के नामांकन के लिए राजी हो जाते तो भाजपा उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह तुरंत एक सीट दे देती और उन्हें केंद्र में भी कोई पद दिया जा सकता था। लेकिन पायलट राज्य की कमान चाहते हैं और भाजपा अभी उनकी उस महत्त्वाकांक्षा को हासिल करने में उनकी मदद करने की स्थिति में नहीं है। हालांकि अब पायलट का अगला कदम क्या होगा उसको लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। अगर वह अपनी पार्टी बनाने के लिए कांग्रेस से बाहर आते है तो उन्हें अपनी साख स्थापित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है, खासतौर पर तब जब गहलोत उन्हें हटाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
कांग्रेस में कई लोगों को लगता है कि यह कांग्रेस के वरिष्ठ सिपहसालारों का प्रतिनिधित्व कर रहे गहलोत और राहुल- प्रियंका गांधी का समर्थन पाने वाले पायलट जैसे युवा नेता के बीच की एक पीढ़ीगत लड़ाई है। यह संघर्ष कांग्रेस के शीर्ष प्रबंधन में नेतृत्व की कमी का संकेत दे रहा है।

सियासी घमासान के बीच आयकर विभाग का छापा
राजस्थान में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच आयकर विभाग ने आभूषण के कारोबार से जुड़े राजस्थान के एक समूह के खिलाफ कर चोरी मामले में दिल्ली और जयपुर समेत चार शहरों में छापेमारी की। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि दिल्ली, जयपुर, मुंबई और कोटा में तड़के छापा मारा गया। उन्होंने बताया कि विभाग ने यह कार्रवाई बड़ी नकदी के लेन-देन से जुड़ी जानकारी मिलने और इस लेन-देन में इस समूह का कथित संबंध होने के कारण की।  जयपुर में जिन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है उनमें से दो को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का करीबी माना जाता है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार आयकर विभाग ने इस कार्रवाई में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का साथ लिया।
आयकर विभाग द्वारा जयपुर व कोटा में कुछ कंपनियों के यहां छापे मारे जाने पर सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा, ‘यह अलोकतांत्रिक कदम है, तानाशाही है। कांग्रेस नेताओं उनसे जुड़े लोगों और संस्थानों पर छापे मारे जा रहे हैं। वे तानाशाह और भ्रष्ट लोग हैं। वे कुछ भी कर सकते हैं।’ हालांकि आधिकारिक सूत्रों ने इस अभियान का संबंध राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक संकट से होने के दावे पर कोई टिप्पणी नहीं की। भाषा

First Published - July 13, 2020 | 11:22 PM IST

संबंधित पोस्ट