भारत में टाइप 1 डायबिटीज (मधुमेह) के मामले 2021 की तुलना में 2040 तक 116 फीसदी अधिक होंगे। हालांकि वैश्विक स्तर पर यह बढ़ोतरी 106.9 फीसदी होगी। यह जानकारी द लैंसेट डायबिटीज ऐंड एंडोक्रिनोलॉजी जर्नल में दी गई है। विश्व में 2021 में टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित 84,23,530 लोग हैं।
इनमें से 64 फीसदी लोगों का आयु वर्ग 20-59 है। इस दौरान भारत में टाइप 1 डायबिटीज के 8,18,620 नए मामले उजागर हुए हैं। भारत में ऐसे मरीजों की संख्या में साल 2020 की तुलना में 2021 में 5.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। लैंसेट अध्ययन के मुताबिक टाइप 1 डायबिटीज के मामले में भारत शीर्ष के 10 देशों में है।
विश्व में साल 2021 में टाइप 1 डायबिटीज के कुल मरीजों में 60 फीसदी भारत में थे। भारत में इस बीमारी के मरीज (8,18,620) थे। भारत के बाद अमेरिका (14,14,441), ब्राजील (5,64,249), चीन (4,30,647) और जर्मनी (4,22,087) में मरीज थे। भारत ने 2021 में टाइप 1 डायबिटीज के कारण प्रति व्यक्ति जीवन के 44.85 साल गंवाएं। हालांकि वैश्विक स्तर पर 32.1 साल गंवाए गए।
अन्य गैर संचारी रोग
भारत में टाइप 1 डायबिटीज के मामले बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि भारत में गैर संचारी रोगों (एनसीडी) में डायबिटीज की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी नहीं है। साल 2019 में भारत में होने वाली मौतों में 66 फीसदी मौतें गैर संचारी रोगों के कारण हुईं। भारत में हृदय रोग के कारण सबसे अधिक मौतें हुई थी। भारत में हृदय रोग से 25,66,492, सांस संबंधी रोगों से 11,46,000 और कैंसर से 9,20,000 लोगों की मौत हुई थी।
हालांकि डायबिटीज के मरीजों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या 2010 में 2,46,617 थी, यह संख्या 2019 में बढ़कर 3,49,516 हो गई।
वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम और हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार भारत को 2030 तक गैर संचारी रोगों के कारण 3.55 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान होगा, जिसमें डायबिटीज के कारण 0.15 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान होगा। आर्थिक उत्पादन में सबसे ज्यादा नुकसान हृदय संबंधी रोगों के कारण 2.17 लाख करोड़ डॉलर होगा। इसके बाद सांस संबंधी रोगों (0.98 लाख करोड़ डॉलर) और कैंसर (0.25 लाख करोड़ डॉलर) होगा।