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बच्चों के टीका डेटा की होगी समीक्षा

Last Updated- December 11, 2022 | 7:21 PM IST

राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) 5-12 साल के बच्चों के लिए कोविड-19 टीके कोवोवैक्स और कॉर्बेवैक्स के डेटा की समीक्षा के लिए बैठक कर सकता है। सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है। अगर एनटीएजीआई को डेटा संतोषजनक  लगता है तो राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान से कम उम्र के बच्चों को जोडऩे का रास्ता तैयार हो सकता है। पिछले हफ्ते एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि बच्चों को टीकाकरण अभियान से जोडऩे के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। अधिकारी ने कहा, ’12 साल से कम उम्र के बच्चों को जोडऩे के लिए टीकाकरण अभियान से जोडऩे के लिए कोई योजना नहीं है। उनके असुरक्षित होने को लेकर कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं हैं।’ हालांकि अब काफी कुछ एनटीएजीआई की आगामी समीक्षा बैठक पर निर्भर करता है। पिछले हफ्ते एनटीएजीआई की स्थायी तकनीकी उप-समिति ने 12-17 साल के बच्चों के लिए सीरम इंस्टीट्यूट के कोवोवैक्स को राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम से जोडऩे की सिफारिश की थी। विशेषज्ञ समिति 5-12 साल के बच्चों के लिए टीका निर्माताओं द्वारा दिए गए डेटा की समीक्षा कर रही है।
इस समीक्षा के आधार पर ही फैसला लिया जाएगा। पिछले हफ्ते भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने 5-12 साल के बच्चों कॉर्बेवैक्स (बायोलॉजिकल ई) और कोवैक्सीन (भारत बायोटेक) के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी जबकि जायडस लाइफसाइंसेज के जायकोव-डी को 12 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों में इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी गई थी। भारत ने अब तक 12-14 साल के उम्र समूह के 2.91 करोड़ बच्चों को और 15-17 साल उम्र वर्ग के 10.1 करोड़ बच्चों को टीके दिए हैं।
देश में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और इस बीच स्कूल में कक्षाएं भी चल रही हैं, ऐसे में अभिभावकों को टीके को लेकर चिंता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते कहा था कि सभी पात्र बच्चों का टीकाकरण सरकार के लिए प्राथमिकता है और स्कूलों में विशेष तरह के कार्यक्रम आयोजित कराना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘हमारी प्राथमिकता सभी पात्र बच्चों को जल्द से जल्द टीके लगवाना है। स्कूलों में विशेष अभियान की जरूरत होगी। शिक्षकों और अभिभावकों को इसकी जानकारी होनी चाहिए।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि स्कूल लंबे अंतराल के बाद खुले हैं और कुछ अभिभावकों को संक्रमण के बढ़ते मामले का डर भी सता रहा है।
डॉक्टरों का भी कहना है कि छोटे बच्चों का टीकाकरण जरूरी है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, पुणे के पूर्व अध्यक्ष और बाल रोग विशेषज्ञ प्रमोद जोग कहते हैं, ‘बच्चों में कोविड-19 का संक्रमण तुलनात्मक रूप से ज्यादा गंभीर नहीं रहा है लेकिन हमने पाया कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों में दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 के 11 फीसदी मामले पाए गए। हमारे राज्य में कोविड-19 के लंबे समय तक चलने वाले मामले हैं। छोटे बच्चों में कोविड-19 संक्रमण को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। 5-12 साल के उम्र वर्ग में कई मौत और गंभीर मामलों को देखते हुए कई देशों ने इस समूह को टीके देने की शुरुआत की है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के विशेषज्ञ समूह ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों को कोविड-19 टीके देने की सिफारिश की है।’
उन्होंने कहा कि कॉर्बेवैक्स एक प्रोटीन सब-यूनिट टीका है जिसे एक स्थापित मंच का इस्तेमाल कर बनाया जाता है जो हेपेटाइटिस-बी की तरह ही है। हेपेटाइटिस बी टीका 5 साल और इससे अधिक उम्र समूह के लिए है जबकि कोवैक्सीन 6 साल और इससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए निष्क्रिय टीका है। दोनों ही टीके बच्चों में इस्तेमाल किए जाते हैं। बच्चों में कोविड-19 के कई मामले की वजह से संक्रमण का केंद्र तैयार हुई है और कई राज्यों में हाल में स्कूल बंद भी हुए हैं।

First Published - May 3, 2022 | 12:42 AM IST

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