facebookmetapixel
2025 में भारत के शीर्ष 20 स्टार्टअप ने फंडिंग में बनाई बढ़त, पर छोटे स्टार्टअप को करना पड़ा संघर्षReliance Q3FY26 results: आय अनुमान से बेहतर, मुनाफा उम्मीद से कम; जियो ने दिखाई मजबूतीभारत-जापान ने शुरू किया AI संवाद, दोनों देशों के तकनीक और सुरक्षा सहयोग को मिलेगी नई रफ्तारभारत अमेरिका से कर रहा बातचीत, चाबहार बंदरगाह को प्रतिबंध से मिलेगी छूट: विदेश मंत्रालयIndia-EU FTA होगा अब तक का सबसे अहम समझौता, 27 जनवरी को वार्ता पूरी होने की उम्मीदStartup India के 10 साल: भारत का स्टार्टअप तंत्र अब भी खपत आधारित बना हुआ, आंकड़ों ने खोली सच्चाई‘स्टार्टअप इंडिया मिशन ने बदली भारत की तस्वीर’, प्रधानमंत्री मोदी बोले: यह एक बड़ी क्रांति हैसरकार की बड़ी कार्रवाई: 242 सट्टेबाजी और गेमिंग वेबसाइट ब्लॉकआंध्र प्रदेश बनेगा ग्रीन एनर्जी का ‘सऊदी अरब’, काकीनाडा में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा अमोनिया कॉम्प्लेक्सBMC Election: भाजपा के सामने सब पस्त, तीन दशक बाद शिवसेना का गढ़ ढहा

WTO: भारत ने दी तय सीमा से अधिक सब्सिडी

भारत ने विश्व व्यापार संगठन को बताया कि साल 2022-23 में भारत के चावल उत्पादन का मूल्य 52.8 अरब डॉलर था।

Last Updated- April 16, 2024 | 11:10 PM IST
वैश्विक व्यापार और आशावाद, global trade and optimism

भारत ने लगातार पांचवें साल विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का शांति खंड लागू कर दिया है। भारत ने विपणन वर्ष 2022-23 (अक्टूबर से सितंबर) में लगातार पांचवीं बार डब्ल्यूटीओ की ओर से तय सीमा से अधिक अपने किसानों को चावल को सब्सिडी दी है।

भारत ने विश्व व्यापार संगठन को बताया कि साल 2022-23 में भारत के चावल उत्पादन का मूल्य 52.8 अरब डॉलर था। साल के दौरान किसानों को 6.39 अरब डॉलर की सब्सिडी दी गई। इसका अर्थ हुआ कि किसानों को दी जाने वाली चावल सब्सिडी उत्पादन के मूल्य का 12 फीसदी थी और वैश्विक व्यापार नियमों के अनुसार 10 फीसदी घरेलू समर्थन सीमा तय की गई है, जिसका उल्लंघन किया गया।

मगर सब्सिडी सीमा का उल्लंघन करने पर तत्काल कोई प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि भारत ने साल 2013 में विश्व व्यापार संगठन की बाली में हुई मंत्रिस्तरीय बैठक में तय शांति खंड लागू कर दिया है। यह विकासशील देशों को स्थायी समाधान मिलने तक गेहूं के लिए 10 फीसदी सब्सिडी सीमा का उल्लंघन करने की चुनौतियों से बचाता है।

विश्व व्यापार संगठन को पत्र लिखकर भारत ने बचाव करते हुए कहा है कि कार्यक्रम के तहत भंडारण भारत की गरीब और पिछड़ी आबादी की घरेलू खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ स्टडीज के प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने कहा कि भारत साल 2018-19 से ही घरेलू सब्सिडी सीमा को पार कर रहा है, लेकिन यह चावल पर अपनी मूल्य-समर्थन आधारित सार्वजनिक भंडारण नीतियों को लागू करके किसी भी कानूनी चुनौती से बचाने में सक्षम है।

सचिन ने कहा, ‘भारत चावल पर अपनी घरेलू समर्थन सीमा का उल्लंघन क्यों कर रहा है। इसका मुख्य कारण डब्ल्यूटीओ का पुराना और त्रुटिपूर्ण फॉर्मूला है जो दिए जा रहे घरेलू समर्थन के स्तर की बढ़ी हुई तस्वीर दिखाता है।’ भारत खाद्य सब्सिडी सीमा की गणना के फॉर्मूले में संशोधन की मांग कर रहा है और सार्वजनिक स्टॉक होल्डिंग के मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने के लिए भी कड़ी मेहनत कर रहा है।

भारत की शिकायत है कि 10 फीसदी सब्सिडी सीमा की गणना 1986-88 के संदर्भ मूल्य के आधार पर की जाती है जो काफी पुरानी हो चुकी है।

 

First Published - April 16, 2024 | 11:10 PM IST

संबंधित पोस्ट