facebookmetapixel
Advertisement
रूरल डिमांड के दम पर जनवरी में कारों की बिक्री 7% बढ़ी, ह्यूंदै बनी नंबर- 2 कार मैन्युफैक्चरर: FADAGold, Silver Price Today: एमसीएक्स पर सोना ₹2,065 की गिरावट के साथ खुला, चांदी भी फिसली₹929 का शेयर उड़ेगा ₹1,880 तक? इस IT Stock पर ब्रोकरेज ने लगाया बड़ा दांवकार से लेकर बाइक तक बंपर बिक्री, जानें मोतीलाल ओसवाल ने किस Auto Stock पर दी BUY की सलाहFractal Analytics vs Aye Finance IPO: किसमें कमाई का मौका, किसमें छुपा है बड़ा खतरा?Stocks to Watch Today: Titan, BSE, Aurobindo समेत ये शेयर रहेंगे फोकस मेंStock Market Today: ओपन होते ही बाजार में रफ्तार, सेंसेक्स 144 अंक बढ़त के साथ खुला, निफ्टी 25,900 के पारलोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष, राहुल गांधी की मांग पर अड़ी विपक्षी पार्टियां16वें वित्त आयोग की नई अंतरण व्यवस्था: राज्यों के लिए फायदे-नुकसान और उठते सवालAI Impact Summit 2026: पंजीयन के नाम पर वसूली से बचें, इंडिया AI मिशन ने जारी किया अलर्ट

H-1B वीजा नियम सख्त होने से IT और फाइनैंस में बनेंगे मौके! अमेरिकी कंपनियां भारत ​शिफ्ट कर सकती हैं हाई-एंड काम

Advertisement

AI को अपनाने और वीजा पर बढ़ते प्रतिबंधों के चलते अमेरिकी कंपनियां फिर से बना रही हैं अपनी लेबर स्ट्रैटेजी

Last Updated- September 30, 2025 | 12:32 PM IST
H1b visa
Representational Image

अर्थशास्त्री और इंडस्ट्री विशेषज्ञ का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के H-1B वीजा नियम कड़े होने से अमेरिकी कंपनियों के लिए हाई-एंड काम भारत में ​शिफ्ट करना तेज होगा। इसका असर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की ग्रोथ पर पड़ेगा, जो फाइनैंस से लेकर रिसर्च और डेवलपमेंट तक की गतिविधियों को हैंडल करते हैं।

विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में 1,700 से अधिक GCCs हैं, जो वैश्विक संख्या का आधा से ज्यादा हिस्सा हैं। ये पहले तकनीकी सहायता केंद्र के रूप में शुरू हुए थे, लेकिन अब यह हाई वैल्यू इनोवेशन का हब बन चुके हैं। जैसेकि लक्जरी कार डैशबोर्ड डिजाइन से लेकर दवा इजाद करने तक में इनका रोल है।

भारत में बढ़ रहे GCCs 

AI को अपनाने और वीजा पर बढ़ते प्रतिबंधों के चलते अमेरिकी कंपनियां अपनी लेबर स्ट्रैटेजी फिर से बना रही हैं। भारत के GCCs वैश्विक कौशल और मजबूत घरेलू नेतृत्व के साथ लचीले हब के रूप में उभर रहे हैं।

डेलॉइट इंडिया के पार्टनर और GCC इंडस्ट्री लीडर रोहन लोबो कहते हैं, “GCCs इस समय के लिए दमदार स्थिति में हैं। ये इन-हाउस इंजन के रूप में काम कर सकते हैं।” उन्होंने कहा कि कई अमेरिकी कंपनियां अपनी वर्कफोर्स की जरूरतों का ​नए सिरे से आकलन कर रही हैं।

वीजा शुल्क से नई चुनौतियां

ट्रंप प्रशासन ने इस महीने नए H-1B वीजा आवेदन शुल्क को $2,000–$5,000 से बढ़ाकर $1,00,000 कर दिया। अमेरिकी सीनेट ने भी H-1B और L-1 वर्कर वीजा कार्यक्रमों पर कड़े नियमों के लिए बिल पेश किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ये प्रतिबंध लागू रहते हैं, तो अमेरिकी कंपनियां AI, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, साइबर सुरक्षा और एनालिटिक्स से जुड़े हाई-एंड काम अपने भारत GCCs में शिफ्ट करेंगी। इससे रणनीतिक कार्य इन-हाउस रहेंगे।

भारत पर क्या होगा असर

कुछ विशेषज्ञ “वेट एंड वॉच” रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि प्रस्तावित HIRE एक्ट के तहत विदेशी आउटसोर्सिंग पर 25% कर लग सकता है, जिससे भारत के सेवा निर्यात पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, $283 बिलियन के IT उद्योग, जो भारत के GDP का लगभग 8% है, प्रभावित हो सकता है। लेकिन GCC सेवाओं की बढ़ती मांग इस प्रभाव को कम कर सकती है। नोमु्रा विश्लेषकों ने कहा, “H-1B वीजा पर निर्भर व्यवसाय से खोई हुई आय को GCC के जरिए उच्च सेवा निर्यात से आंशिक रूप से पूरा किया जा सकता है।”

Advertisement
First Published - September 30, 2025 | 12:32 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement