facebookmetapixel
Advertisement
Bharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमण

रूस से तेल खरीदने वालों को ट्रंप की चेतावनी, कहा- 50% तक लगाएंगे शुल्क

Advertisement

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की ओर से शांति वार्ता में धीमी प्रगति से निराश ट्रंप ने रविवार को रूस के खिलाफ द्वितीयक प्रतिबंधों की चेतावनी दी।

Last Updated- April 01, 2025 | 9:51 AM IST
Donald Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने की अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद सरकार स्थिति पर करीबी नजर रख रही है। एक अ​धिकारी ने यह जानकारी दी। यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की ओर से शांति वार्ता में धीमी प्रगति से निराश ट्रंप ने रविवार को रूस के खिलाफ द्वितीयक प्रतिबंधों की चेतावनी दी। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक पुतिन यूक्रेन में युद्ध विराम के लिए सहमत नहीं होते तब तक अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों के निर्यात पर 25 से 50 फीसदी तक शुल्क लगा सकता है। हाल में ट्रंप ने वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर 25 फीसदी शुल्क लगाने की घोषणा की थी, जो 2 अप्रैल से प्रभावी होगा।

एक अ​धिकारी ने कहा, ‘यह अमेरिका-रूस संबंधों में नया घटनाक्रम है। पहले से ही दोनों देशों के बीच अ​स्थिर कूटनीतिक परिदृश्य अब और अप्रत्याशित हो गया है। हम स्थिति का आकलन कर रहे हैं।’

ट्रंप की ताजा धमकी ने सरकारी अधिकारियों को परेशान कर दिया है क्योंकि वित्त वर्ष 2025 के पहले 9 महीनों में मूल्य के हिसाब से भारत के कच्चे तेल के आयात में रूस का हिस्सा 36.47 फीसदी था जो वित्त वर्ष 2024 की समान अवधि में 33.71 फीसदी और वित्त वर्ष 2023 में 16.72 फीसदी था। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत के तेल आयात में रूस का हिस्सा 1 फीसदी से भी कम था मगर अब वह सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे पारंपरिक देशों को पीछे छोड़कर सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है।

इस बीच अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात का अड्डा बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में अमेरिका को कुल 60 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात किया किया जो कुल निर्यात का 18.62 फीसदी है।

रूस से कच्चे तेल के आयात पर पहले से ही दबाव है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की अगुआई वाली सरकार ने 10 जनवरी को रूस के खिलाफ अपने अब तक के सबसे व्यापक प्रतिबंधों की घोषणा की थी जिसमें तेल उत्पादकों, शिपिंग फर्मों, व्यापारियों और बंदरगाहों को लक्षित किया गया था।

अमेरिका के वित्त विभाग ने रूसी की प्रमुख तेल और गैस कंपनियों गैजप्रोम नेफ्ट और सर्गुटनेफ्टेगास पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। भारत के लिए चिंता की बात यह है कि अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल का परिवहन करने वाले 183 जहाजों को भी काली सूची में डाल दिया है।

एक अधिकारी ने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पहले भी अचानक नीतिगत बदलावों और भू-राजनीतिक व्यवधानों का सामना किया है। उन्होंने कहा, ‘हाल के महीनों और पिछले साल रूसी कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। हमारे आयातक अन्य उत्पादक देशों के साथ लगातार बात कर रहे हैं।’

Advertisement
First Published - March 31, 2025 | 10:43 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement