facebookmetapixel
Advertisement
गुरुग्राम के एक प्रोजेक्ट ने बदल दी Oberoi Realty की ग्रोथ स्टोरी, ब्रोकरेज ने 86% बढ़ाया बिक्री का अनुमान, टारगेट भी बढ़ायाEPFO 3.0: हर कर्मचारी को पेंशन देने की तैयारी? गिग वर्कर्स भी होंगे शामिल, जानिए क्या बदल सकता हैPaytm की बड़ी तैयारी, वॉलेट सेवा फिर शुरू करने के लिए RBI से मांगा PPI लाइसेंसSME IPO Alert: Metalic Technoforge IPO सब्सक्रिप्शन के लिए खुला; जानें प्राइस बैंड, GMP और पूरी डीटेलSBI टे​क्निकल चार्ट पर मजबूत! ब्रोकरेज की सलाह- 2 से 3 महीने के लिए निवेश का मौका; ₹1200 तक का टारगेटईंधन महंगा, खर्च बढ़ा… फिर भी UltraTech और JK Cement पर क्यों बुलिश हैं ब्रोकरेज, 29% तक अपसाइड का अनुमानPaytm Bonus share: शेयरधारकों को अभी नहीं मिलेगा बोनस शेयर, मुनाफा मजबूत करने पर फोकस; शेयर 3% टूटा67% बढ़ी HCLTech CEO की सैलरी, ₹174 करोड़ पैकेज के साथ IT इंडस्ट्री में सबसे आगेभारत में तेजी से बढ़ रहा मोटापा और डायबिटीज की दवाओं का बाजार, किन कंपनियों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?Millworks Technologies Listing: 90% प्रीमियम के साथ शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री, IPO निवेशकों को पहले दिन ही बड़ा मुनाफा

ई-कॉमर्स समझौते में नहीं शामिल होगा भारत!

Advertisement
Last Updated- December 10, 2022 | 11:13 AM IST

आंकड़ों के स्थानीयकरण और सीमापार डेटा की आवाजाही को लेकर भले ही भारत ने रुख बदल दिया है, डब्ल्यूटीओ के ई-कॉमर्स पर बहुपक्षीय समझौते में उसके शामिल होने की संभावना नहीं है।  शुक्रवार को आम लोगों की राय के लिए रखे गए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) के नए मसौदे में सरकार ने मित्र देशों के साथ आंकड़ों के सीमा पार मुक्त प्रवाह का प्रस्ताव किया है, जो आंकड़ों के स्थानीयकरण के पहले के रुख से अलग है। 
भारत अब तक उन 87 देशों के समूह से दूर रहा है, जो दिसंबर 2017 से ही ई-कॉमर्स से व्यापार संबंधी पहलुओं को लेकर बात कर रहे हैं, जिनमें अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, चीन व जापान शामिल हैं। जनवरी 2019 में समूह के सदस्य इस बात पर सहमत हुए थे कि डब्ल्यूटीओ के सदस्यों की अधिकतम हिस्सेदारी के साथ डब्ल्यूटीओ समझौते और मौजूदा ढांचे के मुताबिक एक उच्च मानकयुक्त परिणाम हासिल किया जाएगा। 
चर्चा में शामिल विषयों में डिजिटल सीमा शुल्क पर रोक लगाना, स्थानीयकरण की बाधाओं को रोकना, बलपूर्वक प्रोद्योगिकी हस्तांतरण पर रोक लगाना, महत्त्वपूर्ण सोर्स कोड की रक्षा करना, प्रौद्योगिकी विकल्प और प्रमाणीकरण के तरीकों को सुनिश्चित करना, नेटवर्क प्रतिस्पर्धा को सुरक्षित रखना, बाजार से संचालित मानकीकरण, वैश्विक इंटरऑपरेटिबिलिटी, तेज और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना प्रमुख है। 
एक सरकारी अधिकारी ने नाम न देने की शर्त पर कहा, ‘बाजार तक पहुंच के मसले के अलावा ई-कॉमर्स जेएसआई सदस्य देशों के बीच आंकड़ों के मुक्त प्रवाह पर बल दे रहा है। लेकिन डीपीडीपी विधेयक के मुताबिक इस तह के डेटा का प्रवाह मित्रवत देशों की अधिसूचना पर निर्भर होगा। अगर हम जेएसआई (ज्वाइंट स्टेटमेंट इनीशिएटिव) में शामिल होते हैं तो हमें सभी सदस्य देशों को विश्वसनीय साझेदार के रूप में अधिसूचित करना होगा, जिसमे चीन भी शामिल है। भारत ऐसा नहीं चाहता है।’
 जेएसआई को व्यापक तौर पर बहुपक्षीय वार्ता के साधन के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी पहल डब्ल्यूटीओ के एक समूह द्वारा की गई है। भारत व अन्य विकासशील देशों ने डब्ल्यूटीओ ढांचे में नए व्यापार नियम पेश किए जाने को लेकर चिंता जताई है। ऐसे में जेएसआई समझौते को लेकर सभी सदस्य देशों में आम राय बनने की संभावना नहीं है। भारत अब तक कहता रहा है कि विकसित देशों द्वारा डब्ल्यूटीओ ढांचे से अलग ई-कॉमर्स नियम बनाने की कवायद की जा रही है, जो बहुपक्षीय निकाय की आम सहमति के सिद्धांत की उपेक्षा करता है।

Advertisement
First Published - November 22, 2022 | 2:17 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement