facebookmetapixel
Economic Survey 2026: FPI इनफ्लो में बना रहेगा उतार-चढ़ाव, FDI निवेश को बढ़ावा देने पर सरकार का फोकसRTI कानून की दोबारा हो समीक्षा- इकोनॉमिक सर्वे, संभावित बदलावों के दिये सुझावभारतीय शहरों की सुस्त रफ्तार पर इकोनॉमिक सर्वे की दो टूक: ट्रैफिक और महंगे मकान बन रहे विकास में रोड़ाछोटी गाड़ियों की बिक्री बढ़ने से दौड़ेगा Auto Stock, नए लॉन्च भी देंगे दम; ब्रोकरेज ने कहा – 25% तक रिटर्न संभवसोने-चांदी कब तक नहीं होगा सस्ता? इकोनॉमिक सर्वे ने बतायाEconomic Survey में स्मार्टफोन की लत को बताया ‘बड़ी मुसीबत’, कहा: इससे बच्चों-युवाओं में बढ़ रहा तनावEconomic Survey 2026: 4.4% फिस्कल डेफिसिट लक्ष्य की ओर बढ़ी सरकार, कैपेक्स से बनी मजबूतीEconomic Survey 2026: FY26 में प्राइमरी मार्केट्स ने दिखाया दम, ₹10.7 लाख करोड़ से ज्यादा जुटाएEconomic Survey 2026: इनकम टैक्स और कस्टम्स में बीच तालमेल जरूरी, कंपनियों को दोहरी जांच से मिलेगी राहतAdani Power Q3 results: अदाणी पावर को झटका! Q3 में मुनाफा 19% गिरा, जानिए वजह

X ने भारत सरकार के खिलाफ दायर की याचिका

ईलॉन मस्क की कंपनी ने आईटी एक्ट की धारा 69ए और 79(3)(बी) के तहत सामग्री हटाने के सरकारी आदेशों को गैर-कानूनी बताया; 'श्रेय सिंघल' मामले का हवाला

Last Updated- March 20, 2025 | 11:29 PM IST
X blocks 8000 accounts in India after govt order to combat misinformation

अमेरिकी कारोबारी ईलॉन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में भारत सरकार के विरुद्ध याचिका दायर करके कहा है कि वह गैर कानूनी ढंग से उसकी सामग्री का नियमन और मनमाना सेंसरशिप कर रही है। कंपनी ने याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और खासकर उसकी धारा 79 (3)(बी) की जो व्याख्या कर रही है वह सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का उल्लंघन है और ऑनलाइन अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित करती है।

याचिका में कहा गया है, ‘याची एक्स कॉर्प ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर की है जिसमें प्रतिवादी (केंद्र एवं अन्य) द्वार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 ए और श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मान्यता प्राप्त सुरक्षा के उल्लंघन को चुनौती दी गई है।’

एक्स ने अपनी याचिका में कहा कि गृह मंत्रालय ने सहयोग पोर्टल का निर्माण किया है जो पुलिस तथा अन्य सरकारी विभागों को धारा 69ए के तहत सीधे सामग्री को हटाने का आदेश जारी करने के सक्षम बनाती है। वह सामग्री को सेंसर करने के लिए एक समुचित ढांचा तैयार करती है जिससे बड़ी संख्या में अधिकारियों को बिना पारदर्शिता या निगरानी के सामग्री हटाने का अधिकार मिलता है।

याचिका में कहा गया है कि 17 दिसंबर 2024 को एक्स के साथ एक बैठक में गृह मंत्रालय ने कहा था कि वह केवल इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी मंत्रालय के निर्देशों पर काम करते हुए सेंसरशिप पोर्टल तैयार कर रहा है। एक्स के मुताबिक ऐसा पोर्टल बनाना कानून का उल्लंघन है।

कंपनी ने पोर्टल के माध्यम से जारी निर्देशों के पालन के लिए नोडल ऑफिसर की नियुक्ति की जरूरत को भी चुनौती दी है। उसने कहा है कि ऐसे अधिदेश की कोई वैधता नहीं है। एक्स ने याचिका में यह भी कहा है कि न्यायालय को यह घोषित करना चाहिए कि धारा 79 (3)(बी) सरकार को यह अधिकार नहीं देती कि वह सामग्री ब्लॉक करने का आदेश दे सके। उसने मांग की है कि इस धारा के तहत सामग्री हटाने के तमाम आदेशों को गैर कानूनी करार दिया जाए और अंतिम निर्णय होने तक सहयोग पोर्टल के आदेशों के प्रवर्तन पर रोक लगाई जाए।

First Published - March 20, 2025 | 11:29 PM IST

संबंधित पोस्ट