facebookmetapixel
Advertisement
केविन वार्श के नामांकन पर बाजार की प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक, अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर आशावादी बोफारूस में 1 करोड़ मजदूरों की भारी डिमांड: क्या भारतीय श्रमिकों के पास है विदेश में मोटी कमाई का मौका?अब UPI से सीधे बैंक खाते में आएगा PF का पैसा! टेस्टिंग हुई शुरू, जानें कब से उठा सकेंगे सुविधा का लाभशहरी सहकारी बैंकों के लिए बिना गारंटी वाले लोन की सीमा बढ़ाकर 20% करने का प्रस्तावबुलेट बनाने वाली कंपनी का मुनाफा 21% उछला, रॉयल एनफील्ड की बिक्री मजबूत; ₹958 करोड़ निवेश को मंजूरीTitan Q3 Results: 61% की जबरदस्त उछाल के साथ मुनाफा ₹1,684 करोड़ हुआ, रेवेन्यू ₹24,900 करोड़ के पारडीपफेक पर सरकार सख्त: 3 घंटे में हटाना होगा AI कंटेंट, 20 फरवरी से नए डिजिटल नियम लागूExplainer: ऑफिस में अब नहीं होगी मील की चिंता! ‘ईट नाउ पे लेटर’ से लंच ब्रेक बनेगा और भी खुशनुमाबॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने किराये पर दी प्रोपर्टी, जानें कितनी होगी हर महीने कमाई200% का बंपर डिविडेंड! मुनाफे में 33% की जबरदस्त उछाल के बाद AI सेक्टर से जुड़ी कंपनी का तोहफा

सिर्फ 1 फीसदी किसान ही लेते हैं फसल मुआवजा

Advertisement
Last Updated- December 14, 2022 | 11:54 PM IST
कृषि क्षेत्र में तौर-तरीके बदलने की आवश्यकता, Rethink the way we grow food

एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि पिछले तीन वर्षो में सिर्फ 0.4 फीसदी काश्तकारों को जमींदारों से तेलंगाना सरकार की बहुचर्चित रैयतु बंधु आय सहायता का हिस्सा प्राप्त हुआ। जबकि, केवल 1 फीसदी को फसल क्षति के लिए मुआवजा मिला। हालांकि, उनमें से 77 फीसदी को अंतिम समय में किसी न किसी तरह का नुकसान उठाना पड़ा। यह अध्ययन जमीनी संगठन रैयतु स्वराज्य वेदिका द्वारा किया गया था जो काश्तकारों की स्थिति और उनकी दुर्दशा के व्यापक अध्ययनों में से एक है। हालांकि आज जारी अध्ययन काफी हद तक तेलंगाना पर केंद्रित है, लेकिन यह भारत में काश्तकारों की स्थिति पर प्रकाश डालता है।

2018-19 के लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के देशभर के कृषि परिवारों की स्थिति का आकलन सर्वेक्षण के अनुसार, ग्रामीण भारत में कुल अनुमानित 10.19 करोड़ खेतों में से 17.3 फीसदी पट्टे पर थे। यह रिपोर्ट तेलंगाना के 20 जिलों के 34 गांवों में फैले 7,744 से अधिक किसानों के घर-घर जाकर व्यापक सर्वेक्षण के बाद तैयार की गई है। सर्वेक्षण किए गए 7,744 किसानों में से लगभग 2,753 किसान पट्टे पर ली गई भूमि पर काश्तकार थे। रिपोर्ट में पाया गया कि तेलंगाना में काश्तकारों की अनुमानित संख्या लगभग 22 लााख है जो एनएसएसओ द्वारा अपनी पिछली रिपोर्ट में अनुमानित संख्या से दोगुनी है।

अध्ययन से पता चला है कि राज्य के एक काश्तकार के लिए खेती के कारण औसत ऋण लगभग 2.7 लाख रुपये है। इसमें से लगभग 75 फीसदी निजी उधारदाताओं से 24 से 60 फीसदी की उच्च ब्याज दर पर ली गई है। यह भी पाया गया कि केवल 5 फीसदी काश्तकारों को राज्य सरकार के 2011 लाइसेंस्ड कल्टीवेटर्स एक्ट के तहत ऋण पात्रता कार्ड प्राप्त हुआ था और लगभग 44 फीसदी एमएसपी पर अपनी फसल बेच सकते थे। काश्तकारों की सामाजिक संरचना में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल लोगों की एक बड़ी संख्या लगभग 61 फीसदी पिछड़ी जातियों की थी। जबकि दूसरे स्थान पर 22.9 फीसदी के साथ अनुसूचित जाति के किसान थे। अनुसूचित जनजाति 9.7 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर थी, उसके बाद अन्य जातियों और अल्पसंख्यकों का स्थान था।

Advertisement
First Published - December 14, 2022 | 11:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement