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RBI के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास बने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, रिजर्व बैंक के 25वें गवर्नर के रूप में दी थी सेवा

दास सात दशकों में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले आरबीआई गवर्नर थे और उन्होंने दिसंबर 2024 में अपना दूसरा तीन वर्षीय कार्यकाल पूरा करने के बाद पद छोड़ दिया।

Last Updated- February 22, 2025 | 7:33 PM IST

सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास को प्रधानमंत्री के दूसरे प्रधान सचिव (PS-2) के रूप में नियुक्त किया है। यह नियुक्ति उस दिन से प्रभावी होगी जब दास कार्यभार ग्रहण करेंगे। पीके मिश्रा पहले से ही प्रधान सचिव के रूप में कार्यरत हैं। अधिसूचना में कहा गया कि यह नियुक्ति प्रधानमंत्री के कार्यकाल की समाप्ति तक या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी, जो भी पहले हो।

दास सात दशकों में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले आरबीआई गवर्नर थे और उन्होंने दिसंबर 2024 में अपना दूसरा तीन वर्षीय कार्यकाल पूरा करने के बाद पद छोड़ दिया। वित्त मंत्रालय में राजस्व सचिव रहे संजय मल्होत्रा ने दास की जगह 26वें आरबीआई गवर्नर के रूप में कार्यभार संभाला। आरबीआई में नियुक्ति से पहले, दास आर्थिक मामलों के सचिव और 27 नवंबर 2017 से 11 दिसंबर 2018 तक जी20 के लिए भारत के शेरपा के रूप में कार्य कर चुके हैं।

1957 में ओडिशा में जन्मे दास ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक और परास्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम, यूके से लोक प्रशासन (Public Administration) में परास्नातक भी किया। दास 1980 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए और तमिलनाडु कैडर में नियुक्त हुए। उन्होंने राज्य सरकार में विभिन्न पदों पर कार्य किया, जिनमें वाणिज्यिक कर आयुक्त और उद्योग विभाग के प्रधान सचिव शामिल थे। इसके बाद, वे केंद्र सरकार में शामिल हुए और वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य किया।

दास को सेंट्रल बैंक रिपोर्ट कार्ड्स 2024 में A+ ग्रेड मिला, जो लगातार दूसरे वर्ष उनकी उत्कृष्टता को दर्शाता है। दास के कार्यकाल के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 के अंत तक 705 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। आरबीआई द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 14 फरवरी 2025 को समाप्त सप्ताह में यह भंडार 635.7 बिलियन डॉलर था।

कोरोना महामारी के दौरान उठाए थे बड़े कदम

दास को वित्तीय क्षेत्र को सदी की सबसे बड़ी महामारी, कोविड-19, के दौरान स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय दिया जाता है। आरबीआई द्वारा नीति रेपो दर (Policy Repo Rate) में कटौती करने, वित्तीय क्षेत्र में तरलता (Liquidity) सुनिश्चित करने और ऋण पुनर्भुगतान (Loan Moratorium) पर रोक लगाने जैसे कदमों को समयोचित और आवश्यक माना गया।

हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि महामारी के दौरान ब्याज दरों में भारी कटौती के बाद दास ने दरों में बढ़ोतरी में देरी की, जो अंततः 2022 में यूरोप में युद्ध छिड़ने के बाद बढ़ाई गई। 2016 में मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे (Inflation Targeting Framework) के लागू होने के बाद पहली बार आरबीआई तीन लगातार तिमाहियों तक 6 प्रतिशत से अधिक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में असफल रहा।

दास के कार्यकाल में आरबीआई ने उद्योग की मांगों के बावजूद ब्याज दरों में कटौती नहीं की। उन्होंने 4 प्रतिशत मुद्रास्फीति लक्ष्य के साथ स्थिर संरेखण को सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

इस महीने की शुरुआत में मल्होत्रा के तहत मौद्रिक नीति समिति (MPC) की पहली समीक्षा बैठक में, लगभग पांच वर्षों के बाद, नीति रेपो दर में 25 आधार अंकों (bps) की कटौती कर इसे 6.25 प्रतिशत कर दिया गया, यह दर्शाते हुए कि मुद्रास्फीति लक्ष्य के साथ अब यह बेहतर मेल खा रही है।

First Published - February 22, 2025 | 6:49 PM IST

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