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आयात बढ़ने के बीच सख्त होगी घरेलू सौर उपकरणों की खरीद नीति, सोलर सेल होंगे ALMM में शामिल

सरकार ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब कई नियामकीय और कर संबंधी प्रतिबंधों के बावजूद सौर उपकरणों के आयात में कोई कमी नहीं आई है।

Last Updated- September 09, 2024 | 9:42 PM IST
solar

केंद्र सरकार ने सौर ऊर्जा से जुड़े स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सौर बिजली परियोजना के विकास में घरेलू खरीद को सख्ती से लागू करने की योजना बनाई है। हाल की एक अधिसूचना में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने सोलर सेल (सोलर मॉड्यूल का एक घटक) को ALMM योजना में शामिल करने का प्रस्ताव किया है। यह अब तक केवल सौर मॉड्यूल (तैयार उत्पाद) तक ही सीमित था।

सरकार ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब कई नियामकीय और कर संबंधी प्रतिबंधों के बावजूद सौर उपकरणों के आयात में कोई कमी नहीं आई है।

एएलएमएम या अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉड्यूल मैन्युफैक्चरर्स 2019 में लाई गई थी। यह सोलर मॉड्यूल्स की घरेलू आपूर्तिकर्ताओं की सरकार द्वारा सत्यापित सूची है। एएलएमएम के तहत आने वाली सौर ऊर्जा परियोजनाओं को अनिवार्य रूप से एएलएमएम इकाइयों से सौर मॉड्यूल खरीदना होता है। केंद्र या केंद्रीय एजेंसियों की सभी परियोजनाओं को एएलएमएम का पालन करना होता है। एमएनआरई के तहत आने वाले एसईसीआई सौर परियोजनाओं का ठेका देने का काम करती है, उसने एएलएमएम अनिवार्य किया है।

अब केंद्र सरकार ने सौर सेल को एएलएमएम में शामिल करने तथा घरेलू सौर सेल निर्माताओं की एक अलग सूची बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसका मतलब यह होगा कि सभी घरेलू मॉड्यूल बनाने वालों को उन इकाइयों से घरेलू सौर सेल खरीदना अनिवार्य होगा, जो एएलएमएम में सूचीबद्ध हैं।

इसमें कहा गया है, ‘एएलएमएम में आने वाली सभी परियोजनाओं को अपना सोलर पीवी मॉड्यूल उनसे खरीदना अनिवार्य होगा जो सोलर पीवी मॉड्यूल्स की एएलएमएम सूची-1 में हैं और सोलर पीवी मॉड्यूल्स को ऐसा सेल इस्तेमाल करना होगा जो उन्होंने एएलएमएम सूची-2 में शामिल मॉडल और विनिर्माताओं से लिए हों।’

देश में कई मॉड्यूल विनिर्माता सोलर सेल संबंधी पुर्जों का आयात करते हैं और असेंबल करके उसे तैयार करते हैं। अपने प्रस्ताव में मंत्रालय ने कहा है कि एएलएमएम में पहले उन सेल को शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि देश में इसकी पर्याप्त क्षमता नहीं थी।

नोटिस में कहा गया है, ‘देश में सोलर पीवी सेल की स्थापित क्षमता अगले 2 साल में उल्लेखनीय रूप से बढ़ने की उम्मीद है ऐसे में एएलएमएम के तहत सोलर पीवी सेल की सूची-2 जारी करने का प्रस्ताव किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी।’ इससे जुड़े हिस्सेदार मसौदा प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

घरेलू सेल विनिर्माण में वृद्धि की संभावना को देखते हुए एमएनआरई ने सोलर सेल को एएलएमएम में शामिल करने का फैसला किया है। सौर संयंत्रों की आपूर्ति श्रृंखला में घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए मंत्रालय पीएलआई योजना पर दांव लगा रहा है। आंतरिक प्रस्तुतियों के मुताबिक केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2024 तक सौर सेल विनिर्माण बढ़कर 34 गीगावॉट होने और वित्त वर्ष 2027 तक दोगुने से अधिक होने की उम्मीद कर रही है। इस समय यह 9 गीगावॉट है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक मांग बढ़ाने की वजह कुछ योजनाएं हैं, जिसमें पीएम-सूर्यघर, पीएम कुसुम शामिल हैं, जो घरेलू खरीद करेंगी। इसमें कहा गया है कि 2070 तक सौर उपकरणों की मांग बढ़कर 67 गीगावॉट होने की संभावना है।

लेकिन यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब केंद्र सरकार द्वारा विनिर्माण पर जोर देने और कर संबंधी बाधाओं के बावजूद सोलर सेल और मॉड्यूल का आयात बढ़ रहा है। पिछले 3 साल में सोलर सेल और मॉड्यूल का आयात कुल मिलाकर तीन गुना हो गया है। कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है, भले ही पड़ोसी देश से आयात पर बुनियादी सीमा शुल्क (बीसीडी) लगाया गया है।

बीसीडी से चीन से आयात प्रभावित हुआ है, जिसकी हिस्सेदारी 2023-24 में घटकर 62 प्रतिशत रह गई है, जो 2021-22 में 92 प्रतिशत थी। इसके बावजूद चीन से सबसे ज्यादा आयात हो रहा है। खासकर सोलर सेल का चीन से आयात होता है। एमएनआरई द्वारा संसद में दिए गए जवाब के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले 3 साल में सोलर सेल का आयात 63 प्रतिशत और मॉड्यूल काआयात 29 प्रतिशत बढ़ा है।

सरकारी कंपनी एनटीपीसी सहित कुछ कंपनियों ने बीते दिनों एएलएमएम से हटने की वकालत की है, क्योंकि इसकी वजह से देरी होती है और उनकी लागत बढ़ती है। मांग की तुलना में घरेलू क्षमता बहुत कम है, ऐसे में ज्यादातर परियोजना डेवलपरों को परियोजना लागू करने में देरी का सामना करना पड़ता है।

अधिकारियों का कहना है कि आयातित और घरेलू सोलर मॉड्यूल में कम से कम 20-25 सेंट्स/यूनिट का अंतर है। उनका कहना है कि सेल के मामले में यह अंतर कहीं अधिक है। सूत्रों ने बताया कि एनटीपीसी की सबसे कम बोली, 1.99 रुपये प्रति यूनिट की परियोजना एएलएमएम के कारण अटक गई थी।

First Published - September 9, 2024 | 9:42 PM IST

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