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रक्षा मंत्रालय ने ₹79,000 करोड़ के सौदों को दी मंजूरी; भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की बढ़ेगी ताकत

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारत की सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए मिसाइल, जहाज, टॉरपीडो और उन्नत निगरानी प्रणालियों की खरीद समेत कई खरीद प्रस्तावों को दी मंजूरी

Last Updated- October 23, 2025 | 7:07 PM IST
defence
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय रक्षा बलों की ताकत बढ़ाने के लिए 79,000 करोड़ रुपये की खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इन सौदों से थल सेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। हालांकि, इन खरीदों की समयसीमा अभी तय नहीं हुई है।

थल सेना को मिलेगी नई ताकत

थल सेना के लिए कई अहम परियोजनाओं को हरी झंडी मिली है। इनमें नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) मार्क-2 (NAMIS), ग्राउंड बेस्ड मोबाइल ELINT सिस्टम (GBMES) और मटेरियल हैंडलिंग क्रेन के साथ हाई मोबिलिटी व्हीकल्स (HMVs) शामिल हैं। मंत्रालय के मुताबिक, NAMIS दुश्मन के युद्धक वाहनों, बंकरों और अन्य किलेबंदी को नष्ट करने में मदद करेगा। GBMES दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स पर 24 घंटे नजर रखेगा। वहीं, HMVs अलग-अलग इलाकों में लॉजिस्टिक सपोर्ट को बेहतर बनाएंगे।

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नौसेना के लिए भी कई बड़े प्रस्ताव मंजूर

नौसेना के लिए भी कई बड़े प्रस्ताव मंजूर हुए हैं। इसमें लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक्स (LPDs), 30mm नेवल सरफेस गन, एडवांस्ड लाइटवेट टॉरपीडो (ALWT), इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इन्फ्रा-रेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम और 76mm सुपर रैपिड गन माउंट के लिए स्मार्ट गोला-बारूद शामिल हैं। LPDs से नौसेना, थल सेना और वायुसेना के साथ मिलकर समुद्री ऑपरेशन कर सकेगी। ये जहाज शांति मिशन और मानवीय सहायता में भी मदद करेंगे। DRDO द्वारा बनाए गए ALWT पारंपरिक, परमाणु और छोटे सबमरीन्स को निशाना बनाने में सक्षम हैं। 30mm नेवल गन समुद्री सुरक्षा और पाइरेसी रोकने में कारगर होगी।

वायुसेना के लिए CLRTS/DS को मंजूरी

वायुसेना के लिए कोलैबोरेटिव लॉन्ग रेंज टारगेट सैचुरेशन/डिस्ट्रक्शन सिस्टम (CLRTS/DS) को मंजूरी मिली है। यह सिस्टम अपने आप उड़ान भरने, लैंड करने, नेविगेट करने और मिशन क्षेत्र में पेलोड डिलीवर करने में सक्षम है।

ये सभी मंजूरियां आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इससे न सिर्फ सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश में रक्षा उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

First Published - October 23, 2025 | 6:50 PM IST

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