facebookmetapixel
Advertisement
Stocks To Watch Today: आज इन शेयरों पर रखें नजर! Paytm, Nelco, Netweb से लेकर IIFL Finance तक आए बड़े अपडेट, देखें पूरी लिस्टटाटा समूह के नए कारोबार मांग रहे बड़ी पूंजी, सेमीकंडक्टर से एयर इंडिया तक कई लाख करोड़ के निवेश पर नजरटीवी रेटिंग का संकट गहराया, सरकार की नई नीति के चलते विज्ञापन बाजार पर बढ़ी चिंताEditorial: कॉरपोरेट मुनाफे की रफ्तार तेज, निवेश पीछे; विनिर्माण को नई ताकत देना बड़ी चुनौतीरोजगार की नई राह बनेगा सेवा क्षेत्र, शिक्षा और स्वास्थ्य में छिपी बड़ी संभावनाएंउदारीकरण ने बदली दूरसंचार की तस्वीर, कभी फोन कनेक्शन के लिए सालों इंतजार करता भारत आज बना डिजिटल ताकतपरमाणु संयंत्रों के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट, सुरक्षा और निवेश दोनों पर फोकसFCNR (B) स्वैप सुविधा समय से पहले बंद, रुपये पर दबाव बढ़ा; सरकारी बॉन्ड यील्ड भी चढ़ीशेयर बाजार को मजबूत करने की तैयारी: SLBM का दायरा बढ़ाएगा SEBI, CAS को मिलेगी मजबूतीरिवॉल्विंग क्रेडिट पर रोक के प्रस्ताव से NBFC चिंतित, RBI को देंगे फीडबैक

50 फीसदी से ज्यादा MSP देने की मांग

Advertisement

किसान संगठनों ने एमएसपी को C2 लागत से 50% अधिक निर्धारित करने की मांग की, श्वेत पत्र जारी करने का आग्रह

Last Updated- June 27, 2024 | 10:34 PM IST
agriculture warehouse market

किसान संगठनों के सदस्यों ने हाल ही में नई दिल्ली में कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) से मुलाकात की और कहा कि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ए2+एफएल लागत की बजाय उत्पादन की व्यापक लागत (सी2) से 50 फीसदी अधिक मिलनी चाहिए। फिलहाल, एमएसपी उत्पादन की ए2+एफएल लागत से 50 फीसदी अधिक पर तय किया गया है।

उत्पादन की ए2+एफएल लागत में सभी नकद और गैर नकद खर्च शामिल होते हैं। इसके तहत किसान द्वारा बीज, उर्वरकों, कीटनाशकों, श्रम, पट्टे पर ली गई भूमि, ईंधन, सिंचाई आदि पर किये गए प्रत्यक्ष खर्च को शामिल किया जाता है और इसके साथ-साथ अवैतनिक पारिवारिक श्रम का एक अनुमानित मेहनताना शामिल किया जाता है।

वहीं व्यापक लागत में ए2+एफएल के तहत सभी भुगतान किए गए खर्च और पारिवारिक श्रम का अनुमानित मेहनताना तो शामिल होता ही है, साथ में इसमें किसान की स्वामित्त्व वाली भूमि और अचल संपत्ति के किराए तथा ब्याज को भी शामिल किया जाता है। इसलिए सी2 को ज्यादा व्यापक माना जाता है।

बैठक में शामिल होने वाली वामपंथी संगठन अखिल भारतीय किसान सभा ने सीएसीपी से एक श्वेत पत्र जारी करने का अनुरोध किया क्योंकि उन्हें लगता है कि एमएसपी से 10 फीसदी से भी कम किसानों को लाभ मिलता है और देश भर में गारंटीशुदा खरीद प्रणाली का अस्तित्व ही नहीं है।

उन्होंने निगमों के योगदान के जरिये मूल्य स्थिरीकरण कोष बनाने का भी सुझाव दिया। इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) ने भी आग्रह किया है कि एमएसपी को 50 फीसदी से ज्यादा तय किया जाए।

Advertisement
First Published - June 27, 2024 | 10:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement